Friday, August 28, 2026
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ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का बड़ा फैसला, नोएडा और यीडा से भी ज्यादा मुआवजा दर; किसानों और प्राधिकरण के बीच भरोसा बहाल करने की कोशिश

“4125 से सीधे 6415 रुपये प्रति वर्गमीटर पहुंचा मुआवजा, एक झटके में 2290 रुपये की बढ़ोतरी; 6 फीसदी विकसित भूखंड का भी विकल्प—जमीन लेते ही मिलेगा आरक्षण पत्र”

ग्रेटर नोएडा: करीब 12 वर्षों से मुआवजा दर बढ़ने का इंतजार कर रहे किसानों के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने आखिरकार बड़ा फैसला कर दिया है। वर्षों से 4125 रुपये प्रति वर्गमीटर पर अटकी भूमि मुआवजा दर में एकमुश्त 2290 रुपये की बढ़ोतरी करते हुए इसे 6415 रुपये प्रति वर्गमीटर कर दिया गया है। यानी किसानों की जमीन के मुआवजे में सीधे करीब 55.5 फीसदी का उछाल आया है।

प्राधिकरण के इस फैसले को किसानों के लिए बड़ी आर्थिक राहत के साथ-साथ वर्षों से चली आ रही नाराजगी और अविश्वास को दूर करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। नई मुआवजा दर पड़ोसी नोएडा और यमुना प्राधिकरण की दरों से भी अधिक बताई गई है।

लेकिन इस फैसले की सबसे बड़ी खासियत केवल बढ़ी हुई मुआवजा दर नहीं है। प्राधिकरण ने किसानों को 6 फीसदी विकसित आवासीय भूखंड लेने का विकल्प भी दिया है। इस विकल्प को चुनने वाले किसानों को 5725 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से मुआवजा मिलेगा और इसके साथ 6 फीसदी विकसित भूखंड उपलब्ध कराया जाएगा।

सबसे अहम बात यह है कि अब किसान जमीन देने के बाद वर्षों तक भूखंड के लिए प्राधिकरण के चक्कर नहीं काटेंगे। भूमि क्रय के समय ही 6 फीसदी विकसित भूखंड का आरक्षण पत्र जारी करने की व्यवस्था की गई है।

12 साल से फंसी थी मुआवजे की फाइल

ग्रेटर नोएडा में जमीन की कीमतों और शहर के विस्तार में पिछले एक दशक में बड़ा बदलाव आया है। औद्योगिक परियोजनाएं बढ़ीं, आवासीय क्षेत्र फैले, एक्सप्रेसवे और अन्य बुनियादी ढांचे विकसित हुए, लेकिन किसानों को मिलने वाली भूमि मुआवजा दर लंबे समय तक 4125 रुपये प्रति वर्गमीटर पर ही रुकी रही।

मुआवजा दर में संशोधन की मांग को लेकर किसान लगातार आवाज उठाते रहे। अलग-अलग किसान संगठनों ने समय-समय पर प्राधिकरण के सामने अपनी मांगें रखीं और आंदोलन भी किए।

अब इस लंबे इंतजार पर विराम लगाते हुए प्राधिकरण बोर्ड ने बाई सर्कुलर के जरिए नई मुआवजा दर को मंजूरी दे दी है।

4125 रुपये से 6415 रुपये प्रति वर्गमीटर की यह वृद्धि वर्षों से लंबित मामले में एक बड़ा नीतिगत बदलाव है।

एक झटके में 2290 रुपये का फायदा

नई दर का सीधा असर किसानों को मिलने वाले मुआवजे पर पड़ेगा।

पुरानी दर—4125 रुपये प्रति वर्गमीटर।

नई दर—6415 रुपये प्रति वर्गमीटर।

सीधी बढ़ोतरी—2290 रुपये प्रति वर्गमीटर।

कुल वृद्धि—करीब 55.5 फीसदी।

यानी अब प्राधिकरण को जमीन देने वाले किसानों को प्रत्येक वर्गमीटर पर पहले के मुकाबले 2290 रुपये अधिक मिलेंगे।

भूमि का क्षेत्रफल जितना बड़ा होगा, बढ़ी हुई दर का आर्थिक लाभ भी उतना ही अधिक होगा।

