अब व्यापार, कारोबारी और वित्तीय लेनदेन पर अगले आदेश तक रोक; होर्मुज संकट के बीच बढ़ी क्षेत्रीय चिंता
नई दिल्ली: ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने बड़ा आर्थिक फैसला लिया है। UAE ने ईरान के साथ सभी व्यापारिक, वाणिज्यिक और वित्तीय लेनदेन को अगले आदेश तक रोकने का ऐलान किया है। यह फैसला UAE की ओर से ईरान से जुड़ी दो बैलिस्टिक मिसाइलों के अलर्ट के बाद सामने आया है।
UAE ने क्या आरोप लगाया?
UAE के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, मंगलवार को उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने ईरान से आने वाली दो बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाया। इसके बाद UAE में लोगों के मोबाइल फोन पर कुछ समय के लिए मिसाइल खतरे का अलर्ट भी भेजा गया।
UAE का दावा है कि उसकी जांच में सामने आया कि मिसाइलों को समुद्र में मौजूद जहाजों को निशाना बनाने के लिए दागा गया था। इनमें से एक मिसाइल UAE के क्षेत्रीय जल से बाहर समुद्र में गिरी, जबकि दूसरी UAE के क्षेत्रीय जल में गिरी।
हालांकि, UAE के मुताबिक इस घटना में किसी के घायल होने या संपत्ति को नुकसान पहुंचने की खबर नहीं है।
ईरान ने आरोपों से किया इनकार
दूसरी ओर, ईरान ने UAE के आरोपों को खारिज कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने मिसाइल हमले के आरोपों को बेबुनियाद बताया और क्षेत्रीय देशों से बिना पुष्टि के ऐसे आरोप लगाने से बचने की अपील की।
यानी फिलहाल मिसाइलों को लेकर UAE और ईरान के दावों में सीधा विरोधाभास है।
क्यों अहम है UAE का आर्थिक फैसला?
मिसाइल विवाद के बाद UAE ने ईरान के खिलाफ आर्थिक मोर्चे पर बड़ा कदम उठाया है। UAE के विदेश मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में बढ़ता तनाव शांति और सुरक्षा के लिए खतरा बन रहा है। इसी को देखते हुए ईरान के साथ व्यापार, वाणिज्यिक आदान-प्रदान और वित्तीय लेनदेन रोकने का फैसला किया गया है।
इस रोक की कोई निश्चित समयसीमा घोषित नहीं की गई है।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के महीनों में UAE और ईरान के संबंधों में कुछ नरमी दिखाई दे रही थी। दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियां फिर से बढ़ रही थीं और UAE में ईरानी कारोबारी गतिविधियां भी सामान्य होने लगी थीं।
होर्मुज संकट से बढ़ेगी चिंता?
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर होर्मुज स्ट्रेट पर पड़ सकता है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में वैश्विक तेल और LNG की आवाजाही होती है।
क्षेत्र में सैन्य तनाव और जहाजों की आवाजाही में कमी पहले ही वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। ऐसे में UAE और ईरान के बीच व्यापारिक रिश्तों पर लगी रोक से क्षेत्रीय व्यापार, शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता और बढ़ सकती है।
UAE पहले भी ईरान पर अपनी सरकारी तेल कंपनी ADNOC से जुड़े जहाजों को निशाना बनाने का आरोप लगा चुका है। हालांकि उन घटनाओं में भी किसी के घायल होने की सूचना नहीं थी।
आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि UAE का यह आर्थिक प्रतिबंध कितने समय तक जारी रहता है और क्या दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कोई कूटनीतिक पहल होती है।
अगर मिसाइल विवाद और होर्मुज में तनाव आगे बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ UAE और ईरान तक सीमित नहीं रह सकता। खाड़ी क्षेत्र की शिपिंग, तेल-गैस आपूर्ति और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी इसका असर पड़ सकता है।














