वाराणसी: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज होने लगी है। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और जुबानी जंग का दौर भी लगातार धार पकड़ रहा है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में सीवर ओवरफ्लो और जलभराव का एक वीडियो सामने आने के बाद सियासत गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए योगी सरकार और वाराणसी की व्यवस्थाओं पर निशाना साधा, तो दूसरी ओर नगर निगम ने इस पूरे मामले को काशी की छवि खराब करने की साजिश करार दिया है।
मामला वाराणसी के शिवाला इलाके का है, जहां सीवर ओवरफ्लो होने के बाद सड़क पर घुटनों तक पानी भर गया। वीडियो में इसी गंदे पानी से होकर विदेशी पर्यटकों को गुजरते हुए देखा जा सकता है। वीडियो 10 सितंबर का बताया जा रहा है। अखिलेश यादव के सोशल मीडिया पर इसे साझा किए जाने के बाद यह स्थानीय समस्या महज जलभराव के मुद्दे तक सीमित नहीं रही, बल्कि सीधे तौर पर राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई।
अखिलेश यादव ने साधा निशाना, ‘काशी का जलमग्न विकास’ बताया
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने वीडियो शेयर करते हुए बीजेपी सरकार पर तंज कसा। उन्होंने काशी की स्थिति को लेकर सरकार की विकास योजनाओं पर सवाल उठाया और कहा कि विदेशी पर्यटकों के सामने देश की ‘प्रधान नगरी’ का विकास पानी-पानी नजर आ रहा है।
अखिलेश ने अपनी पोस्ट में लिखा कि काशी में विदेशी पर्यटकों के सामने पानी-पानी हुआ देश की प्रधान नगरी का जलमग्न विकास। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब तक काशी को गोरखपुर जैसा जलमग्न नहीं बना दिया जाएगा, तब तक लखनऊ वाले मानेंगे नहीं। उन्होंने आगे कहा कि अब आपसी झगड़ा अंतरराष्ट्रीय हो गया है और बात दिल्ली बनाम लखनऊ से ऊपर उठकर ‘क्योटो बनाम स्पेन’ तक पहुंच गई है।
अखिलेश के इस हमले के बाद बीजेपी और नगर निगम की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। नगर निगम का कहना है कि वीडियो में दिखाई दे रही स्थिति के पीछे सीवर लाइन में जानबूझकर अवरोध पैदा किए जाने की आशंका है।
नगर निगम ने कहा—‘काशी की छवि धूमिल करने का प्रयास’
वीडियो के सामने आने के बाद वाराणसी नगर निगम सक्रिय हुआ। शनिवार को मेयर अशोक तिवारी अधिकारियों और पार्षदों के साथ शिवाला क्षेत्र पहुंचे और मौके की स्थिति का जायजा लिया। मेयर ने नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल तथा अन्य अधिकारियों के साथ मीडिया से बातचीत करते हुए दावा किया कि काशी की छवि को योजनाबद्ध तरीके से खराब करने का प्रयास किया जा रहा है।
मेयर के मुताबिक, नगर निगम की ओर से सीवर लाइनों की सफाई के दौरान शिवाला, सरायनंदन, नगवा समेत करीब आधा दर्जन वार्डों में मुख्य सीवर लाइनों के अंदर ऐसी सामग्री मिली है, जिससे सीवर का प्रवाह बाधित हो सकता है।
सीवर लाइन के अंदर मिलीं बालू की बोरियां, पत्थर और प्लाई
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, सीवर लाइनों की सफाई के दौरान मुख्य सीवर लाइन के भीतर बालू की बोरियां, लकड़ी का बुरादा, पत्थर, प्लाई और प्लास्टिक जैसी सामग्री ठूंसी हुई मिली है। मेयर अशोक तिवारी ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा प्रतीत हो रहा है और पूरे मामले की जांच की आवश्यकता है।
मेयर ने बताया कि शुक्रवार रात शिवाला क्षेत्र में सीवर लाइन की सफाई के दौरान करीब 12 बोरी बालू निकाली गई। उनका कहना है कि सीवर लाइन में इस तरह बड़ी संख्या में बालू की बोरियां मिलना सामान्य घटना नहीं है और इससे यह आशंका पैदा होती है कि किसी ने जानबूझकर सीवर व्यवस्था को बाधित करने की कोशिश की।
नगर निगम के अनुसार, मुख्य मार्ग की सीवर लाइन जाम होने के कारण आसपास की सहायक गलियों में सीवर का पानी ओवरफ्लो होने लगा। इसके चलते सड़क पर जलभराव की स्थिति बनी और स्थानीय लोगों तथा राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
काशी में विदेशी पर्यटकों के सामने पानी-पानी हुआ देश की ‘प्रधान नगरी’ का जलमग्न विकास!
