नई दिल्ली :देश में विकास परियोजनाओं को गति देने और राज्यों की वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा आर्थिक फैसला लिया है। केंद्र ने 1 अगस्त 2026 को राज्यों को ₹1.09 लाख करोड़ की अतिरिक्त कर हिस्सेदारी (टैक्स डिवोल्यूशन) जारी कर दी। खास बात यह है कि यह राशि 10 अगस्त को मिलने वाली नियमित मासिक किस्त से अलग है। यानी राज्यों को तय समय से पहले अतिरिक्त धन उपलब्ध कराया गया है, जिससे वे बुनियादी ढांचा, सामाजिक कल्याण और पूंजीगत निवेश से जुड़ी परियोजनाओं को बिना वित्तीय बाधा के आगे बढ़ा सकेंगे।
वित्त मंत्रालय के इस कदम को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब कई राज्य विकास कार्यों, बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और सामाजिक योजनाओं पर तेजी से खर्च बढ़ाने की तैयारी में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय से पहले मिली यह राशि राज्यों की नकदी स्थिति (कैश फ्लो) को बेहतर बनाएगी और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
समय से पहले जारी हुई अतिरिक्त किस्त
आमतौर पर केंद्र सरकार राज्यों को टैक्स डिवोल्यूशन की राशि वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार निर्धारित समय पर जारी करती है। अगस्त महीने की नियमित किस्त 10 अगस्त को जारी होनी थी, लेकिन इस बार केंद्र सरकार ने उससे पहले ही अतिरिक्त ₹1.09 लाख करोड़ राज्यों के खातों में भेज दिए।
सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य राज्यों को विकास कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना है, ताकि वे सड़क, पुल, अस्पताल, स्कूल, सिंचाई, ग्रामीण विकास और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर तेजी से काम कर सकें।
उत्तर प्रदेश को मिला सबसे बड़ा हिस्सा
इस अतिरिक्त कर हिस्सेदारी में सबसे अधिक राशि उत्तर प्रदेश को मिली है। देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य के खाते में ₹19,208 करोड़ भेजे गए हैं। उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर, मेडिकल कॉलेज, स्मार्ट सिटी, सिंचाई और ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं। ऐसे में यह अतिरिक्त राशि इन योजनाओं को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
बिहार दूसरे स्थान पर
कर हिस्सेदारी के मामले में बिहार दूसरे स्थान पर रहा है। राज्य को ₹10,845 करोड़ मिले हैं। बिहार में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और जल संसाधन परियोजनाओं पर बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता है। ऐसे में यह राशि राज्य सरकार के लिए राहत लेकर आई है।
मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र को भी बड़ी रकम
केंद्र सरकार द्वारा जारी अतिरिक्त फंड में कई बड़े राज्यों को उल्लेखनीय राशि मिली है।
- मध्य प्रदेश – ₹8,010 करोड़
- पश्चिम बंगाल – ₹7,866 करोड़
- महाराष्ट्र – ₹7,022 करोड़
इन राज्यों में औद्योगिक विकास, शहरी परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए इस राशि का उपयोग किया जा सकेगा।
अन्य प्रमुख राज्यों को कितना मिला?
कई अन्य राज्यों को भी हजारों करोड़ रुपये की अतिरिक्त कर हिस्सेदारी जारी की गई है—
- राजस्थान – ₹6,460 करोड़
- ओडिशा – ₹4,819 करोड़
- आंध्र प्रदेश – ₹4,597 करोड़
- कर्नाटक – ₹4,504 करोड़
- तमिलनाडु – ₹4,466 करोड़
- गुजरात – ₹4,094 करोड़
- झारखंड – ₹3,660 करोड़
- छत्तीसगढ़ – ₹3,602 करोड़
- असम – ₹3,552 करोड़
- केरल – ₹2,597 करोड़
- तेलंगाना – ₹2,370 करोड़
- पंजाब – ₹2,176 करोड़
इन राज्यों में औद्योगिक निवेश, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं।
छोटे राज्यों को भी मिला पर्याप्त सहयोग
केंद्र सरकार ने छोटे और पर्वतीय राज्यों को भी अतिरिक्त वित्तीय सहायता दी है।
- हिमाचल प्रदेश – ₹996 करोड़
- त्रिपुरा – ₹699 करोड़
- मेघालय – ₹688 करोड़
- मणिपुर – ₹682 करोड़
- मिजोरम – ₹615 करोड़
- नागालैंड – ₹524 करोड़
- गोवा – ₹398 करोड़
- सिक्किम – ₹365 करोड़
सरकार का मानना है कि सीमावर्ती और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण राज्यों में विकास कार्यों के लिए यह राशि काफी उपयोगी साबित होगी।
विकास परियोजनाओं को मिलेगी नई गति
