Monday, September 14, 2026
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गोंडा में विनोद साहनी हत्याकांड पर गरमाई सियासत, निषाद नेताओं में छिड़ी जुबानी जंग

“संजय निषाद ने मुकेश सहनी को बताया ‘मौसमी नेता’, बोले- चुनावी मौसम में बाहर से आने वालों से समाज रहे सावधान | VIP कार्यकर्ताओं ने लखनऊ में निकाला कैंडल मार्च, हत्यारोपियों को कड़ी सजा और पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद की मांग”

लखनऊ/गोंडा: गोंडा में निषाद समाज के कारोबारी विनोद कुमार साहनी की हत्या को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। हत्या के विरोध और न्याय की मांग के बीच अब निषाद समाज के नेताओं के बीच भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बिहार के विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के अध्यक्ष मुकेश सहनी द्वारा मामले में विरोध जताए जाने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार में मत्स्य मंत्री और निषाद पार्टी अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने उन पर तीखा हमला बोला है।

संजय निषाद ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मछुआरा समाज से कथित ‘मौसमी नेताओं’ से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश में मछुआरा समुदाय राजनीतिक ताकत के रूप में खड़ा हुआ है। ऐसे में चुनावी मौसम शुरू होने के साथ ही बाहर से आने वाले नेताओं से समाज को सतर्क रहने की जरूरत है।

मंत्री के इस बयान के बाद विनोद साहनी हत्याकांड अब केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गया है, बल्कि निषाद समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आगामी चुनावी राजनीति को लेकर भी बहस तेज हो गई है।

‘मौसमी नेता तय नहीं कर पाए कि क्या करना है’

संजय निषाद ने अपने एक्स पोस्ट में मुकेश सहनी का नाम लेकर उन पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ‘मौसमी नेता’ चुनाव के समय मछुआरा समाज के बीच सक्रिय हो जाते हैं और समाज के वोटों को अपने राजनीतिक हित के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने पोस्ट में मुकेश सहनी पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे नेता अब तक यह तय नहीं कर पाए हैं कि उन्हें मुंबई में व्यापार करना है, यहां-वहां घूमकर दूसरों की ‘दरी बिछानी’ है या मछुआरा समाज के वोटों की राजनीति करनी है।

संजय निषाद ने आरोप लगाया कि मुकेश सहनी उत्तर प्रदेश के निषाद समाज को गुमराह करने की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने बिहार में मछुआरा समुदाय की राजनीतिक स्थिति को लेकर भी सहनी पर सवाल खड़े किए।

मंत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि जो व्यक्ति अपने राज्य में एक विधानसभा चुनाव तक जीतने की स्थिति में नहीं रहा, वह उत्तर प्रदेश के निषाद समाज को राजनीतिक रूप से गुमराह करने के लिए यहां आने की कोशिश कर रहा है।

‘मछुआरा समुदाय पैसों पर बिकने वाली कौम नहीं’

संजय निषाद ने अपने पोस्ट में कहा कि मछुआरा समुदाय पैसों पर बिकने वाला समाज नहीं है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मछुआरों को राजनीति सिखाने से पहले यह समझना जरूरी है कि राजनीति उनके खून में है।

उन्होंने मछुआरा समाज के ऐतिहासिक संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि समुदाय ने देश और समाज के लिए संघर्ष किया है। मंत्री ने निषाद समाज की विभिन्न जातीय पहचान—केवट, मल्लाह, बिंद और कश्यप—के बीच भेद पैदा किए जाने का भी आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि समाज को एकजुट होने की जरूरत है और राजनीतिक दलों द्वारा समाज के भीतर विभाजन पैदा करने की कोशिशों से बचना चाहिए। आरक्षण के मुद्दे को भी उन्होंने अपने बयान में प्रमुखता से उठाया और कहा कि समाज को एकजुट नहीं होने देने का नुकसान उसे राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर उठाना पड़ा है।

संजय निषाद ने यह भी आरोप लगाया कि दूसरे दलों से पैसा लेकर समाज में राजनीतिक गतिविधियां चलाने वालों को समाज में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, ये सभी आरोप मंत्री के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।

