“सहारनपुर में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (DISHA) की बैठक उस वक्त सियासी अखाड़े में बदलती नजर आई, जब कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी के विधायक आशु मलिक के बीच सवाल उठाने को लेकर तीखी बहस हो गई। दोनों नेताओं के बीच हुई नोकझोंक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।”
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन और सीट शेयरिंग को लेकर भले ही बातचीत जारी हो, लेकिन जमीनी स्तर पर दोनों दलों के नेताओं के बीच मतभेद लगातार सुर्खियां बटोर रहे हैं। सहारनपुर में सामने आया ताजा घटनाक्रम भी इसी राजनीतिक खींचतान की ओर इशारा करता नजर आ रहा है। हालांकि, बैठक में हुई बहस का सीधा संबंध सीट बंटवारे से था या नहीं, इसकी पुष्टि नेताओं की ओर से नहीं की गई है।
DISHA बैठक में आमने-सामने आए दोनों नेता
सहारनपुर में आयोजित DISHA बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद थे। बैठक का उद्देश्य जिले में चल रही विकास योजनाओं की समीक्षा और जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना था। इसी दौरान कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और सपा विधायक आशु मलिक के बीच सवाल उठाने को लेकर बहस शुरू हो गई।
बताया जा रहा है कि आशु मलिक बैठक में जनता से जुड़े मुद्दे और स्थानीय समस्याएं उठाने की बात कह रहे थे। इसी दौरान इमरान मसूद ने सवाल उठाया कि दूसरों को भी बोलने का मौका दिया जाना चाहिए।
मामला यहीं नहीं रुका। दोनों नेताओं के बीच जवाबी टिप्पणी का सिलसिला शुरू हो गया और देखते ही देखते बातचीत तीखी बहस में बदल गई।
‘आप चुप होंगे तो हम बोलेंगे’
बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच हुई बहस का वीडियो अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। सामने आए घटनाक्रम के मुताबिक, इमरान मसूद की आपत्ति के बाद आशु मलिक ने भी पलटकर जवाब दिया।
आशु मलिक की ओर से कहा गया कि जनता से जुड़े सवाल हैं तो उन्हें बैठक में उठाया ही जाएगा। इसी दौरान दोनों नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। बैठक में मौजूद अधिकारी और अन्य जनप्रतिनिधि पूरे घटनाक्रम के दौरान वहां मौजूद रहे।
कुछ देर तक माहौल गर्म रहने के बाद स्थिति सामान्य हुई और बैठक की कार्यवाही आगे बढ़ी। बाद में दोनों नेता बैठक में शामिल होते नजर आए।
सियासी टकराव का पुराना इतिहास
इमरान मसूद और आशु मलिक के बीच राजनीतिक मतभेद कोई पहली बार सामने नहीं आए हैं। पिछले कुछ समय में दोनों नेताओं के बीच अलग-अलग मुद्दों को लेकर सार्वजनिक तौर पर बयानबाजी और टकराव देखने को मिलता रहा है।
इसी वजह से DISHA बैठक में हुई ताजा बहस को भी स्थानीय राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। सहारनपुर की राजनीति में दोनों नेताओं की अपनी-अपनी राजनीतिक पकड़ है और ऐसे में सार्वजनिक मंच पर हुई यह नोकझोंक स्वाभाविक तौर पर चर्चा का विषय बन गई है।
हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि बैठक में हुई बहस को सीधे तौर पर सपा-कांग्रेस गठबंधन या आगामी विधानसभा चुनाव में सीट शेयरिंग के विवाद से जोड़ने की पुष्टि फिलहाल किसी नेता की ओर से नहीं हुई है।
सीट शेयरिंग पर पहले से चल रही बयानबाजी
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हैं। विपक्षी खेमे में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच संभावित गठबंधन को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। दोनों दलों ने पिछले लोकसभा चुनाव में साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और अब विधानसभा चुनाव में भी गठबंधन की संभावनाओं पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं।
लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों के नेताओं की ओर से समय-समय पर अलग-अलग बयान सामने आते रहे हैं। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद भी सीट शेयरिंग को लेकर अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखते रहे हैं। ऐसे में सहारनपुर में सपा विधायक के साथ उनकी नोकझोंक ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है।
चार घंटे चली बैठक, रिकॉर्ड हुई पूरी कार्यवाही
बताया जा रहा है कि सहारनपुर की DISHA बैठक करीब चार घंटे तक चली। बैठक में जिले के विकास कार्यों, विभिन्न सरकारी योजनाओं और जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
प्रशासन की ओर से बैठक की पूरी कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई। इसी रिकॉर्डिंग के दौरान सामने आए दोनों नेताओं के बीच बहस के अंश अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय राजनीति में इस घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, बैठक में मौजूद अन्य लोगों की ओर से घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं, लेकिन फिलहाल इमरान मसूद और आशु मलिक की ओर से इस बहस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
गठबंधन की राह में स्थानीय मतभेद चुनौती?
सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की राजनीति में सबसे बड़ी चुनौती केवल सीटों का बंटवारा नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर दोनों दलों के नेताओं के बीच बेहतर तालमेल भी माना जाता है। चुनावी गठबंधन तभी प्रभावी होता है जब उसके सहयोगी दलों के स्थानीय कार्यकर्ता और नेता भी एक-दूसरे के साथ समन्वय बनाकर काम करें।
सहारनपुर में सामने आया घटनाक्रम इसी चुनौती की ओर ध्यान खींचता है। एक ओर दोनों दल आगामी चुनाव को लेकर साथ आने की संभावनाएं तलाश रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर नेताओं के बीच मतभेद और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार सामने आती रही है।
फिलहाल DISHA बैठक में हुई इमरान मसूद और आशु मलिक की नोकझोंक को लेकर दोनों नेताओं की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद सहारनपुर की राजनीति में यह घटनाक्रम चर्चा का नया मुद्दा जरूर बन गया है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में दोनों दल सीट शेयरिंग और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को किस तरह साधते हैं और क्या सहारनपुर में सामने आया यह टकराव महज एक बैठक तक सीमित रहता है या फिर इसका असर सपा-कांग्रेस के बीच चुनावी तालमेल पर भी दिखाई देता है।














