लंदन: ब्रिटेन की जेलों में बढ़ती भीड़ के बीच सरकार कैदियों की समय से पहले रिहाई की व्यवस्था में बदलाव कर रही है। नई व्यवस्था का उद्देश्य जेलों पर बढ़ते दबाव को कम करना और उपलब्ध क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करना है।
ब्रिटेन में जेलों की क्षमता लंबे समय से दबाव में है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 में इंग्लैंड और वेल्स की जेलों में करीब 85,858 कैदी थे, जबकि परिचालन क्षमता करीब 89,120 थी।
सजा पूरी होने से पहले रिहाई के नियमों में बदलाव
Sentencing Act 2026 के तहत कुछ कैदियों को उनकी पूरी सजा समाप्त होने से पहले रिहा किया जा सकता है। नए नियमों में कुछ सामान्य निर्धारित सजा वाले मामलों में रिहाई का बिंदु पहले किया गया है—कुछ मामलों में एक-तिहाई सजा पूरी होने के बाद और कुछ में आधी सजा के बाद। रिहा होने के बाद कैदी को शेष अवधि समुदाय में निगरानी और निर्धारित शर्तों के तहत बितानी होगी।
उदाहरण के लिए, पात्र कैदी को यदि 9 साल की निर्धारित सजा मिली है और उसका मामला नए नियमों के अंतर्गत आता है, तो वह पूरी 9 साल की अवधि जेल में बिताने के बजाय पहले रिहा हो सकता है। हालांकि, यह हर अपराध या हर कैदी पर लागू नहीं होगा।
गंभीर अपराधों पर अलग नियम
सरकार ने विरोध और समीक्षा के बाद कई गंभीर अपराधों को इस बदलाव से बाहर कर दिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार बलात्कार, गंभीर बाल यौन अपराध और ग्रूमिंग जैसे मामलों के दोषियों को नई शुरुआती रिहाई व्यवस्था से बाहर रखा गया है।
यही वजह है कि शुरुआती योजना में बताए गए संभावित रिहाई के आंकड़े बाद में बदले हैं। जुलाई में सरकार ने योजना को रोककर समीक्षा भी की थी और बाद में इसके दायरे में बदलाव किए गए।
जेलों पर क्यों बढ़ रहा है दबाव?
ब्रिटेन की जेल व्यवस्था में भीड़ और क्षमता का दबाव सरकार के लिए बड़ी प्रशासनिक चुनौती बना हुआ है। जून 2026 में इंग्लैंड और वेल्स की जेलों में 85 हजार से ज्यादा लोग बंद थे। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2025-26 में लगभग 23.9% कैदी भीड़भाड़ वाली व्यवस्था में रह रहे थे।
सरकार के सामने चुनौती यह है कि नए दोषियों के लिए जेलों में पर्याप्त जगह उपलब्ध रहे और साथ ही पहले से बंद कैदियों की निगरानी और पुनर्वास की व्यवस्था भी बनी रहे।
फैसले को लेकर क्यों उठे सवाल?
समय से पहले रिहाई की योजना को लेकर पीड़ितों के परिवारों और कुछ राजनीतिक नेताओं की ओर से सुरक्षा संबंधी चिंताएं उठाई गई हैं। दूसरी ओर, सरकार के सामने जेलों की क्षमता और न्याय व्यवस्था पर बढ़ते दबाव को संभालने की चुनौती है।
इसलिए मौजूदा नीति में एक तरफ जेलों की भीड़ कम करने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ गंभीर अपराधों के दोषियों को बाहर रखने और रिहा होने वाले कैदियों पर निगरानी की व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।















