“एक्सप्रेसवे किनारे बसे 35-40 गांवों और सेक्टरों को अब तक नहीं मिली सिटी बस की सुविधा, ग्राम विकास संगठन ने नोएडा प्राधिकरण से जताई नाराजगी”
नोएडा: नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के किनारे बसे गांवों और सेक्टरों में रहने वाले हजारों लोगों के लिए सार्वजनिक परिवहन की समस्या अब एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। शहर में ई-सिटी बस सेवा शुरू होने के बावजूद एक्सप्रेसवे के आसपास बसे करीब 35 से 40 गांवों और कई महत्वपूर्ण सेक्टरों को इस सुविधा से बाहर रखे जाने का आरोप लगाया गया है। ग्राम विकास संगठन नोएडा ने इसे ग्रामीण और सेक्टरवासियों के साथ भेदभाव बताते हुए नोएडा प्राधिकरण से तत्काल बस सेवा शुरू करने की मांग की है।
ग्राम विकास संगठन नोएडा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान ने कहा कि जब नोएडा प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में आने वाले अन्य गांवों और सेक्टरों को ई-सिटी बस सेवा से जोड़ा जा रहा है, तो एक्सप्रेसवे के किनारे बसे इन गांवों और सेक्टरों को सुविधा से वंचित रखना समझ से परे है। उनका कहना है कि इन इलाकों के लोग पिछले करीब दस वर्षों से सार्वजनिक परिवहन की बेहतर व्यवस्था की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
17 जून को प्राधिकरण अधिकारियों को सौंपा गया था ज्ञापन
अशोक चौहान के अनुसार, 17 जून 2026 को ग्राम विकास संगठन नोएडा के संयोजक डीपी चौहान के नेतृत्व में संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर-6 स्थित कार्यालय पहुंचकर ओएसडी अरविंद कुमार सिंह और क्रांति शेखर को संयुक्त रूप से ज्ञापन सौंपा था।
ज्ञापन में एक्सप्रेसवे के आसपास बसे गांवों और सेक्टरों को ई-सिटी बस सेवा से जोड़ने की मांग प्रमुखता से उठाई गई थी। संगठन का कहना है कि अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल की समस्या को गंभीरता से सुना और तत्काल कार्रवाई करते हुए महाप्रबंधक सिविल एसपी सिंह को पत्र भेजकर संबंधित गांवों और सेक्टरों को ई-सिटी बस सेवा से जोड़ने के संबंध में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
संगठन के मुताबिक, उस समय अधिकारियों की ओर से जल्द बस सेवा शुरू किए जाने का आश्वासन भी दिया गया था। लेकिन कई सप्ताह बीतने के बाद भी जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
चार रूट तैयार, लेकिन गांवों और सेक्टरों को नहीं मिली जगह
ग्राम विकास संगठन का आरोप है कि नोएडा में ई-सिटी बस सेवा के लिए तैयार किए गए चार रूटों में एक्सप्रेसवे के किनारे बसे इन गांवों और सेक्टरों को पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया है। इससे उन क्षेत्रों के निवासियों को शहर के अन्य हिस्सों तक पहुंचने के लिए निजी वाहनों, ऑटो और अन्य महंगे साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
संगठन ने जिन गांवों को बस सेवा से जोड़ने की मांग की है, उनमें रायपुर, बख्तावरपुर, असगरपुर, गढ़ी शाहपुर, शाहपुर गोवर्धनपुर, सुलतानपुर, नंगली शाखपुर, नंगली नंगला, नंगली वाजिदपुर, छपरौली बांगर, दोस्तपुर मंगरौली, याकूबपुर, दल्लूपुरा, मोहियापुर, गुलावली, झट्टा, बादौली, कामबख्शपुर, कोंडली और गढ़ी समस्तीपुर सहित अन्य गांव शामिल बताए गए हैं।
इसके अलावा सेक्टर-126 से 135 तथा सेक्टर-151 से 168 के बीच के क्षेत्रों को भी ई-सिटी बस नेटवर्क से जोड़ने की मांग की गई है।
“जिनकी जमीन से नोएडा बना, वही परिवहन सुविधा से दूर क्यों?”