6 फीसदी विकसित भूखंड का विकल्प भी

प्राधिकरण ने किसानों को केवल नकद मुआवजा बढ़ाने का विकल्प नहीं दिया है। किसान चाहें तो 6 फीसदी विकसित आवासीय भूखंड का विकल्प भी चुन सकते हैं।

इस विकल्प को चुनने वाले किसानों को भूमि के लिए 5725 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से मुआवजा मिलेगा। इसके अलावा निर्धारित नीति के अनुसार उन्हें 6 फीसदी विकसित भूखंड भी उपलब्ध कराया जाएगा।

प्राधिकरण इन भूखंडों को किसानों के लिए समर्पित आवासीय सेक्टरों में उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है।

इस व्यवस्था से किसान अपनी तत्काल आर्थिक जरूरत और भविष्य के संपत्ति मूल्य को ध्यान में रखते हुए दोनों विकल्पों में से अपने लिए बेहतर विकल्प चुन सकेंगे।

अब जमीन के साथ मिलेगा भूखंड का ‘गारंटी कार्ड’

नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव 6 फीसदी भूखंड को लेकर किया गया है।

अतीत में बड़ी संख्या में किसानों की शिकायत रही है कि जमीन देने के बाद विकसित भूखंड के लिए उन्हें वर्षों तक प्राधिकरण के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

कई मामलों में जमीन देने और भूखंड मिलने के बीच लंबा अंतराल रहा है। इससे किसानों में नाराजगी और अविश्वास बढ़ा।

अब प्राधिकरण ने इस समस्या को दूर करने के लिए फैसला किया है कि जमीन क्रय के समय ही किसान को 6 फीसदी विकसित भूखंड का आरक्षण पत्र जारी किया जाएगा।

यानी जमीन देने के समय ही किसान के पास यह दस्तावेज होगा कि उसे भविष्य में निर्धारित नीति के तहत विकसित भूखंड मिलेगा।

डेढ़ दशक पुरानी शिकायतों पर भी नजर

ग्रेटर नोएडा के अलावा नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में किसान ऐसे हैं जिन्होंने वर्षों पहले विकास परियोजनाओं के लिए अपनी जमीन दी थी।

लेकिन आबादी या आवासीय भूखंड मिलने की प्रक्रिया आज तक पूरी नहीं हो सकी है। कई किसान परिवारों की एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक इंतजार पहुंच गया है।

यही वजह है कि प्राधिकरणों और किसानों के बीच विश्वास की समस्या लगातार बनी रही।

गौतमबुद्धनगर में करीब 80 किसान संगठन सक्रिय बताए जाते हैं। ये संगठन अलग-अलग किसान मुद्दों को लेकर समय-समय पर प्राधिकरणों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करते रहे हैं।

ऐसे माहौल में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का नया फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नोएडा और यीडा से ज्यादा मुआवजा

नई व्यवस्था का एक बड़ा पहलू यह भी है कि 6415 रुपये प्रति वर्गमीटर की नई मुआवजा दर पड़ोसी नोएडा और यमुना प्राधिकरण की तुलना में अधिक है। इससे ग्रेटर नोएडा ने किसानों के लिए जमीन के बदले मुआवजे के मामले में एक मजबूत पैकेज सामने रखा है।

तेजी से बढ़ते औद्योगिक और शहरी क्षेत्र में भूमि की जरूरत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में किसानों का भरोसा जीतना प्राधिकरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।

रवि कुमार एनजी की पहल से आया फैसला

मुख्य कार्यपालक अधिकारी रवि कुमार एनजी की पहल पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने वर्षों से लंबित मुआवजा दर बढ़ाने के प्रस्ताव को बाई सर्कुलर के जरिए मंजूरी दी। इसके साथ ही 6 फीसदी भूखंड की व्यवस्था को जमीन क्रय की प्रक्रिया से जोड़ने का फैसला भी किया गया। प्राधिकरण की कोशिश है कि जमीन देने वाले किसान को भविष्य में अपने अधिकार के लिए लंबी प्रक्रिया और अनिश्चितता से न गुजरना पड़े।

