“मीटर के लिए पूरी रात सड़कों पर मातृशक्ति, व्यवस्था पर उठे सवाल”
नोएडा। सेक्टर-63 के छिजारसी–चोटपुर कॉलोनी क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को लेकर वर्षों से चली आ रही परेशानी अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। लंबे समय तक अनधिकृत बिजली कनेक्शनों और कथित अवैध वसूली की शिकायतों से जूझते रहे स्थानीय परिवारों के सामने अब वैध बिजली मीटर हासिल करने की प्रक्रिया में नई चुनौती खड़ी हो गई है। हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि मीटर के लिए टोकन लेने के लिए महिलाओं, बुजुर्गों और मजदूर परिवारों को पूरी रात सड़क पर कतार में खड़ा होना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस वैध बिजली व्यवस्था की उम्मीद में उन्होंने वर्षों तक संघर्ष किया, उसके लिए अब उन्हें अपनी रोजमर्रा की मजदूरी और काम छोड़कर घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। कई परिवारों की शिकायत है कि सीमित संख्या में टोकन और कनेक्शन दिए जाने के कारण प्रक्रिया लंबी होती जा रही है।
हालिया रिपोर्टों में भी छिजारसी और चोटपुर के डूब क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अनधिकृत बिजली कनेक्शनों का मामला सामने आने और उसके बाद विभागीय कार्रवाई का उल्लेख है। रिपोर्टों के मुताबिक अगस्त में हजारों कनेक्शन काटे गए थे और बाद में वैध/अस्थायी मीटर आधारित कनेक्शन की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ी।
14–15 साल की परेशानी के बाद अब वैध मीटर की उम्मीद
छिजारसी और चोटपुर के लोगों का कहना है कि क्षेत्र में बिजली को लेकर उनकी परेशानी कोई नई बात नहीं है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, पिछले 14–15 वर्षों से बड़ी संख्या में परिवार अनियमित बिजली आपूर्ति, अनधिकृत कनेक्शन और कथित वसूली की समस्या का सामना करते रहे हैं।
मीडिया रिपोर्टों में भी छिजारसी के डूब क्षेत्र में हजारों अनधिकृत कनेक्शनों और निजी नेटवर्क के जरिए बिजली आपूर्ति के आरोपों का उल्लेख किया गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक जांच में 13 हजार से अधिक अनधिकृत कनेक्शन पाए जाने की बात सामने आई थी।
अब सरकार और बिजली विभाग की ओर से वैध मीटर की प्रक्रिया शुरू होने से लोगों को उम्मीद जगी है कि वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा। लेकिन टोकन वितरण की मौजूदा व्यवस्था ने इस उम्मीद के साथ परेशानी भी जोड़ दी है।
रातभर सड़क पर महिलाएं, बुजुर्ग और मजदूर
स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी शिकायत टोकन लेने की व्यवस्था को लेकर है। लोगों के मुताबिक सीमित संख्या में टोकन दिए जाने के कारण बड़ी संख्या में परिवारों को अपनी बारी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
सबसे ज्यादा परेशानी उन महिलाओं की सामने आ रही है, जिन्हें रात के समय भी कतार में खड़ा रहना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई माताएं-बहनें परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ मीटर के लिए भी रातभर लाइन में खड़े होने को मजबूर हैं।
बुजुर्गों की स्थिति भी अलग नहीं है। लंबी कतार, रात का समय और सीमित टोकन व्यवस्था उनके लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा कर रही है। वहीं दिहाड़ी मजदूरों की समस्या और गंभीर है। उनका कहना है कि यदि उन्हें एक दिन काम छोड़कर टोकन लेने जाना पड़े और अगले दिन फिर कनेक्शन के लिए प्रक्रिया पूरी करनी पड़े, तो परिवार की आमदनी प्रभावित होती है।
सवाल यही है कि जिस व्यवस्था का उद्देश्य आम परिवारों को राहत देना है, वह प्रक्रिया खुद लोगों के लिए इतनी कठिन क्यों हो?