अशोक चौहान ने सवाल उठाते हुए कहा कि नोएडा के विकास के लिए ग्रामीण क्षेत्रों की जमीन ली गई। शहर का विस्तार हुआ, बड़े-बड़े सेक्टर और एक्सप्रेसवे बने, औद्योगिक एवं संस्थागत गतिविधियां बढ़ीं, लेकिन जिन गांवों की जमीन और आसपास के क्षेत्र इस विकास का हिस्सा बने, वहां रहने वाले लोगों को आज भी मूलभूत सार्वजनिक परिवहन सुविधा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के मन में यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठ रहा है कि यदि नोएडा प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में आने वाले अन्य इलाकों में ई-सिटी बस सेवा पहुंचाई जा सकती है तो एक्सप्रेसवे के किनारे बसे गांवों और सेक्टरों को इससे क्यों दूर रखा गया है।
उनका आरोप है कि यह व्यवस्था ग्रामीणों और इन सेक्टरों में रहने वाले लोगों के साथ “सौतेला व्यवहार” जैसी स्थिति पैदा कर रही है।
महिलाओं के लिए मुख्यमंत्री की घोषणा से जुड़ा बड़ा सवाल
अब यह मुद्दा केवल सार्वजनिक परिवहन तक सीमित नहीं रह गया है। ग्राम विकास संगठन ने इसे महिलाओं को मिलने वाली सरकारी सुविधा से भी जोड़ते हुए सवाल उठाया है।
अशोक चौहान ने बताया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं तथा उनके साथ एक साथी के लिए और 60 वर्ष की महिलाओं के लिए उत्तर प्रदेश बस सेवा एवं ई-सिटी बस सेवा में मुफ्त यात्रा की घोषणा की गई है।
ऐसे में संगठन का कहना है कि जिन गांवों और सेक्टरों में ई-सिटी बस सेवा ही उपलब्ध नहीं है, वहां रहने वाली महिलाओं को इस सरकारी सुविधा का वास्तविक लाभ कैसे मिलेगा?
यही सवाल अब क्षेत्र की महिलाओं और ग्रामीण परिवारों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। संगठन का कहना है कि सरकार की घोषणा का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित, सस्ती और सुगम सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि किसी क्षेत्र में बस सेवा का नेटवर्क ही नहीं है तो वहां रहने वाली महिलाओं के लिए घोषणा का लाभ व्यवहारिक रूप से सीमित हो जाता है।
निजी वाहनों पर निर्भरता बढ़ी, खर्च भी बढ़ा
एक्सप्रेसवे के आसपास बसे गांवों और सेक्टरों में सार्वजनिक परिवहन की कमी का सीधा असर रोजाना आने-जाने वाले लोगों पर पड़ रहा है। नौकरी, व्यापार, शिक्षा, अस्पताल और सरकारी काम के लिए लोगों को नोएडा के दूसरे हिस्सों में जाना पड़ता है।
सिटी बस की नियमित सुविधा नहीं होने के कारण कई लोग ऑटो, कैब या निजी वाहनों का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। इससे रोजाना यात्रा का खर्च बढ़ता है। महिलाओं, बुजुर्गों और विद्यार्थियों के लिए यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
विशेषकर ऐसे परिवार जिनके पास निजी वाहन नहीं हैं, उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने के लिए कई बार वाहन बदलने पड़ते हैं। इससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त खपत होती है।
दस साल से उठ रही मांग, फिर भी इंतजार खत्म नहीं
ग्राम विकास संगठन का कहना है कि गांवों और संबंधित सेक्टरों के निवासी पिछले करीब एक दशक से ग्राम चौपाल, “नोएडा आपके द्वार” जैसे कार्यक्रमों और अधिकारियों के समक्ष सार्वजनिक परिवहन की मांग उठाते रहे हैं।
