लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने भाजपा सरकार को भ्रष्टाचार और जवाबदेही के मुद्दे पर घेरने के लिए बड़ा राजनीतिक अभियान छेड़ने का ऐलान किया है। पार्टी ने 29 मई को प्रदेश के सभी मंडलों और जनपदों में एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस अभियान के जरिए कांग्रेस भाजपा सरकार के मंत्रियों और विधायकों की संपत्तियों की निष्पक्ष जांच की मांग को जनता के बीच प्रमुखता से उठाएगी।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग की ओर से जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार यह कार्यक्रम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के निर्देश पर आयोजित किया जा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि सत्ता में बैठे कई जनप्रतिनिधियों की संपत्तियों में पिछले वर्षों में असामान्य वृद्धि हुई है, जिसकी स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए।
भ्रष्टाचार और जवाबदेही को बनाएगी बड़ा मुद्दा
कांग्रेस इस अभियान के माध्यम से भाजपा सरकार पर सीधे हमले की तैयारी कर रही है। पार्टी का कहना है कि प्रदेश की जनता महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है, जबकि दूसरी ओर सत्ता से जुड़े लोगों की संपत्तियों में लगातार बढ़ोतरी के आरोप सामने आते रहे हैं।
पार्टी नेताओं का दावा है कि यदि जनप्रतिनिधियों की संपत्ति में वृद्धि वैध है तो सरकार को जांच से परहेज नहीं होना चाहिए। कांग्रेस इसी मुद्दे को लेकर प्रदेशभर में राजनीतिक माहौल बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।
प्रदेशभर में वरिष्ठ नेताओं की तैनाती
कांग्रेस हाईकमान ने अभियान को सफल बनाने के लिए प्रदेश के सभी मंडलों में वरिष्ठ नेताओं, पूर्व सांसदों, पूर्व विधायकों और मीडिया विभाग के पदाधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी है।
बरेली मंडल में पूर्व विधायक संजय कपूर, झांसी मंडल में बृजलाल व्यास, मेरठ मंडल में पूर्व विधायक गजराज सिंह, सहारनपुर मंडल में मसूद अख्तर, गोरखपुर मंडल में डॉ. अनु पासवान, अलीगढ़ मंडल में विवेक बंसल, आगरा मंडल में कुंवर सिंह निषाद और बस्ती मंडल में पूर्व सांसद कमल किशोर कमांडो को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसी प्रकार लखनऊ मंडल की जिम्मेदारी स्वयं मीडिया विभाग के चेयरमैन एवं पूर्व मंत्री डॉ. सीपी राय संभालेंगे। सभी नेताओं को जिला एवं शहर कांग्रेस कमेटियों के साथ संयुक्त प्रेसवार्ता आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।

क्या 2027 की तैयारी में जुटी कांग्रेस?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह अभियान केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित नहीं है। इसके पीछे कांग्रेस की व्यापक राजनीतिक रणनीति दिखाई दे रही है। लगातार कमजोर होती संगठनात्मक स्थिति के बीच पार्टी प्रदेश में अपनी मौजूदगी मजबूत करने और भाजपा के खिलाफ एक आक्रामक विपक्ष की भूमिका निभाने का प्रयास कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भ्रष्टाचार और जवाबदेही का मुद्दा ऐसा विषय है, जिस पर कांग्रेस सरकार को लगातार घेरने की कोशिश करेगी। आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह अभियान कांग्रेस के लिए राजनीतिक जमीन तैयार करने का माध्यम भी बन सकता है।
संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने की कवायद
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस इस अभियान को केवल मीडिया कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखना चाहती। पार्टी का लक्ष्य बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और स्थानीय मुद्दों को राज्यव्यापी विमर्श का हिस्सा बनाना है।
जिला और शहर इकाइयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्थानीय भ्रष्टाचार, जनसमस्याओं और विकास कार्यों से जुड़े मुद्दों को भी प्रेसवार्ता के दौरान प्रमुखता से उठाएं। इससे पार्टी को जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और जनता से सीधे संवाद स्थापित करने का अवसर मिलेगा।
राजनीतिक हलकों की नजर 29 मई पर
प्रदेशभर में एक साथ होने वाली कांग्रेस की प्रेसवार्ताओं को उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार और कथित अवैध संपत्ति के आरोपों को लेकर कांग्रेस किस तरह का राजनीतिक नैरेटिव तैयार करती है, इस पर सभी दलों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर रहेगी।
यदि कांग्रेस इस मुद्दे को जन-आंदोलन का स्वरूप देने में सफल होती है, तो आने वाले महीनों में प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और जवाबदेही की बहस और तेज हो सकती है।