पहले कथित वसूली का आरोप, अब टोकन के लिए लंबी कतार
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि अतीत में बिजली के नाम पर कई परिवारों से हर महीने कथित तौर पर ₹500, ₹1,000 और कुछ मामलों में ₹2,000 तक की रकम ली जाती रही। इन आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक जांच आवश्यक है।
हालिया मीडिया रिपोर्टों में भी क्षेत्र में अनधिकृत बिजली कनेक्शनों के जरिए रकम वसूले जाने के आरोप सामने आए हैं। एक रिपोर्ट में 13 हजार से अधिक अनधिकृत कनेक्शनों और निजी नेटवर्क के जरिए बिजली आपूर्ति का उल्लेख किया गया है।
यही वजह है कि अब स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि वैध मीटर की प्रक्रिया केवल शुरू ही न हो, बल्कि पूरी तरह पारदर्शी तरीके से संचालित भी की जाए। लोगों का कहना है कि वर्षों से चली आ रही कथित अनियमितताओं के बाद अब उन्हें ऐसी व्यवस्था चाहिए, जिसमें किसी बिचौलिए या निजी व्यक्ति की भूमिका न हो।
बैकडोर टोकन का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग के कुछ अधिकारियों से जुड़े लोगों पर टोकन वितरण में कथित पक्षपात का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि जहां आम लोग रातभर कतार में खड़े रहते हैं, वहीं कुछ प्रभावशाली या संबंधित लोगों को कथित रूप से पीछे के रास्ते से टोकन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जिन अधिकारियों या कर्मचारियों पर आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष सामने आना भी इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।
फिर भी शिकायत की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों की मांग है कि टोकन वितरण की पूरी प्रक्रिया की जांच की जाए। उनका कहना है कि यदि टोकन का वितरण डिजिटल सूची, सार्वजनिक रजिस्टर, ऑनलाइन पंजीकरण या अन्य पारदर्शी व्यवस्था से किया जाए तो विवाद की गुंजाइश काफी कम हो सकती है।
आम लोगों का सवाल है—अगर व्यवस्था सभी के लिए समान है, तो टोकन के लिए पूरी रात कतार क्यों?
50–60 कनेक्शन रोज तो हजारों परिवारों का क्या होगा?
स्थानीय लोगों के मुताबिक यदि प्रतिदिन केवल 50–60 परिवारों को ही मीटर या कनेक्शन दिए जाएंगे, तो हजारों परिवारों को अपनी बारी आने तक लंबे समय तक इंतजार करना पड़ेगा।
इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ेगा जिनकी आय दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर है। एक दिन टोकन के लिए, दूसरा दिन दस्तावेजों के लिए और फिर कनेक्शन की प्रक्रिया के लिए अलग-अलग समय निकालना उनके लिए आर्थिक बोझ बन सकता है।
लोगों का कहना है कि सरकार यदि वास्तव में अधिकतम परिवारों को वैध व्यवस्था में लाना चाहती है तो प्रक्रिया की क्षमता बढ़ानी होगी। एक ही स्थान पर भीड़ जुटाने के बजाय अलग-अलग स्थानों पर कैंप लगाए जाएं, अतिरिक्त काउंटर खोले जाएं और क्षेत्रवार टोकन वितरण की व्यवस्था बनाई जाए।
13 हजार का आंकड़ा, लेकिन स्थानीय दावे इससे कहीं अधिक
बिजली कनेक्शनों को लेकर एक और महत्वपूर्ण मुद्दा आंकड़ों का है। हालिया रिपोर्टों में छिजारसी के डूब क्षेत्र में 13 हजार से अधिक अनधिकृत कनेक्शनों की बात सामने आई है। एक अन्य रिपोर्ट में जांच के दौरान 18,650 कनेक्शनों में से 13,150 को अनधिकृत पाए जाने का उल्लेख किया गया है।
