नई दिल्ली | “ऊषा माहना” पर्दाफाश न्यूज़
एनआरआई परिवारों के लिए खास पहल: 37 वर्षों के अनुभव से तैयार पुस्तक में 50 से अधिक वास्तविक उदाहरणों के जरिए समझाए गए कर, संपत्ति, धन हस्तांतरण और उत्तराधिकार के जटिल नियम
विदेश में रह रहे भारतीयों के सामने अक्सर एक बड़ा सवाल खड़ा होता है—विदेश में कमाई गई रकम का भारत में क्या होगा, यहां मौजूद संपत्ति का प्रबंधन कैसे किया जाएगा और परिवार की अगली पीढ़ी तक धन को कानूनी तरीके से कैसे पहुंचाया जाएगा? अलग-अलग देशों के कर कानून, बैंकिंग नियम, विदेशी मुद्रा से जुड़े प्रावधान और उत्तराधिकार की प्रक्रियाएं इन सवालों को और जटिल बना देती हैं। ऐसी ही समस्याओं को सरल भाषा में समझाने और उनके व्यावहारिक समाधान तलाशने के उद्देश्य से चार्टर्ड अकाउंटेंट एवं अमेरिका के एनरोल्ड एजेंट सीए विनोद रावल की नई पुस्तक ‘ब्रिजिंग बॉर्डर्स – टैक्सेशन, रिपैट्रिएशन एंड सक्सेशन’ का लोकार्पण नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में किया गया।
हर-आनंद पब्लिकेशंस द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक विशेष रूप से अनिवासी भारतीयों (एनआरआई), विदेशों से जुड़े भारतीय परिवारों, कर सलाहकारों और वित्तीय क्षेत्र के पेशेवरों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य उन परिवारों को सही जानकारी और व्यावहारिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है, जिनके सदस्य अलग-अलग देशों में रहते हैं, लेकिन जिनकी आर्थिक, पारिवारिक और संपत्ति संबंधी जिम्मेदारियां भारत से जुड़ी हुई हैं।
37 वर्षों का अनुभव, जटिल नियमों को समझाने की कोशिश
सीए विनोद रावल ने अपने करीब 37 वर्षों के अनुभव के आधार पर इस पुस्तक को तैयार किया है। इतने लंबे पेशेवर अनुभव से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं को पुस्तक में शामिल करने का प्रयास किया गया है, ताकि पाठकों को केवल कानूनी प्रावधानों की जानकारी ही न मिले, बल्कि यह भी समझ आए कि वास्तविक जीवन में इन नियमों का सामना किस तरह करना पड़ सकता है।
आज बड़ी संख्या में भारतीय विदेशों में रहकर काम कर रहे हैं और वहीं अपना व्यवसाय, निवेश तथा पारिवारिक जीवन आगे बढ़ा रहे हैं। इसके बावजूद भारत में उनकी संपत्ति, बैंक खातों, निवेश, पारिवारिक उत्तराधिकार और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई मामले ऐसे होते हैं, जिनमें भारतीय कानूनों के साथ दूसरे देशों के नियम भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
ऐसी परिस्थितियों में छोटी-सी गलतफहमी भी कर संबंधी परेशानी, धन हस्तांतरण में देरी या संपत्ति के बंटवारे के दौरान विवाद का कारण बन सकती है। पुस्तक इसी तरह की उलझनों को समझने और समय रहते उचित वित्तीय योजना बनाने में सहायता देने का प्रयास करती है।
कठिन कानूनी भाषा नहीं, 50 से अधिक वास्तविक उदाहरणों से समझाए गए विषय
इस पुस्तक की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक यह है कि इसमें जटिल कानूनी और वित्तीय विषयों को केवल तकनीकी भाषा में प्रस्तुत करने के बजाय 50 से अधिक वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया है। इसका उद्देश्य आम पाठकों के लिए उन नियमों को समझना आसान बनाना है, जिनकी जानकारी सामान्यतः विशेषज्ञों और पेशेवर सलाहकारों तक सीमित रह जाती है।