जब तक प्रधान नगरी काशी को जलमग्न मुख्य नगरी गोरखपुर जैसा नहीं बना देंगे तब तक लखनऊवाले मानेंगे नहीं।
दरअसल अब आपस का झगड़ा अंतरराष्ट्रीय हो गया है बात दिल्ली बनाम लखनऊ से ऊपर उठकर ‘क्योटो… pic.twitter.com/Hs7W1FLUvj
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) September 12, 2026
सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहा नगर निगम
नगर निगम प्रशासन ने अब यह पता लगाने की कोशिश शुरू कर दी है कि सीवर लाइन में कथित तौर पर सामग्री किसने और कब डाली। इसके लिए क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है।
मेयर ने कहा कि दोषियों की पहचान होने पर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम का कहना है कि सरकारी संपत्ति और शहर की बुनियादी सुविधाओं को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश को गंभीरता से लिया जाएगा।
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने भी घटना के पीछे अवांछनीय तत्वों का हाथ होने की आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि नगर निगम पूरे मामले की जांच और साजिश का पर्दाफाश करने में जुटा है। साथ ही उन्होंने शहरवासियों से अपील की कि यदि कोई व्यक्ति सीवर लाइन या सरकारी परिसंपत्तियों के साथ छेड़छाड़ करता दिखाई दे तो तत्काल नगर निगम को सूचना दें।
अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR, जांच के बाद खुलेगा राज
नगर निगम प्रशासन ने इस मामले में भेलूपुर थाने में अज्ञात अराजक तत्वों के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। अब पुलिस और नगर निगम की जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि सीवर लाइन में मिली सामग्री वहां कैसे पहुंची और इसके पीछे किसका हाथ था।
फिलहाल नगर निगम ने इसे साजिश की आशंका के तौर पर सामने रखा है। ऐसे में जांच पूरी होने और दोषियों की पहचान होने तक इस दावे की पुष्टि होना बाकी है। हालांकि, राजनीतिक तौर पर यह मामला तेजी से तूल पकड़ चुका है और विपक्ष इसे सरकार की व्यवस्थाओं पर हमला करने के लिए इस्तेमाल कर रहा है।
काशी के विकास मॉडल पर फिर उठे सवाल
वाराणसी में सीवर ओवरफ्लो का यह मामला इसलिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि काशी को पिछले कई वर्षों से विकास और कायाकल्प के बड़े मॉडल के तौर पर पेश किया जाता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से तीसरी बार सांसद हैं और शहर में बुनियादी ढांचे, पर्यटन तथा धार्मिक स्थलों के विकास के लिए कई परियोजनाएं चल रही हैं।
अगस्त 2018 में भारत और जापान के बीच हुए एक समझौते के बाद काशी को जापान के शहर क्योटो की तर्ज पर विकसित करने की चर्चा तेज हुई थी। ऐसे में विदेशी पर्यटकों के सामने सड़क पर सीवर का पानी और जलभराव दिखाई देने वाला वीडियो विपक्ष को सरकार पर सवाल उठाने का मौका दे रहा है।
अखिलेश यादव ने इसी ‘क्योटो मॉडल’ को लेकर सरकार पर तंज कसा है। वहीं नगर निगम का कहना है कि यदि सीवर लाइन में जानबूझकर अवरोध पैदा किया गया है तो इसे केवल प्रशासनिक लापरवाही के रूप में नहीं देखा जा सकता।
चुनाव से पहले गरमाई काशी की सियासत
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच वाराणसी का यह विवाद आने वाले दिनों में और राजनीतिक रंग ले सकता है। एक तरफ विपक्षी दल सरकार के विकास के दावों पर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ बीजेपी और स्थानीय प्रशासन ऐसी घटनाओं के पीछे साजिश की आशंका जता रहे हैं।
अब निगाहें पुलिस और नगर निगम की जांच पर हैं। सीसीटीवी फुटेज से यदि सीवर लाइन में सामग्री डालने वालों की पहचान होती है तो पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकती है। फिलहाल इतना तय है कि शिवाला में सीवर ओवरफ्लो से शुरू हुआ विवाद अब काशी के विकास मॉडल, नगर निगम की कार्यप्रणाली और चुनावी राजनीति के बीच एक बड़ा सियासी मुद्दा बन गया है।
एक तरफ अखिलेश यादव का सवाल है कि विदेशी पर्यटकों के सामने काशी का विकास पानी में क्यों दिखाई दे रहा है, तो दूसरी तरफ नगर निगम का दावा है कि यह सामान्य जलभराव नहीं, बल्कि सीवर लाइन में जानबूझकर अवरोध पैदा करने का मामला हो सकता है। सच क्या है, यह जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा—लेकिन फिलहाल काशी का सीवर सियासत में जरूर उफान मार रहा है।