वित्त मंत्रालय के अनुसार अतिरिक्त धन मिलने से राज्यों को कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तेजी से निवेश करने का अवसर मिलेगा।
इनमें प्रमुख रूप से—
- राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्ग
- ग्रामीण सड़कें
- पुल और फ्लाईओवर
- अस्पताल और मेडिकल कॉलेज
- सरकारी स्कूल
- सिंचाई परियोजनाएं
- पेयजल योजनाएं
- शहरी विकास
- डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर
- सामाजिक कल्याण योजनाएं
राज्यों के पास समय पर धन उपलब्ध होने से परियोजनाओं में देरी कम होगी और निर्माण कार्यों की गति बढ़ेगी।
राज्यों पर घटेगा वित्तीय दबाव
विशेषज्ञों का कहना है कि कई राज्यों को महीने की शुरुआत में कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, सामाजिक योजनाओं और विकास परियोजनाओं के भुगतान के लिए नकदी प्रबंधन में कठिनाई आती है।
समय से पहले अतिरिक्त राशि मिलने से—
- कैश फ्लो बेहतर होगा।
- उधारी की आवश्यकता कम होगी।
- विकास योजनाओं का भुगतान समय पर होगा।
- ठेकेदारों और एजेंसियों को भुगतान में देरी नहीं होगी।
- पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) बढ़ सकेगा।
क्या होता है टैक्स डिवोल्यूशन?
भारत में केंद्र सरकार आयकर, कॉरपोरेट टैक्स, जीएसटी और अन्य केंद्रीय करों के माध्यम से राजस्व जुटाती है। संविधान के प्रावधानों और वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर इस कर संग्रह का एक निर्धारित हिस्सा राज्यों को दिया जाता है। इसी प्रक्रिया को टैक्स डिवोल्यूशन कहा जाता है।
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार केंद्र सरकार अपने विभाज्य कर पूल (Divisible Tax Pool) का 41 प्रतिशत हिस्सा राज्यों के साथ साझा करती है।
यह राशि राज्यों के विकास, प्रशासनिक खर्च और कल्याणकारी योजनाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
14 किस्तों में जारी होती है राशि
सामान्य तौर पर पूरे वित्त वर्ष में टैक्स डिवोल्यूशन की राशि 14 किस्तों में जारी की जाती है। लेकिन इस बार केंद्र सरकार ने नियमित किस्त के अतिरिक्त पहले ही बड़ी रकम जारी कर राज्यों को वित्तीय मजबूती देने का संदेश दिया है।
आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि इससे राज्यों को चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में विकास कार्यों को तेज करने का अवसर मिलेगा।
आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ेगा सकारात्मक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि जब राज्यों के पास पर्याप्त धन उपलब्ध होता है तो सरकारी खर्च बढ़ता है। सरकारी खर्च बढ़ने से निर्माण कार्यों में तेजी आती है, रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और स्थानीय बाजारों में आर्थिक गतिविधियां मजबूत होती हैं।
सड़क, भवन, अस्पताल और सिंचाई परियोजनाओं में तेजी आने से सीमेंट, स्टील, मशीनरी और परिवहन जैसे क्षेत्रों को भी लाभ मिलने की संभावना है। इससे निजी निवेश को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।
केंद्र का संदेश—विकास में नहीं आएगी धन की कमी
सरकार का कहना है कि अतिरिक्त कर हिस्सेदारी जारी करने का उद्देश्य केवल राज्यों को वित्तीय सहायता देना नहीं, बल्कि विकास कार्यों की गति बनाए रखना भी है। समय से पहले धन उपलब्ध होने से राज्यों को योजनाओं की फंडिंग में किसी प्रकार की बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
यह कदम ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर बुनियादी ढांचे के विस्तार, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।
पहले पन्ने की बड़ी बात
₹1.09 लाख करोड़ की अतिरिक्त कर हिस्सेदारी जारी कर केंद्र सरकार ने राज्यों को स्पष्ट संदेश दिया है कि विकास परियोजनाओं की रफ्तार धन की कमी से नहीं रुकेगी। उत्तर प्रदेश को सबसे बड़ा हिस्सा मिलने के साथ बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों को भी हजारों करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। समय से पहले मिली यह राशि सड़क, अस्पताल, शिक्षा, सिंचाई, ग्रामीण विकास और सामाजिक कल्याण योजनाओं को नई गति देने के साथ राज्यों की वित्तीय स्थिति को भी मजबूत करेगी।