संगठन के अनुसार, लगातार ज्ञापन और मौखिक अनुरोध के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। अब जबकि नोएडा शहर में ई-सिटी बस सेवा शुरू की जा चुकी है, लोगों को उम्मीद थी कि एक्सप्रेसवे के आसपास के गांवों और सेक्टरों को भी चरणबद्ध तरीके से बस नेटवर्क में शामिल किया जाएगा।
लेकिन संगठन का आरोप है कि अभी तक यह उम्मीद पूरी नहीं हुई है।
अधिकारियों से फिर कार्रवाई की मांग
अशोक चौहान ने कहा कि 17 जून को दिए गए ज्ञापन के बाद अधिकारियों ने संबंधित विभाग को पत्र भेजा था और शीघ्र बस सेवा शुरू करने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद अब तक बसें नहीं चलने से क्षेत्र के लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
उन्होंने नोएडा प्राधिकरण से मांग की है कि मामले को केवल पत्राचार तक सीमित न रखते हुए समयबद्ध तरीके से ई-सिटी बस रूट का विस्तार किया जाए और एक्सप्रेसवे के किनारे बसे सभी संबंधित गांवों एवं सेक्टरों को बस नेटवर्क से जोड़ा जाए।
“घोषणा का लाभ तभी, जब बस गांव तक पहुंचे”
ग्राम विकास संगठन का कहना है कि सरकार की किसी भी जनकल्याणकारी योजना की सफलता उसके जमीनी क्रियान्वयन से तय होती है। यदि महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की घोषणा की गई है, तो इसका लाभ शहर के हर उस क्षेत्र तक पहुंचना चाहिए जहां पात्र महिलाएं रहती हैं।
संगठन के अनुसार, ई-सिटी बस सेवा का विस्तार केवल परिवहन व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह महिलाओं की सुविधा, सुरक्षा, रोजगार, शिक्षा और सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच से भी जुड़ा हुआ है।
अशोक चौहान ने कहा कि गांवों और सेक्टरों के लोगों को शहर के विकास का हिस्सा माना जाता है तो परिवहन सुविधाओं में भी उन्हें समान अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने प्राधिकरण से मांग की कि एक्सप्रेसवे के किनारे बसे सभी गांवों और संबंधित सेक्टरों का सर्वे कराकर उनकी आबादी और यातायात आवश्यकता के अनुसार नए ई-सिटी बस रूट निर्धारित किए जाएं।
ग्रामीणों की एक ही मांग—समान सुविधा, समान अधिकार
ग्राम विकास संगठन नोएडा ने स्पष्ट किया है कि उसकी मांग किसी एक गांव तक सीमित नहीं है। संगठन चाहता है कि एक्सप्रेसवे के आसपास बसे सभी गांवों और सेक्टरों को एक समग्र ई-सिटी बस नेटवर्क से जोड़ा जाए, ताकि लोग नोएडा के प्रमुख बाजारों, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, औद्योगिक क्षेत्रों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों तक आसानी से पहुंच सकें।
अब निगाहें नोएडा प्राधिकरण की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। 17 जून को ज्ञापन, अधिकारियों द्वारा विभागीय पत्राचार और बस सेवा शुरू करने के आश्वासन के बाद भी यदि सेवा शुरू नहीं होती है, तो क्षेत्र के लोगों का आक्रोश बढ़ना स्वाभाविक है।
सवाल सीधा है—जब नोएडा में ई-सिटी बस सेवा शुरू हो चुकी है, तो एक्सप्रेसवे किनारे बसे गांवों और सेक्टरों के लोगों को अभी भी इंतजार क्यों करना पड़ रहा है? और यदि महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की घोषणा की गई है, तो जिन क्षेत्रों में बस ही नहीं पहुंचती, वहां इस घोषणा का लाभ आखिर कैसे पहुंचेगा?
ग्राम विकास संगठन ने नोएडा प्राधिकरण से जल्द से जल्द इन क्षेत्रों को ई-सिटी बस सेवा से जोड़कर हजारों निवासियों को राहत देने की मांग की है।