पुस्तक में एक भारतीय परिवार की कहानी के माध्यम से यह समझाने की कोशिश की गई है कि विदेश में रहने वाले भारतीयों को भारत में कर संबंधी जिम्मेदारियों का प्रबंधन कैसे करना चाहिए, धन का कानूनी तरीके से हस्तांतरण कैसे किया जा सकता है, संपत्ति के बंटवारे की योजना किस प्रकार बनाई जा सकती है और भविष्य में परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए किन बातों पर ध्यान देना आवश्यक है।
इस तरह पारिवारिक परिस्थितियों से जुड़े उदाहरणों के जरिए पाठकों को यह समझने का अवसर मिलता है कि अलग-अलग देशों में रहने वाले परिवारों के लिए वित्तीय फैसले लेते समय किन कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं पर विचार करना चाहिए।
टैक्स से लेकर उत्तराधिकार तक, एक ही पुस्तक में कई अहम कानून
‘ब्रिजिंग बॉर्डर्स’ में भारत और विदेशों से जुड़े वित्तीय मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कई कानूनों और नियमों की जानकारी एक ही स्थान पर देने का प्रयास किया गया है।
इनमें आयकर कानून, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), दोहरे कराधान से बचाव समझौता (डीटीएए), विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए), धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), विदेशी खातों और वित्तीय सूचनाओं से जुड़े फैटका (FATCA) तथा कॉमन रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड (CRS), बेनामी कानून, ब्लैक मनी एक्ट और उत्तराधिकार से संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं।
इन कानूनों की जानकारी एनआरआई परिवारों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि विदेश में आय अर्जित करने, भारत में निवेश रखने, संपत्ति खरीदने-बेचने, धन भेजने और परिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति हस्तांतरित करने जैसे मामलों में अलग-अलग नियम लागू हो सकते हैं।
पुस्तक इन विषयों को एक व्यापक दृष्टिकोण से समझाने का प्रयास करती है, ताकि पाठक अपने मामलों से संबंधित प्रश्नों को बेहतर ढंग से पहचान सकें और जरूरत पड़ने पर उचित विशेषज्ञ सलाह ले सकें।
विदेश से भारत पैसा भेजने और संपत्ति संभालने में मिलेगी मदद
विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए केवल पैसा कमाना ही चुनौती नहीं है। अपनी कमाई का सही प्रबंधन करना, भारत में मौजूद संपत्ति की देखरेख करना और भविष्य में परिवार के सदस्यों के बीच धन का व्यवस्थित हस्तांतरण सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
कई परिवारों की संपत्ति भारत में होती है, जबकि उनके बच्चे या अन्य उत्तराधिकारी विदेशों में रहते हैं। ऐसी स्थिति में संपत्ति के स्वामित्व, कर संबंधी दायित्वों, धन हस्तांतरण और उत्तराधिकार की प्रक्रिया को समझना जरूरी हो जाता है।
पुस्तक में इन्हीं विषयों पर ध्यान केंद्रित करते हुए यह बताने का प्रयास किया गया है कि वित्तीय और कानूनी नियमों की जानकारी के साथ किस तरह बेहतर योजना बनाई जा सकती है। इससे एनआरआई परिवारों के साथ-साथ कर सलाहकारों, वित्तीय पेशेवरों और सीमा-पार वित्तीय मामलों से जुड़े लोगों को भी उपयोगी संदर्भ सामग्री मिल सकती है।
हालांकि, प्रत्येक मामले में संबंधित व्यक्ति की कर स्थिति, निवास की स्थिति, संपत्ति के प्रकार और लागू कानूनों के आधार पर अलग-अलग नियम प्रभावी हो सकते हैं। इसलिए पुस्तक की जानकारी के साथ आवश्यकतानुसार विशेषज्ञ सलाह लेना भी महत्वपूर्ण रहेगा।
‘ब्रिजिंग बॉर्डर्स’ का उद्देश्य जटिलताओं को सरल बनाना: सीए विनोद रावल
