Wednesday, September 9, 2026
Your Dream Technologies
HomeUttar Pradeshराम मंदिर की व्यवस्थाओं में बड़ा फेरबदल: अनिल मिश्रा के दो करीबी...

राम मंदिर की व्यवस्थाओं में बड़ा फेरबदल: अनिल मिश्रा के दो करीबी हटाए गए, प्रवेश पर रोक; चढ़ावा चोरी की SIT रिपोर्ट से बढ़ी हलचल

अयोध्या: राम जन्मभूमि परिसर में चढ़ावा और श्रद्धालुओं की ओर से अर्पित की जाने वाली मूल्यवान वस्तुओं के कथित गबन की जांच के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की व्यवस्थाओं में बड़ा बदलाव किया गया है। पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा के दो करीबी माने जाने वाले केडी तिवारी उर्फ बड़े बाबू और बजरंग पाठक को राम मंदिर की व्यवस्थाओं से हटा दिया गया है। दोनों को अब बाग बिजैसी स्थित तीर्थ क्षेत्र पुरम भेज दिया गया है और उनके राम मंदिर परिसर में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को आगे की कार्रवाई के लिए सौंपे जाने की खबर सामने आई है। हालांकि रिपोर्ट में किन लोगों की भूमिका पर क्या टिप्पणी की गई है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। इसी वजह से मंदिर प्रशासन में हुए ताजा बदलाव को चढ़ावा चोरी प्रकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।

दो अहम जिम्मेदारियां, अब मंदिर व्यवस्था से बाहर

केडी तिवारी मंदिर की महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं से जुड़े हुए थे। वह रामलला को अर्पित किए जाने वाले आभूषणों और श्रद्धालुओं की ओर से समर्पित मूल्यवान वस्तुओं के हिसाब-किताब की जिम्मेदारी संभालते थे। मंदिर में चढ़ावे और बहुमूल्य वस्तुओं के प्रबंधन की संवेदनशीलता को देखते हुए यह जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

दूसरी ओर, बजरंग पाठक वीआईपी दर्शनार्थियों के लिए प्रसाद, अंगवस्त्र और अन्य भेंट से जुड़ी व्यवस्थाएं देखते थे। दोनों को पहले शिकायत के आधार पर नोटिस दिए जाने की बात सामने आई। इसके बाद उन्हें राम मंदिर की नियमित व्यवस्था से हटाकर तीर्थ क्षेत्र पुरम भेज दिया गया।

ट्रस्ट की कार्रवाई के बाद दोनों के मंदिर परिसर में प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है। बताया जा रहा है कि मंगलवार से दोनों मंदिर परिसर में प्रवेश नहीं कर रहे हैं।

महिला CO की शिकायत के बाद बढ़ा विवाद

मंदिर परिसर में हुई इस कार्रवाई के पीछे एक महिला क्षेत्राधिकारी की शिकायत को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि दर्शन के दौरान प्रसाद की व्यवस्था को लेकर बजरंग पाठक और महिला CO के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद शिकायत की गई और मामले ने तूल पकड़ लिया।

हालांकि, यह कार्रवाई केवल इस विवाद का परिणाम है या मंदिर में चढ़ावा चोरी की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों से भी इसका संबंध है, इसकी स्पष्ट आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। यही वजह है कि ट्रस्ट के भीतर हुए इस प्रशासनिक बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

SIT की अंतिम रिपोर्ट ने बढ़ाई बेचैनी

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद से मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और आंतरिक व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में रही हैं। इस मामले की जांच के लिए गृह विभाग की ओर से विशेष जांच दल गठित किया गया था। अब SIT की अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट के साथ साझा किए जाने की जानकारी सामने आई है।

एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी गई है, लेकिन उसके भीतर क्या निष्कर्ष निकाले गए हैं, इसकी जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि रिपोर्ट में किन लोगों की भूमिका का उल्लेख है और आगे किन स्तरों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

शुरुआती जांच में पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा के नाम शामिल नहीं होने की बात सामने आई थी। लेकिन पूरे प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच अभी भी महत्वपूर्ण मोड़ पर है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी जारी है जांच

मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गठित SIT की जांच को अलग प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। बताया गया है कि जांच एजेंसी को अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल करनी है। ऐसे में अलग-अलग जांचों और रिपोर्टों के निष्कर्षों को लेकर भी निगाहें बनी हुई हैं।

चढ़ावा चोरी का मामला केवल मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा। इसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव भी दिखाई दिए। मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों पर उठे सवालों के बीच साधु-संतों के बीच भी अलग-अलग राय सामने आने लगी है।

संतों के बीच समर्थन और विरोध की अलग-अलग तस्वीर

इस पूरे घटनाक्रम के बीच चंपत राय और अनिल मिश्रा की गतिविधियां भी चर्चा में हैं। खबरों के मुताबिक दोनों अलग-अलग साधु-संतों से मुलाकात कर रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि संतों के एक वर्ग ने चंपत राय के समर्थन में खुलकर बोलना शुरू कर दिया है।

वहीं, अनिल मिश्रा की ओर से भी अलग-अलग स्थानों पर छोटी बैठकों के जरिए अपने ऊपर और चंपत राय पर लगाए गए आरोपों को साजिश बताते हुए खारिज किए जाने की बात सामने आ रही है।

अयोध्या के संत समाज में भी इस मामले को लेकर एकराय नहीं है। कुछ संतों का मानना है कि चंपत राय को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों में दम नहीं है। वहीं, दूसरे पक्ष की मांग है कि मंदिर जैसी धार्मिक संस्था से जुड़े किसी भी वित्तीय या प्रशासनिक विवाद की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी मिले, उसके खिलाफ कार्रवाई हो।

जून में सामने आया था चढ़ावा चोरी का मामला

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला इस साल जून के पहले सप्ताह में सामने आया था। इसके बाद मंदिर की सुरक्षा, चढ़ावे के प्रबंधन, मूल्यवान वस्तुओं के हिसाब-किताब और अंदरूनी प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठे। मामला जल्द ही राजनीतिक विवाद में बदल गया।

जांच आगे बढ़ने के साथ कई लोगों से पूछताछ हुई और अब तक आठ लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। मामले में जांच एजेंसियां अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित की जाने वाली धनराशि, आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की निगरानी व्यवस्था में आखिर कहां चूक हुई। क्या यह केवल कुछ कर्मचारियों की कथित लापरवाही या अनियमितता थी, या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था—इसका जवाब जांच रिपोर्ट से मिलने की उम्मीद है।

अब कार्रवाई की अगली कड़ी पर निगाह

केडी तिवारी और बजरंग पाठक को मंदिर व्यवस्था से हटाया जाना फिलहाल एक प्रशासनिक कार्रवाई है। इसे किसी व्यक्ति की आपराधिक संलिप्तता का प्रमाण नहीं माना जा सकता, जब तक जांच एजेंसी या सक्षम प्राधिकारी इसकी स्पष्ट पुष्टि न करे।

लेकिन जिस समय यह कदम उठाया गया है, वह इसे महत्वपूर्ण जरूर बनाता है। एक तरफ SIT की अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट तक पहुंचने की खबर है, दूसरी तरफ मंदिर की संवेदनशील व्यवस्थाओं से जुड़े दो लोगों को हटाया गया है और उनके प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।

अब निगाह इस बात पर है कि SIT की रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और ट्रस्ट उसके आधार पर क्या कदम उठाता है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार किए गए आठ लोगों की भूमिका जांच में किस तरह सामने आती है।

राम मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं का प्रतीक है। इसलिए यहां चढ़ावे और श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित वस्तुओं से जुड़ी किसी भी अनियमितता का सवाल बेहद गंभीर है। SIT की रिपोर्ट और ट्रस्ट की अगली कार्रवाई से ही साफ होगा कि इस पूरे प्रकरण में असल दोष कहां है और मंदिर की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

- Advertisement -
Your Dream Technologies
VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

Call Now Button