“चारपाई से बंधे मिले पैर, सिर पर गंभीर चोटें और पास पड़ी ईंटें—लालपुर गांव में वारदात से हड़कंप; मंदिर से 250 मीटर दूर घायल मिला 22 वर्षीय युवक, पुलिस जांच में जुटी”
एटा। उत्तर प्रदेश के एटा जिले के निधौली कलां थाना क्षेत्र के लालपुर गांव में गुरुवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब मंदिर के अंदर करीब 70 वर्षीय पुजारी भोजराज का शव चारपाई पर पड़ा मिला। करीब दो दशक से मंदिर में रहकर पूजा-पाठ करने वाले बुजुर्ग पुजारी की इस तरह हत्या ने ग्रामीणों को झकझोर दिया है। प्रारंभिक परिस्थितियां किसी सामान्य मौत की ओर नहीं, बल्कि एक गंभीर आपराधिक वारदात की तरफ इशारा कर रही हैं।
घटनास्थल पर मिले कथित साक्ष्यों के मुताबिक भोजराज के पैर चारपाई से बंधे हुए थे। उनके सिर पर गंभीर चोटों के निशान मिले और चारपाई के पास ईंटें पड़ी थीं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि हमलावरों ने ईंटों से उनके सिर पर हमला किया होगा। हालांकि हत्या का वास्तविक कारण क्या था, हमलावर कौन थे और वारदात किस परिस्थिति में हुई—इन सवालों का अंतिम जवाब पुलिस जांच, फॉरेंसिक साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।
बीस साल से मंदिर में रह रहे थे भोजराज, बुधवार शाम तक थे बिल्कुल ठीक
भोजराज पिछले करीब 20 वर्षों से लालपुर गांव के मंदिर में रहकर पूजा-पाठ करते थे। स्थानीय लोगों के बीच उनकी पहचान मंदिर में रहने वाले बुजुर्ग पुजारी के रूप में थी। बुधवार शाम करीब सात बजे उनके भतीजे प्रेमपाल ने उन्हें खाना खिलाया था। परिवार के मुताबिक उस समय भोजराज पूरी तरह ठीक थे।
इसके बाद वह मंदिर में ही रुक गए। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ घंटों बाद मंदिर परिसर में उनकी जिंदगी का अंत हो जाएगा।
गुरुवार सुबह जब मंदिर के अंदर उनका शव मिला तो परिवार के साथ-साथ ग्रामीणों में भी हड़कंप मच गया। सूचना पुलिस तक पहुंची और देखते ही देखते मंदिर के आसपास लोगों की भीड़ जुटने लगी।
चारपाई पर बंधे पैर और सिर पर चोटें—उठ रहे कई गंभीर सवाल
वारदात की सबसे गंभीर कड़ी मृतक के पैरों का चारपाई से बंधा मिलना बताई जा रही है। यदि यह तथ्य जांच में पुष्ट होता है तो इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि बुजुर्ग पुजारी को आखिर किसने और क्यों बांधा?
चारपाई के पास पड़ी ईंटों और सिर पर लगी गंभीर चोटों ने मामले को और रहस्यमय बना दिया है। घटनास्थल की परिस्थितियों के आधार पर ग्रामीणों ने आशंका जताई कि ईंटों से सिर पर हमला किया गया होगा।
लेकिन यहां कई सवाल अभी अनुत्तरित हैं—क्या हमलावर पहले से पुजारी को जानते थे? क्या वारदात किसी विवाद का परिणाम थी? क्या मंदिर में प्रवेश करने वाला व्यक्ति परिचित था? क्या हत्या से पहले पुजारी के साथ कोई विवाद हुआ? और सबसे बड़ा सवाल—वारदात के पीछे मकसद क्या था?
पुलिस इन्हीं सवालों के जवाब तलाश रही है।
जेब से रुपये न मिलने की बात, लेकिन लूट की पुष्टि नहीं
ग्रामीणों के अनुसार भोजराज की जेब से रुपये-पैसे नहीं मिले। घटनास्थल से एक चाबी मिलने की बात भी सामने आई है। इन परिस्थितियों ने जांच को कई संभावित दिशाओं में खोल दिया है।
हालांकि केवल जेब से पैसे नहीं मिलने के आधार पर इसे लूट की वारदात मानना जल्दबाजी होगी। पुलिस को यह निर्धारित करना होगा कि मंदिर में मौजूद सामान, चाबी और अन्य वस्तुओं की स्थिति क्या थी और क्या किसी वस्तु के गायब होने की पुष्टि हुई है।
जांच का अहम हिस्सा यही होगा कि घटनास्थल पर मिले प्रत्येक साक्ष्य को वैज्ञानिक तरीके से जोड़कर वारदात की पूरी तस्वीर तैयार की जाए।
मंदिर से महज 250 मीटर दूर घायल मिला 22 वर्षीय युवक
पुजारी की हत्या की खबर से गांव अभी उबर भी नहीं पाया था कि मंदिर से करीब 250 मीटर की दूरी पर एक और चौंकाने वाली घटना सामने आई। गांव का 22 वर्षीय युवक ब्रजेश कुमार घायल अवस्था में मिला। उसके सिर में चोटें थीं।
ग्रामीणों ने उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज एटा पहुंचाया। हालत गंभीर होने के कारण चिकित्सकों ने उसे आगरा रेफर कर दिया।
अब पुलिस के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि ब्रजेश वहां घायल अवस्था में कैसे पहुंचा?
