लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी तापमान बढ़ता जा रहा है। समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच जुबानी जंग लगातार तेज हो रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव जहां योगी सरकार पर लगातार हमलावर हैं, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सपा के शासनकाल को लेकर तीखे सवाल उठा रहे हैं। लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था, शिक्षा, महिला सुरक्षा और विकास के मुद्दे पर पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार को घेरा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में दंगे होते थे और कानून का डर खत्म हो चुका था। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होते थे। विकास की रफ्तार थम गई थी और गरीबों के अधिकार पर डकैती डाली जाती थी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के साथ विकास और जनकल्याण की योजनाओं को जमीन पर उतारा है।
‘आज बहन-बेटियां सुरक्षित, अपराधी जानते हैं अंजाम’
राजधानी लखनऊ में प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत कार्यरत मिड-डे मील रसोइयों के सम्मान और कैशलेस चिकित्सा कार्ड वितरण समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने महिला सुरक्षा को लेकर अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में बहन-बेटियां सुरक्षित हैं। उन्होंने अपराधियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई किसी बहन-बेटी के साथ गलत करने की कोशिश करेगा तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश में कानून का राज स्थापित हुआ है और अपराधियों के मन में कार्रवाई का भय पैदा हुआ है।
मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो रही है। दोनों दल कानून-व्यवस्था और विकास को लेकर एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं।
‘सपा सरकार में विकास ठप था’
मुख्यमंत्री ने सपा सरकार के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि उस दौर में प्रदेश में विकास कार्यों की गति बेहद धीमी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीबों तक पहुंचने वाले संसाधनों और उनके अधिकारों पर भी भ्रष्टाचार का असर था।
योगी ने कहा कि भाजपा सरकार ने विकास को प्राथमिकता देते हुए सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में काम किया है। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल रही है और सरकार का प्रयास है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था को भी अपने भाषण का प्रमुख मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश शिक्षा की भूमि है और भाजपा सरकार ने सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं।
‘2017 से पहले गरीब बच्चे नंगे पैर स्कूल जाते थे’
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले गरीब परिवारों के बच्चे कई बार नंगे पैर स्कूल जाने को मजबूर थे। भीषण गर्मी में तपते रास्तों से गुजरना हो या कड़ाके की ठंड में स्कूल पहुंचना, गरीब बच्चों के सामने अनेक कठिनाइयां थीं।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में बच्चों के लिए यूनिफॉर्म, जूते और स्वेटर जैसी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। सरकार का उद्देश्य है कि आर्थिक स्थिति किसी बच्चे की शिक्षा में बाधा न बने।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान शिक्षा व्यवस्था में नकल को बढ़ावा मिलता था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उस समय ‘नकल हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है’ जैसी मानसिकता बना दी गई थी। योगी ने दावा किया कि भाजपा सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और नकल पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं।
3.53 लाख रसोइयों को सरकार की चार बड़ी सौगात
मुख्यमंत्री का कार्यक्रम केवल राजनीतिक हमलों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने प्रधानमंत्री पोषण योजना से जुड़े प्रदेश के 3.53 लाख से अधिक रसोइयों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रक्षाबंधन से पहले सरकार रसोइयों के हित में चार बड़े कार्यक्रम लेकर आई है। इनमें मानदेय में बढ़ोतरी, दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सहायता, कैशलेस चिकित्सा सुविधा और ड्रेस के लिए मिलने वाली राशि में वृद्धि शामिल है।
सरकार के मुताबिक, रसोइयों के मानदेय में प्रति माह 1,000 रुपये की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है। इससे प्रदेश के सरकारी और परिषदीय विद्यालयों में पीएम पोषण योजना के तहत काम करने वाले लाखों रसोइयों को सीधा लाभ मिलेगा।
इसके अलावा किसी रसोइया के साथ दुर्घटना होने की स्थिति में उसके परिवार को 2 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार केवल रसोइयों के काम को सम्मान नहीं दे रही, बल्कि उनके परिवारों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा को भी मजबूत करने का प्रयास कर रही है।
हर साल 5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज
सरकार ने रसोइयों और उनके परिवारों के स्वास्थ्य को लेकर भी बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रत्येक रसोइया और उसके परिवार को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
इसके लिए रसोइयों को चिकित्सा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को गंभीर बीमारी या इलाज के दौरान बड़ी राहत मिलेगी।
यह घोषणा ऐसे समय महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब सरकार अपने कर्मचारी और योजना से जुड़े कार्यकर्ताओं के सामाजिक सुरक्षा कवच को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
ड्रेस के लिए अब 500 नहीं, 1000 रुपये
रसोइयों को मिलने वाली ड्रेस अथवा साड़ी की राशि में भी बढ़ोतरी की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक ड्रेस के लिए मिलने वाली 500 रुपये की राशि को बढ़ाकर 1,000 रुपये किया जा रहा है।
इसके साथ ही रसोइयों को पोषण प्रहरी के रूप में सम्मानित करने की बात भी कही गई। सरकार की ओर से यूनिफॉर्म खरीदने के लिए 500 रुपये तथा दस्ताने/ग्लव्स के लिए 400 रुपये की अतिरिक्त सहायता का भी उल्लेख किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रसोइयों को हेड कवर, ग्लव्स और एप्रन किट उपलब्ध कराने की दिशा में भी पहल की जाएगी, ताकि विद्यालयों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाले कर्मियों को बेहतर सुरक्षा और कार्य सुविधा मिल सके।
मातृत्व अवकाश के नियमों में भी बदलाव
महिला रसोइयों के लिए मातृत्व अवकाश के नियमों में बदलाव को भी मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि मातृत्व अवकाश प्राप्त करने के लिए बच्चों की उम्र के बीच अंतर से जुड़ी पुरानी बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है।
सरकार का दावा है कि इस बदलाव से महिला रसोइयों को मातृत्व के दौरान अधिक सुविधा और सुरक्षा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की नीतियों में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
चुनावी साल में सियासी संदेश साफ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस पूरे संबोधन में एक तरफ सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों का जिक्र रहा, तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल पर तीखे राजनीतिक हमले भी हुए। कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, शिक्षा और विकास को लेकर भाजपा सरकार अपनी उपलब्धियां गिना रही है, जबकि विपक्ष इन दावों पर सवाल उठाता रहा है।
विधानसभा चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दलों के बीच यह टकराव आने वाले महीनों में और तेज होने की संभावना है। योगी सरकार जहां अपने कार्यकाल की योजनाओं और कानून-व्यवस्था को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में दिखाई दे रही है, वहीं समाजवादी पार्टी सरकार की नीतियों और कामकाज को लेकर भाजपा पर पलटवार कर रही है।
ऐसे में लखनऊ के मंच से मुख्यमंत्री का संदेश दोहरा रहा—सपा के पुराने शासन पर हमला और भाजपा सरकार की योजनाओं का प्रचार। अब चुनावी मैदान में जनता किसके दावे को स्वीकार करती है, इसका फैसला अगले विधानसभा चुनाव में होगा।














