“तीन दिनों तक गूंजता रहा “गणपति बप्पा मोरया”, महिलाओं की भागीदारी, बच्चों की रचनात्मकता और सामूहिक एकता ने बनाया गणेशोत्सव को यादगार”
नोएडा, 16 सितंबर 2026। नोएडा के सेक्टर-78 स्थित Antariksh Golfview-2 (AGV-2) में इस वर्ष गणेश चतुर्थी उत्सव केवल भगवान गणेश की पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आस्था, भक्ति, अपनत्व, सहयोग और सामुदायिक एकता के दस वर्षों की खूबसूरत यात्रा का उत्सव बन गया। 14 से 16 सितंबर 2026 तक आयोजित तीन दिवसीय गणेशोत्सव में पूरे AGV-2 परिवार ने जिस उत्साह, श्रद्धा और सामूहिक सहभागिता के साथ भाग लिया, उसने यह साबित कर दिया कि जब एक समाज एक परिवार की तरह जुड़ता है तो कोई भी आयोजन केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि यादगार इतिहास बन जाता है।
इस वर्ष का उत्सव इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि AGV-2 परिवार और बप्पा के बीच भावनात्मक जुड़ाव की दस वर्ष लंबी परंपरा ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा किया। हर वर्ष की तरह इस बार भी बप्पा का आगमन पूरे परिसर में खुशियां लेकर आया, लेकिन दसवीं वर्षगांठ के इस अवसर ने उत्सव में भावनाओं और उल्लास की एक अलग ही चमक भर दी।
बप्पा के आगमन के साथ भक्तिमय हुआ पूरा परिसर
पारंपरिक विधि-विधान के साथ भगवान गणेश की स्थापना और पूजन किया गया। मंत्रोच्चार, गणेश वंदना, अभिषेक, पुष्प एवं दूर्वा अर्पण, नैवेद्य और आरती के बीच श्रद्धालुओं ने बप्पा से समाज और परिवारों के सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना की।
आरती के समय जैसे ही सैकड़ों कंठों से एक साथ “गणपति बप्पा मोरया!” का जयघोष गूंजा, पूरा AGV-2 परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर चेहरे पर आस्था और खुशी दिखाई दे रही थी।
यह दृश्य केवल धार्मिक श्रद्धा का नहीं था, बल्कि एक ऐसे समाज का था जहां अलग-अलग परिवार एक ही भावना के साथ खड़े थे—बप्पा के स्वागत और एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटने की भावना।
महिलाओं ने संभाली उत्सव की खूबसूरत कमान
इस भव्य आयोजन को सफल, सुंदर और जीवंत बनाने में AGV-2 की महिलाओं की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। पंडाल की परिकल्पना और सजावट से लेकर विभिन्न कार्यक्रमों की तैयारियों तक महिलाओं ने पूरे समर्पण और उत्साह के साथ जिम्मेदारियां निभाईं।
कहीं सजावट को अंतिम रूप दिया जा रहा था, कहीं बच्चों की गतिविधियों की तैयारी चल रही थी, तो कहीं प्रसाद और भंडारे की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित किया जा रहा था। कई महिलाएं मंच के सामने नजर आईं तो कई ने पर्दे के पीछे रहकर व्यवस्थाओं को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
किसी ने अपना समय दिया, किसी ने अपनी रचनात्मक सोच, किसी ने अपनी मेहनत और किसी ने आयोजन की जिम्मेदारियों को पूरी लगन से संभाला। इन सभी प्रयासों के पीछे एक ही भावना थी—
“बप्पा के लिए और अपने AGV-2 परिवार के लिए इस उत्सव को सबसे विशेष बनाना है।”
महिलाओं की इस सामूहिक भागीदारी ने यह भी दिखाया कि किसी भी सामुदायिक आयोजन की असली ताकत केवल व्यवस्थाओं में नहीं, बल्कि उसमें शामिल लोगों के समर्पण और दिल से किए गए प्रयासों में होती है।
बच्चों ने रंगों में उकेरा अपने ‘फ्रेंड गणेशा’ को
गणेशोत्सव के दौरान आयोजित ड्रॉइंग प्रतियोगिता बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। छोटे-छोटे हाथों ने रंगों और कल्पनाओं के माध्यम से भगवान गणेश के प्रति अपनी भावनाएं कागज पर उतार दीं।
“My Friend Ganesha”, “Bappa with Modak”, “Ganesha with His Mushak” और “Ganpati Visarjan” जैसे विषयों पर बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता का शानदार प्रदर्शन किया।
किसी की पेंटिंग में मुस्कुराते हुए बप्पा थे, तो किसी ने मोदक के साथ गणेश जी को चित्रित किया। कहीं मूषक के साथ बप्पा नजर आए, तो कहीं विसर्जन यात्रा के रंगों और उत्साह को बच्चों ने अपनी चित्रकला में जीवंत कर दिया।
इन मासूम रचनाओं में केवल रंग नहीं थे, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और आने वाली पीढ़ी का अपनी जड़ों से जुड़ाव भी दिखाई दे रहा था।
भजन संध्या ने बांधा समां, रात्रि भोज में दिखी परिवार जैसी आत्मीयता
तीन दिवसीय आयोजन में भजन संध्या ने पूरे वातावरण को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। भजनों और गणेश वंदना की मधुर प्रस्तुतियों के बीच श्रद्धालु देर तक भक्तिमय माहौल में डूबे रहे।
वहीं आयोजित Grand Ratri Bhoj ने उत्सव की सामूहिकता को और मजबूत किया। एक साथ बैठकर भोजन करना, बातचीत करना, बच्चों की हंसी और परिवारों का आपसी मिलन—इन सबने आयोजन को केवल धार्मिक उत्सव नहीं रहने दिया, बल्कि उसे एक बड़े पारिवारिक मिलन में बदल दिया।
यहां कोई केवल पड़ोसी नहीं था। हर कोई एक-दूसरे की खुशियों का हिस्सा था।
यही तो त्योहारों की असली खूबसूरती है—जहां रिश्तों को औपचारिक परिचय की जरूरत नहीं पड़ती और अपनापन खुद-ब-खुद महसूस होने लगता है।
ढोल, फूल और जयघोष के बीच बप्पा को भावुक विदाई
तीन दिनों तक चली पूजा, भक्ति, संगीत, हंसी और खुशियों के बाद आखिरकार वह पल भी आया, जिसका इंतजार कम और भावुकता ज्यादा होती है—बप्पा के विसर्जन का समय।
विसर्जन यात्रा में बच्चों से लेकर युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों तक पूरा AGV-2 परिवार शामिल हुआ। ढोल की गूंज, फूलों की वर्षा और लगातार गूंजते “गणपति बप्पा मोरया!” के जयघोष ने वातावरण को ऊर्जा और भावनाओं से भर दिया।
हर कोई बप्पा को विदा करने साथ चल रहा था, लेकिन मन के किसी कोने में एक ही सवाल था—
“बप्पा, अभी तो आए थे… इतनी जल्दी कैसे चले गए?”