पुस्तक के लोकार्पण के अवसर पर सीए विनोद रावल ने कहा, “आज बड़ी संख्या में भारतीय दुनिया के अलग-अलग देशों में रह रहे हैं। ऐसे परिवारों को कर, संपत्ति और उत्तराधिकार से जुड़े नियम समझने में काफी कठिनाई होती है। ‘ब्रिजिंग बॉर्डर्स’ का उद्देश्य इन जटिल विषयों को सरल भाषा में समझाना और लोगों को सही निर्णय लेने में सहायता करना है।”
उनके इस वक्तव्य से पुस्तक की मूल भावना स्पष्ट होती है। इसका उद्देश्य केवल कानूनों की जानकारी देना नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए विषयों को अधिक सुलभ बनाना है, जिन्हें भारत और विदेशों के बीच फैली अपनी आर्थिक जिम्मेदारियों का प्रबंधन करना पड़ता है।
3.5 करोड़ प्रवासी भारतीयों और उनके परिवारों को ध्यान में रखकर तैयार की गई पुस्तक
करीब 3.5 करोड़ प्रवासी भारतीयों और उनके परिवारों को ध्यान में रखकर लिखी गई यह पुस्तक कर, संपत्ति, उत्तराधिकार और विभिन्न देशों के नियमों को समझने में मार्गदर्शन प्रदान करने का प्रयास करती है।
वैश्विक स्तर पर भारतीय परिवारों के विस्तार के साथ सीमा-पार वित्तीय योजना की आवश्यकता भी बढ़ रही है। ऐसे में कर संबंधी नियमों की जानकारी, संपत्ति के व्यवस्थित प्रबंधन और उत्तराधिकार की समय रहते तैयारी जैसे विषयों का महत्व और अधिक हो जाता है।
लोकार्पण समारोह में कर, बैंकिंग, कानून और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भी वैश्विक भारतीय परिवारों के लिए बेहतर वित्तीय योजना और सही जानकारी की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में इस बात पर चर्चा हुई कि बदलते आर्थिक और कानूनी परिवेश में जागरूकता तथा व्यवस्थित योजना परिवारों को बेहतर निर्णय लेने में मदद कर सकती है।
कई गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी में हुआ लोकार्पण
नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित पुस्तक लोकार्पण समारोह में विभिन्न क्षेत्रों की कई प्रतिष्ठित हस्तियां उपस्थित रहीं। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री के. जे. अल्फोंस, दिल्ली जेल के पूर्व महानिदेशक श्री एस. बी. के. सिंह, 200 से अधिक कर संबंधी पुस्तकें लिख चुके डॉ. रवि गुप्ता, आईडीबीआई बैंक के मुख्य महाप्रबंधक एवं क्षेत्रीय प्रमुख (दिल्ली) श्री शशांक दीक्षित तथा प्रसिद्ध लेखक एवं प्रेरक वक्ता श्री शिव खेड़ा शामिल रहे।
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों और विशेषज्ञों ने वैश्विक भारतीय परिवारों के लिए वित्तीय जागरूकता, उचित योजना और प्रासंगिक जानकारी की उपयोगिता को रेखांकित किया।
इस पुस्तक का प्रकाशन हर-आनंद पब्लिकेशंस ने किया है, जबकि पुस्तक लोकार्पण समारोह का प्रायोजन आईडीबीआई बैंक ने किया।
बदलते दौर में वित्तीय जागरूकता की दिशा में एक पहल
कुल मिलाकर, ‘ब्रिजिंग बॉर्डर्स – टैक्सेशन, रिपैट्रिएशन एंड सक्सेशन’ उन भारतीय परिवारों के लिए एक उपयोगी संदर्भ पुस्तक बनने का प्रयास है, जिनकी आर्थिक और पारिवारिक जिम्मेदारियां एक से अधिक देशों से जुड़ी हुई हैं। कराधान, धन हस्तांतरण, संपत्ति प्रबंधन और उत्तराधिकार जैसे विषयों को एक ही पुस्तक में समेटने तथा वास्तविक उदाहरणों के जरिए समझाने की इसकी कोशिश इसे विशेष बनाती है।
पुस्तक का संदेश स्पष्ट है—जब परिवार सीमाओं के पार फैलते हैं, तो उनकी वित्तीय जिम्मेदारियां भी अधिक जटिल हो सकती हैं। ऐसे में सही जानकारी, समय पर योजना और लागू नियमों की समझ भविष्य की परेशानियों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।















