“जंतर-मंतर की घटना पर पहली बार विस्तार से बोले प्रधानमंत्री, सख्त कार्रवाई के बजाय संवाद और सुधार का दिया संदेश”
नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विवादित प्रदर्शन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा उनकी दिवंगत माता के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणियों को लेकर देशभर में छिड़ी बहस के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने एक भावुक और संदेशात्मक वीडियो जारी कर युवाओं को संबोधित किया। इंस्टाग्राम पर साझा किए गए इस वीडियो में उन्होंने कहा कि उन्हें और उनकी स्वर्गीय माता को अपमानजनक शब्द कहे गए, लेकिन उनका मानना है कि ऐसे युवाओं को दंडित करने से ज्यादा जरूरी उन्हें सही दिशा दिखाना है।
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब जंतर-मंतर पर आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान कुछ युवाओं द्वारा कथित रूप से अभद्र भाषा के प्रयोग का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर सामाजिक संगठनों तक तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। कई लोगों ने सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की, जबकि कुछ लोगों ने इसे युवाओं के आक्रोश और राजनीतिक असंतोष से जोड़कर देखा।
“देश और दुनिया ने देखा कि क्या हुआ”
अपने वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जंतर-मंतर पर जो कुछ हुआ, उसे पूरे देश और दुनिया ने देखा। उन्होंने कहा कि कुछ शरारती बच्चों ने ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जो किसी भी सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकती।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से गालियां दी गईं, लेकिन इससे भी अधिक दुखद बात यह रही कि उनकी दिवंगत माता के लिए भी अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति और विरोध का अधिकार है, लेकिन अभद्रता और व्यक्तिगत हमले लोकतांत्रिक संस्कृति को कमजोर करते हैं।
आक्रोश समझता हूं, लेकिन समाधान सजा नहीं
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में समाज के भीतर मौजूद आक्रोश को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि वे समझते हैं कि कई युवा विभिन्न मुद्दों को लेकर नाराज हो सकते हैं और उनकी भावनाएं प्रबल हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि समाज में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि हमारी बेटियां या युवा इस तरह की भाषा कैसे बोल सकते हैं। यह एक तरह का सांस्कृतिक झटका है, जो हर जिम्मेदार नागरिक को सोचने पर मजबूर करता है।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस स्थिति का समाधान केवल दंडात्मक कार्रवाई नहीं हो सकता। उनके अनुसार यदि युवाओं को केवल अदालतों के चक्कर कटवाए जाएं या उन्हें सामाजिक रूप से प्रताड़ित किया जाए तो इससे समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा।
“ये गुमराह बच्चे हैं, इन्हें राह दिखानी होगी”
प्रधानमंत्री के पूरे संदेश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह था, जिसमें उन्होंने प्रदर्शन में शामिल युवाओं को “गुमराह बच्चे” बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे युवाओं को सही रास्ता दिखाना समाज और नेतृत्व की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई युवा भटक गया है तो उसे और अधिक धकेलने के बजाय उसका हाथ पकड़कर आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने देशवासियों से भी अपील की कि वे बदले और प्रतिशोध की भावना से ऊपर उठकर इन युवाओं को सुधारने का अवसर दें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति हमेशा क्षमा, संवाद और सुधार की रही है। यही कारण है कि वे व्यक्तिगत रूप से उन युवाओं को माफ करना चाहते हैं जिन्होंने उनके और उनकी माता के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया।
#WATCH | Prime Minister Narendra Modi shared a video on his Instagram handle, in which he says, “Today I just feel like talking to you. The country and the world have witnessed what happened at Jantar Mantar. Some mischievous children used very crude and abusive language, words… pic.twitter.com/HhSPWaFmzz
— ANI (@ANI) July 31, 2026
भावनात्मक उदाहरण से समझाया क्षमा का संदेश
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने एक बेहद भावुक उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि कई बार भोजन करते समय हमारी जीभ दांतों के बीच आ जाती है और उससे खून भी निकल आता है, लेकिन हम दांत नहीं तोड़ते।
उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए क्योंकि दांत भी हमारे हैं और जीभ भी हमारी है। उसी प्रकार देश के युवा भी हमारे अपने हैं। यदि वे गलती करते हैं तो उन्हें खत्म करने या अपमानित करने के बजाय सुधारने का प्रयास होना चाहिए।
प्रधानमंत्री के इस उदाहरण को सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा मिली। समर्थकों ने इसे भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और करुणा का संदेश बताया, जबकि राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे एक रणनीतिक और संतुलित प्रतिक्रिया के रूप में देखा।
युवाओं को दिया नया संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन को केवल विवाद तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे युवाओं के भविष्य और राष्ट्र निर्माण से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति जीवन में गलतियां करता है और गलतियों से सीखना ही आगे बढ़ने का सबसे अच्छा तरीका है।
उन्होंने युवाओं से कहा कि वे अपने सपनों को लेकर आगे बढ़ें, नई चीजें सीखें और अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाएं। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में देश के सामने अपार अवसर मौजूद हैं।
प्रधानमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे नकारात्मकता से बाहर निकलकर राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में भागीदार बनें और अपनी प्रतिभा का उपयोग देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में करें।
जंतर-मंतर प्रदर्शन क्यों बना राष्ट्रीय बहस का विषय?
गौरतलब है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले कुछ समय से विभिन्न छात्र और सामाजिक संगठन शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान एक संगठन के विरोध प्रदर्शन का वीडियो सामने आया, जिसमें कथित रूप से प्रधानमंत्री और उनकी दिवंगत माता के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया।
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। बड़ी संख्या में लोगों ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया। वहीं कई संगठनों ने कहा कि विरोध का अधिकार संवैधानिक है, लेकिन उसकी अभिव्यक्ति मर्यादित और सम्मानजनक होनी चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राजनीतिक विरोध और सार्वजनिक संवाद की भाषा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी।
राजनीतिक संदेश से आगे बढ़कर सामाजिक अपील
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह वीडियो केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं बल्कि एक व्यापक सामाजिक संदेश भी है। उन्होंने विवादित बयानबाजी का जवाब आक्रामकता से देने के बजाय क्षमा, संवाद और सुधार की बात कही।
विशेषज्ञों के अनुसार यह संदेश उस समय आया है जब सोशल मीडिया और राजनीतिक विमर्श में भाषा का स्तर लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसे माहौल में प्रधानमंत्री द्वारा युवाओं को अवसर देने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की अपील को एक महत्वपूर्ण सामाजिक हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है।
देश को आगे बढ़ाने का आह्वान
अपने संदेश के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं से कहा कि वे अतीत की गलतियों में उलझने के बजाय भविष्य की ओर देखें। उन्होंने कहा कि देश आगे बढ़ रहा है और हर युवा का भविष्य उज्ज्वल हो, यही उनकी कामना है।
उन्होंने कहा, “मैं आपके लिए जीता हूं, आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए खपता हूं। आइए, हम सब मिलकर देश को आगे बढ़ाएं।”
प्रधानमंत्री के इस संदेश ने जंतर-मंतर विवाद को एक नई दिशा दे दी है। जहां एक ओर घटना को लेकर आक्रोश और बहस जारी है, वहीं प्रधानमंत्री का यह रुख यह संकेत देता है कि वे विवाद को दंड की बजाय संवाद और सुधार के माध्यम से समाप्त करने के पक्षधर हैं। भारतीय लोकतंत्र में असहमति और विरोध की जगह बनी रहे, लेकिन उसकी भाषा और मर्यादा भी बनी रहे—प्रधानमंत्री के संदेश का मूल सार यही माना जा रहा है।