कई आंखों में भावुकता थी, लेकिन उसी के साथ अगले वर्ष फिर बप्पा के स्वागत की उम्मीद भी थी।
क्योंकि श्रद्धा यही कहती है कि बप्पा कहीं जाते नहीं हैं।
वे अपने साथ हमारी भक्ति लेकर नहीं जाते, बल्कि हमारे दिलों में आशीर्वाद, यादें, सकारात्मक ऊर्जा और फिर से मिलने की उम्मीद छोड़ जाते हैं।
दस साल की परंपरा ने दिया एकता का बड़ा संदेश
AGV-2 में गणेशोत्सव के दस वर्ष केवल समय का आंकड़ा नहीं हैं। यह दस वर्षों की वह यात्रा है, जिसमें लोगों ने साथ मिलकर पूजा की, जिम्मेदारियां संभालीं, खुशियां बांटीं और एक-दूसरे के साथ खड़े होने का भाव मजबूत किया।
इस आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि त्योहार केवल पूजा, सजावट और कार्यक्रमों का नाम नहीं हैं। त्योहार वह अवसर हैं जब पड़ोसी परिवार बनते हैं, बच्चे संस्कारों से जुड़ते हैं, बुजुर्गों का अनुभव सम्मान पाता है और पूरा समाज एक-दूसरे के और करीब आता है।
प्रतिमा एक थी, लेकिन भावनाएं हजारों थीं।
जयघोष एक था, लेकिन उसमें हर दिल की आवाज थी।
इन तीन दिनों में AGV-2 केवल एक रिहायशी सोसाइटी नहीं रहा। यह वास्तव में बप्पा का अपना परिवार बन गया।
समिति सदस्यों के सहयोग से बना आयोजन सफल
आयोजन को सफल बनाने में समिति सदस्यों और सभी सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। Ravi, Neha, Veenu, Prakash, Amit और Vineet सहित आयोजन से जुड़े सभी लोगों ने अपने-अपने स्तर पर जिम्मेदारियां निभाते हुए इस दसवें वर्ष के गणेशोत्सव को यादगार बनाने में योगदान दिया।
सामूहिक प्रयास, महिलाओं का समर्पण, बच्चों का उत्साह और पूरे AGV-2 परिवार की भागीदारी ने इस आयोजन को एक ऐसा रूप दिया, जिसकी यादें लंबे समय तक लोगों के दिलों में बनी रहेंगी।
अब AGV-2 परिवार की यही कामना है कि बप्पा का आशीर्वाद सभी परिवारों पर बना रहे और आस्था, प्रेम, सहयोग तथा भाईचारे की यह दस वर्ष पुरानी परंपरा आने वाले वर्षों में और भी मजबूत होती जाए।
AGV-2 का संदेश—बप्पा के आशीर्वाद से जुड़ा रहे हर दिल
गणेशोत्सव 2026 ने जाते-जाते AGV-2 परिवार को एक खूबसूरत संदेश दिया—एकता ही किसी समाज की सबसे बड़ी शक्ति है और अपनापन ही उसकी सबसे सुंदर पहचान।
बप्पा की विदाई भले ही हो गई हो, लेकिन उनके आगमन की खुशियां, आरती की गूंज, बच्चों की मुस्कान, भजनों की मधुरता और एक-दूसरे के साथ बिताए गए पल हर परिवार की स्मृतियों में लंबे समय तक जीवित रहेंगे।
दस साल की यह यात्रा आगे भी यूं ही चलती रहे…
हर वर्ष बप्पा आएं, हर दिल को जोड़ें और AGV-2 परिवार की एकता को और मजबूत बनाएं।
॥ श्री गणेशाय नमः ॥
🌺 गणपति बप्पा मोरया! 🙏🌺
❤️ AGV-2 परिवार की एकता और अपनत्व सदैव बना रहे। ❤️