प्राधिकरण: किसान सिर्फ जमीन देने वाला नहीं

अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील कुमार सिंह ने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को केवल भूमि का मूल्य देना नहीं है, बल्कि उन्हें ग्रेटर नोएडा के विकास और भविष्य की आर्थिक समृद्धि में सहभागी बनाना है।

यह बयान नई व्यवस्था के पीछे प्राधिकरण की सोच को स्पष्ट करता है।

मुआवजा बढ़ाकर किसानों को तत्काल आर्थिक लाभ दिया गया है, जबकि 6 फीसदी विकसित भूखंड का विकल्प उन्हें भविष्य की संपत्ति और शहरी विकास से जोड़ने का प्रयास है।

अब असली लड़ाई अमल की होगी

फैसला बड़ा है, लेकिन किसानों की नजर अब इसके अमल पर होगी।

किसानों के लिए सबसे अहम सवाल यह होगा कि 6 फीसदी भूखंड का आरक्षण पत्र जमीन क्रय के समय वास्तव में कितनी तेजी से जारी होता है और उसके बाद भूखंड का आवंटन कितनी समयबद्ध तरीके से किया जाता है।

क्योंकि किसानों के पुराने अनुभव में सबसे बड़ी समस्या घोषणाओं के बाद उनके क्रियान्वयन की रही है।

यदि नई व्यवस्था पूरी पारदर्शिता के साथ लागू होती है और किसानों को समय पर भूखंड मिलते हैं तो यह फैसला प्राधिकरण और किसानों के बीच विश्वास बहाली का मजबूत आधार बन सकता है।

मुआवजा बढ़ा, अब भरोसा बढ़ाने की बारी

ग्रेटर नोएडा के विकास की नींव किसानों की जमीन पर खड़ी हुई है। किसानों ने अपनी जमीन देकर शहर के विस्तार, औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अब प्राधिकरण ने 12 वर्षों से अटकी मुआवजा दर में 55.5 फीसदी की बढ़ोतरी कर किसानों को बड़ा आर्थिक लाभ देने का फैसला किया है।

इसके साथ 6 फीसदी विकसित भूखंड का विकल्प और जमीन लेते समय ही आरक्षण पत्र जारी करने की व्यवस्था इस फैसले को और महत्वपूर्ण बनाती है।

यह कदम यदि जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू होता है तो आने वाले समय में इसका असर सिर्फ मुआवजा नीति पर नहीं, बल्कि प्राधिकरण और किसानों के रिश्तों पर भी दिखाई दे सकता है।

फैसले की सबसे बड़ी बातें

4125 रुपये — पुरानी मुआवजा दर

6415 रुपये — नई मुआवजा दर

2290 रुपये — प्रति वर्गमीटर सीधी बढ़ोतरी

55.5 फीसदी — कुल बढ़ोतरी

5725 रुपये — 6 फीसदी विकसित भूखंड लेने वाले किसानों के लिए मुआवजा दर

6 फीसदी — विकसित आवासीय भूखंड का विकल्प

जमीन खरीद के समय — आरक्षण पत्र जारी करने की व्यवस्था

अब किसान पूछेंगे—भूखंड कब मिलेगा?

मुआवजा दर बढ़ने से किसानों को निश्चित रूप से राहत मिली है, लेकिन वर्षों से भूखंड का इंतजार कर रहे किसानों के लिए असली खुशी उस दिन होगी जब आरक्षण पत्र के बाद उन्हें वास्तविक विकसित भूखंड भी मिल जाएगा।

इसलिए प्राधिकरण के इस फैसले के बाद अब किसानों की नजर सिर्फ 6415 रुपये पर नहीं होगी।

उनकी नजर होगी उस 6 फीसदी भूखंड पर, जिसका आरक्षण पत्र अब जमीन देने के साथ ही मिलने वाला है।

यही व्यवस्था आने वाले समय में तय करेगी कि यह फैसला महज एक बड़ी घोषणा बनकर रह जाता है या वास्तव में किसानों और प्राधिकरण के बीच टूटे भरोसे को जोड़ने वाला ऐतिहासिक मोड़ साबित होता है।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
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