मुकेश सहनी के निर्देश पर लखनऊ में कैंडल मार्च

दूसरी ओर, विनोद साहनी हत्याकांड को लेकर VIP भी लगातार सरकार पर दबाव बना रही है। मुकेश सहनी के निर्देश पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने लखनऊ में कैंडल मार्च निकाला। गांधी प्रतिमा से सरदार पटेल प्रतिमा तक निकाले गए इस मार्च में कार्यकर्ताओं ने विनोद साहनी के हत्यारोपियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की।

कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दिए जाने की भी मांग उठाई। मुकेश सहनी विनोद साहनी को अपनी पार्टी का कार्यकर्ता बता रहे हैं और मामले में आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर चुके हैं। उन्होंने हत्यारोपियों के एनकाउंटर की मांग भी की है।

इस बीच, संजय निषाद विनोद साहनी को अपनी पार्टी का जिला प्रचारक बता रहे हैं। विनोद की मौत के बाद मंत्री पोस्टमार्टम हाउस भी पहुंचे थे और वहां धरने पर बैठे थे। 11 सितंबर को विनोद का शव गोंडा पहुंचने के बाद भी उन्होंने जिला मुख्यालय स्थित सर्किट हाउस में धरना दिया और न्याय की मांग की।

संजय निषाद ने कहा था कि सरकार मामले को गंभीरता से ले रही है और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

दुकान बंद कर घर लौट रहे थे विनोद, रास्ते में घेरा

गोंडा के परसपुर थाना क्षेत्र में बर्तन कारोबारी विनोद कुमार साहनी की 9 सितंबर की रात हत्या कर दी गई थी। वह शाहपुर धनोवा इलाके में बर्तन की दुकान चलाते थे।

बताया गया कि रात करीब साढ़े दस बजे विनोद दुकान बंद करके घर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में कार सवार कुछ लोगों ने उन्हें रोक लिया। आरोप है कि इसके बाद उन पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला किया गया।

हमले में विनोद गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने के कारण चिकित्सकों ने उन्हें लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) रेफर कर दिया।

KGMU में इलाज के दौरान मौत, चार आरोपी गिरफ्तार

KGMU में उपचार के दौरान विनोद कुमार साहनी की मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और मुख्य आरोपी शुभम सिंह समेत कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

पुलिस की कार्रवाई के बाद अब परिवार और समर्थकों की मांग है कि हत्या में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए।

वहीं, मामले को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और निषाद समाज के नेताओं की सक्रियता ने इसे चुनावी राजनीति से भी जोड़ दिया है। एक तरफ मुकेश सहनी इसे अपने पार्टी कार्यकर्ता की हत्या बताते हुए सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर संजय निषाद इसे उत्तर प्रदेश के मछुआरा समाज की राजनीतिक एकजुटता और बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप के संदर्भ में उठा रहे हैं।

हत्या से ज्यादा अब ‘निषाद वोट’ की सियासत चर्चा में

विनोद साहनी की हत्या ने कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल तो खड़े किए ही हैं, साथ ही निषाद समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। उत्तर प्रदेश में मछुआरा और निषाद समाज का बड़ा राजनीतिक प्रभाव माना जाता है। ऐसे में आगामी चुनावी माहौल के बीच इस हत्या को लेकर दो प्रमुख निषाद नेताओं का आमने-सामने आना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संजय निषाद जहां समाज को एकजुट रहने और चुनावी मौसम में सक्रिय होने वाले नेताओं से सावधान रहने की अपील कर रहे हैं, वहीं मुकेश सहनी अपनी पार्टी के कार्यकर्ता की हत्या के मुद्दे को लेकर सरकार पर कार्रवाई का दबाव बना रहे हैं।

ऐसे में गोंडा का यह हत्याकांड अब सिर्फ एक कारोबारी की हत्या का मामला नहीं रह गया है। न्याय की मांग के साथ-साथ निषाद समाज की राजनीतिक दिशा, नेतृत्व और आगामी चुनाव में उसके वोटों की भूमिका को लेकर भी सियासी तापमान बढ़ता दिखाई दे रहा है।

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