वहीं स्थानीय लोगों का दावा है कि पूरे क्षेत्र में ऐसे कनेक्शनों की संख्या 35,000 से 40,000 तक हो सकती है। यह आंकड़ा फिलहाल स्थानीय दावा है और इसकी आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
यही कारण है कि अब लोगों की मांग केवल मीटर लगाने तक सीमित नहीं है। वे चाहते हैं कि पूरे क्षेत्र का पारदर्शी सर्वे कराया जाए और वास्तविक संख्या सार्वजनिक की जाए, ताकि भविष्य की बिजली व्यवस्था उसी आधार पर तैयार हो सके।
कार्रवाई हुई, कनेक्शन कटे, अब समाधान की बारी
अगस्त में बिजली विभाग ने छिजारसी और चोटपुर क्षेत्र में बड़े स्तर पर कार्रवाई की थी। रिपोर्टों के मुताबिक 3,000 से अधिक कनेक्शन काटे गए और बिजली चोरी के मामलों में 19 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में बिजली संकट और स्थानीय विरोध की स्थिति भी सामने आई। इसके बाद वैध मीटर लगाने की दिशा में कदम बढ़ने की खबरें आईं। 13 सितंबर की एक स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार छिजारसी और चोटपुर में घर-घर वैध विद्युत कनेक्शन और सरकारी मीटर लगाने की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही गई।
इस लिहाज से अब स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि कार्रवाई और प्रक्रिया के बीच आम परिवारों को राहत भी मिले।
मुख्यमंत्री से लोगों की सीधी मांग—कैंप बढ़ाएं, प्रक्रिया तेज करें
स्थानीय परिवारों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि मीटर लगाने की प्रक्रिया को तेज कराया जाए और टोकन वितरण की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
लोगों की मांग है कि अलग-अलग स्थानों पर विशेष कैंप लगाए जाएं। महिलाओं, बुजुर्गों और दिहाड़ी मजदूरों के लिए अलग काउंटर या समय निर्धारित किया जाए। टोकन वितरण की सूची सार्वजनिक की जाए और किसी भी प्रकार के कथित बैकडोर वितरण पर रोक लगाई जाए।
इसके साथ ही लोगों का कहना है कि पात्र परिवारों के दस्तावेजों की जांच के लिए पर्याप्त कर्मचारी लगाए जाएं, ताकि एक ही काम के लिए लोगों को बार-बार लाइन में न लगना पड़े।
व्यवस्था सुधरी तो खत्म होगी वर्षों पुरानी परेशानी
छिजारसी–चोटपुर की मौजूदा तस्वीर केवल बिजली मीटर की कतार की कहानी नहीं है। यह उस बड़े सवाल से जुड़ी है कि वर्षों से अनधिकृत बिजली व्यवस्था पर निर्भर रहे हजारों परिवारों को वैध और पारदर्शी व्यवस्था में कैसे लाया जाए।
एक तरफ अनधिकृत कनेक्शनों और बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है, तो दूसरी तरफ प्रभावित परिवारों के लिए वैध व्यवस्था तक आसान पहुंच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। हालिया घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को लेकर लंबे समय से समस्या बनी हुई थी और अब इसे औपचारिक व्यवस्था में बदलने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
अब असली परीक्षा इस बात की है कि यह प्रक्रिया कितनी तेजी, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ पूरी होती है।
छिजारसी–चोटपुर की महिलाओं, बुजुर्गों और मजदूर परिवारों की मांग सीधी है—उन्हें रातभर सड़क पर खड़ा न होना पड़े। उन्हें उनका वैध बिजली कनेक्शन मिले, टोकन व्यवस्था निष्पक्ष हो और वर्षों पुरानी बिजली की परेशानी का स्थायी समाधान निकले।
सबसे बड़ा सवाल
जब उद्देश्य लोगों को राहत देना है, तो मीटर के लिए मातृशक्ति को पूरी रात कतार में खड़ा करने वाली व्यवस्था को बदला क्यों नहीं जा सकता?














