Wednesday, July 8, 2026
Your Dream Technologies
HomeBusinessE20 पेट्रोल पर भ्रम फैलाने वालों को गडकरी की खुली चुनौती: "एक...

E20 पेट्रोल पर भ्रम फैलाने वालों को गडकरी की खुली चुनौती: “एक भी ऐसी कार बताइए जिसे एथनॉल मिश्रित पेट्रोल से नुकसान हुआ हो”

नई दिल्ली:देश में एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने आलोचकों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि E20 पेट्रोल के कारण किसी भी कार में खराबी आने का आज तक एक भी प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा, “यदि किसी के पास ऐसी कोई कार है जिसे E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से नुकसान हुआ हो, तो उसका सिर्फ एक नाम बता दें।”

‘विकसित भारत’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि एथनॉल मिश्रित ईंधन के खिलाफ सुनियोजित तरीके से गलत जानकारी फैलाई जा रही है। उनका आरोप था कि इसके पीछे कुछ ऐसे हित समूह हैं जो नहीं चाहते कि भारत जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता कम करे।


जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता देश के लिए बड़ा आर्थिक बोझ

गडकरी ने कहा कि भारत हर वर्ष कच्चे तेल और अन्य जीवाश्म ईंधनों के आयात पर लगभग 22 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है। यह न केवल देश की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ डालता है, बल्कि पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन की चुनौती को भी बढ़ाता है।

उन्होंने कहा कि यदि भारत को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनना है, तो स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को तेजी से अपनाना होगा। एथनॉल मिश्रित पेट्रोल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


E20 पेट्रोल पर फैलाए जा रहे भ्रम को किया खारिज

पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर यह दावा किया जा रहा है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों का माइलेज कम हो जाता है और इंजन पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए गडकरी ने कहा कि अब तक ऐसा कोई वैज्ञानिक या व्यावहारिक प्रमाण सामने नहीं आया है जो इन आरोपों की पुष्टि करता हो।

उन्होंने कहा कि भारत में करोड़ों वाहन E20 पेट्रोल का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन किसी भी वाहन निर्माता या उपभोक्ता ने ऐसी कोई गंभीर शिकायत दर्ज नहीं कराई है जो इस ईंधन को दोषी ठहराती हो।


भारत ने हासिल किया E20 मिश्रण का लक्ष्य

केंद्र सरकार पहले ही पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य प्राप्त कर चुकी है। इससे देश की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम हुई है और कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी आई है।

एथनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और चावल जैसे कृषि उत्पादों से किया जाता है। इससे ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिली है।


ब्राजील मॉडल का भी किया उल्लेख

गडकरी ने बताया कि ब्राजील जैसे देशों में उपभोक्ताओं के पास अलग-अलग एथनॉल मिश्रण वाले ईंधन चुनने का विकल्प होता है। वहां अधिक एथनॉल वाले ईंधन की कीमत भी अपेक्षाकृत कम रखी जाती है ताकि लोग स्वच्छ ईंधन अपनाने के लिए प्रोत्साहित हों।

उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में भारत भी इस दिशा में आगे बढ़ सकता है।


परिवार की कंपनियों पर लगे आरोपों का दिया जवाब

कुछ लोगों द्वारा लगाए गए इस आरोप पर कि उनके परिवार की कंपनियां एथनॉल उत्पादन से जुड़ी हैं और इसी कारण वे एथनॉल को बढ़ावा दे रहे हैं, गडकरी ने स्पष्ट किया कि उनके परिवार के पास भले ही चीनी मिलें हों, लेकिन उनकी कंपनियां एथनॉल उत्पादन पर निर्भर नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि देश में एथनॉल की पर्याप्त उपलब्धता है और इसका विस्तार केवल राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।


एथनॉल नीति से किसानों को मिला बड़ा फायदा

गडकरी ने दावा किया कि एथनॉल उत्पादन के लिए मक्के के उपयोग का फैसला किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हुआ।

उन्होंने बताया कि पहले मक्के का बाजार भाव करीब 1,200 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 1,800 रुपये था। एथनॉल उत्पादन बढ़ने के बाद मक्के की कीमत बढ़कर करीब 2,800 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई।

उन्होंने कहा कि केवल उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों को इस नीति से लगभग 45,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिला है।


फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को मिलेगा बढ़ावा

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1989 में संशोधन का प्रस्ताव भी तैयार किया है। इसका उद्देश्य ऐसे वाहनों को बढ़ावा देना है जो विभिन्न प्रकार के वैकल्पिक ईंधनों पर चल सकें।

प्रस्तावित बदलावों के तहत E85, E100, B100 बायोडीजल और हाइड्रोजन-CNG मिश्रण जैसे ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे भविष्य में फ्लेक्स-फ्यूल और पूर्ण बायोफ्यूल आधारित वाहनों का रास्ता और आसान होगा।


स्वच्छ ऊर्जा से आत्मनिर्भर भारत की ओर

विशेषज्ञों का मानना है कि एथनॉल मिश्रित पेट्रोल का विस्तार केवल ईंधन का विकल्प नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आर्थिक मजबूती से जुड़ा बड़ा कदम है। सरकार का दावा है कि इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी, प्रदूषण कम होगा और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

हालांकि माइलेज और इंजन प्रदर्शन को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन सरकार का कहना है कि वैज्ञानिक परीक्षणों और अब तक के अनुभवों में E20 पेट्रोल को लेकर कोई गंभीर तकनीकी समस्या सामने नहीं आई है।

E20 पेट्रोल को लेकर जारी बहस के बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का बयान स्पष्ट संदेश देता है कि सरकार वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने विरोधियों को तथ्यों के आधार पर चर्चा करने की चुनौती देते हुए कहा कि बिना प्रमाण के भ्रम फैलाना देशहित में नहीं है। सरकार का लक्ष्य न केवल आयातित तेल पर निर्भरता घटाना है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाते हुए भारत को स्वच्छ, आत्मनिर्भर और ऊर्जा-सुरक्षित राष्ट्र बनाना भी है।

- Advertisement -
Your Dream Technologies
VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

Call Now Button