क्या उसे किसी हादसे में चोट लगी? क्या किसी ने उस पर हमला किया? क्या वह किसी घटना का प्रत्यक्षदर्शी हो सकता है? या फिर उसकी चोटों का पुजारी की हत्या से कोई संबंध है?
फिलहाल इन सवालों पर पुलिस किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। ब्रजेश के स्वस्थ होने और बयान दर्ज होने के बाद जांच को महत्वपूर्ण दिशा मिल सकती है।
क्या पहले से मंडरा रहा था खतरा? पुजारी ने जताई थी हत्या की आशंका
इस मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। ग्रामीण रमेश चंद्र के अनुसार भोजराज ने कुछ समय पहले अपने नाती और भतीजे से कहा था कि मंदिर पर अक्सर कोई पथराव करता है।
इतना ही नहीं, उनके बारे में यह भी बताया जा रहा है कि उन्होंने आशंका जताई थी कि कोई उनकी हत्या कर सकता है।
यदि यह बात जांच में पुष्ट होती है तो यह पुलिस के लिए बेहद महत्वपूर्ण सुराग हो सकती है। सवाल उठता है कि मंदिर पर पहले पथराव की घटनाएं क्यों हो रही थीं? कौन लोग ऐसा कर रहे थे? क्या किसी विवाद को लेकर पुजारी पहले से परेशान थे? और क्या पुराने घटनाक्रम का वर्तमान हत्या से कोई संबंध है?
परिवार ने उस समय उनकी आशंका को गंभीरता से नहीं लिया था। अब हत्या के बाद वही कथित चेतावनी जांच का हिस्सा बन गई है।
फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड ने खंगाला घटनास्थल
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अपर पुलिस अधीक्षक श्वेताभ पाण्डेय समेत पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।
फॉरेंसिक टीम ने मंदिर और आसपास के क्षेत्र से साक्ष्य जुटाए। डॉग स्क्वायड को भी मौके पर बुलाया गया, ताकि संभावित सुरागों की तलाश की जा सके।
ऐसे मामलों में घटनास्थल से मिले छोटे से छोटे साक्ष्य की अहमियत होती है। ईंटों पर मौजूद संभावित निशान, चारपाई, बंधन में इस्तेमाल सामग्री, मंदिर परिसर में पैरों के निशान अथवा अन्य भौतिक साक्ष्य जांच की दिशा तय कर सकते हैं।
पुलिस इन्हीं वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर वारदात की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है।
पुलिस की जांच के केंद्र में कई सवाल
क्षेत्राधिकारी ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह के मुताबिक भोजराज लंबे समय से मंदिर में रह रहे थे और उनकी हत्या की गई है। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और मामले की जांच की जा रही है।
जांच फिलहाल कई बिंदुओं पर आगे बढ़ रही है। इनमें पुजारी के पुराने विवाद, मंदिर पर पूर्व में हुए पथराव, घटनास्थल पर मौजूद वस्तुएं, संभावित प्रत्यक्षदर्शी, मृतक के परिचित लोग और मंदिर से कुछ दूरी पर घायल मिले ब्रजेश की भूमिका या जानकारी शामिल है।
हालांकि किसी व्यक्ति को संदिग्ध या आरोपी मानने से पहले पुलिस को ठोस साक्ष्य जुटाने होंगे। जांच पूरी होने तक किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आरोप को तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
पोस्टमार्टम और ब्रजेश के बयान से खुल सकता है राज
पुजारी की मौत के वास्तविक कारण और चोटों की प्रकृति स्पष्ट करने में पोस्टमार्टम रिपोर्ट अहम होगी। इसी के साथ फॉरेंसिक रिपोर्ट और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों का वैज्ञानिक परीक्षण भी महत्वपूर्ण रहेगा।
दूसरी ओर, ब्रजेश की स्थिति और उसका बयान जांच में नई दिशा दे सकता है। यदि वह घटना से पहले या बाद की किसी गतिविधि के बारे में जानकारी देता है, तो पुलिस के लिए घटनाक्रम को जोड़ना आसान हो सकता है।
फिलहाल लालपुर गांव में सबसे बड़ा सवाल यही है कि मंदिर जैसे स्थान पर रहने वाले एक बुजुर्ग पुजारी की हत्या आखिर किसने और क्यों की?
करीब 20 वर्षों से मंदिर में रह रहे भोजराज की जिंदगी का अंत जिस परिस्थिति में हुआ, उसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। चारपाई से बंधे पैर, सिर पर गंभीर चोटें, पास पड़ी ईंटें, पहले पथराव की कथित घटनाएं और कुछ ही दूरी पर घायल मिला युवक—ये सभी तथ्य जांच के लिए अलग-अलग कड़ियां हैं।
अब निगाहें पुलिस की जांच पर टिकी हैं। क्या इन कड़ियों को जोड़कर हत्या की पूरी कहानी सामने आएगी, या इस वारदात के पीछे छिपे सवाल कुछ और समय तक लालपुर गांव को परेशान करते रहेंगे?
पुलिस का दावा है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। ऐसे में उम्मीद है कि पोस्टमार्टम, फॉरेंसिक जांच और घायल युवक के बयान के बाद इस सनसनीखेज वारदात की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।















