Thursday, August 6, 2026
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₹4700 करोड़ का लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सवालों के घेरे में, ‘पंखे से मरम्मत’ पर अखिलेश यादव का भाजपा पर तीखा हमला

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर विकास बनाम बदहाली की बहस तेज हो गई है। प्रदेश के सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उद्घाटन के कुछ ही समय बाद मरम्मत की तस्वीरों को लेकर विवादों में आ गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो का हवाला देते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता, निर्माण कार्य और मरम्मत के तौर-तरीकों पर सवाल उठाते हुए इसे भाजपा सरकार के विकास मॉडल की वास्तविक तस्वीर बताया।

करीब 4700 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे को प्रदेश की बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा था। दावा किया गया था कि इससे लखनऊ और कानपुर के बीच की दूरी और यात्रा का समय दोनों में भारी कमी आएगी। लेकिन उद्घाटन के कुछ ही सप्ताह बाद सड़क की मरम्मत किए जाने और उस दौरान मरम्मत वाले हिस्से को सुखाने के लिए पंखों का इस्तेमाल किए जाने की तस्वीरें सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।


‘दो-तीन हफ्ते में दम उखड़ गया एक्सप्रेसवे का’

अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि जिस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन अभी कुछ ही दिन पहले हुआ हो और जिसकी हालत दो-तीन सप्ताह के भीतर ही खराब होने लगे, उस पर आम जनता आखिर कैसे भरोसा करेगी? उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई सड़क यदि शुरुआती दिनों में ही मरम्मत मांगने लगे तो यह गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “अब सवाल यह है कि जिस सड़क की शुरुआत ही मरम्मत से हो रही हो, उस पर चलने का जोखिम कौन उठाएगा?”

उनका कहना था कि जनता के टैक्स के पैसे से बने ऐसे प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है और सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।


‘पंखे से सड़क सुखाना’ बना राजनीतिक मुद्दा

मरम्मत के दौरान सड़क की सतह को जल्दी सुखाने के लिए लगाए गए बड़े-बड़े पंखों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं। इन्हीं तस्वीरों को साझा करते हुए अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर व्यंग्य करते हुए लिखा कि यह “भाजपाई तरक्की की नई हवा” है।

उन्होंने कहा कि दुनिया आधुनिक तकनीक से सड़क निर्माण और रखरखाव कर रही है, जबकि उत्तर प्रदेश में करोड़ों रुपये की परियोजना को पंखों के सहारे ठीक किया जा रहा है। उनके अनुसार यह दृश्य सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर साफ दिखाता है।


‘अटल प्रोग्रेस-वे’ पर भी उठाए सवाल

अपने बयान में अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार की अन्य परियोजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि अब यह भी देखना होगा कि प्रस्तावित “अटल प्रोग्रेस-वे” केवल सरकारी घोषणाओं तक सीमित रहेगा या वास्तव में धरातल पर भी दिखाई देगा।

उन्होंने कहा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि परियोजना कागजों में पूरी दिखाकर उसका लाभ पहले ही बांट लिया गया हो। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में विकास कार्यों की गुणवत्ता लगातार सवालों के घेरे में रही है।

अखिलेश ने कहा कि प्रदेश में बनने वाले कई बड़े निर्माण कार्य समय से पहले ही टूटने, धंसने या खराब होने की खबरें सामने आती रहती हैं और यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।


भाजपा सरकार के विकास मॉडल पर विपक्ष का हमला

समाजवादी पार्टी लगातार भाजपा सरकार पर निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार और गुणवत्ता से समझौता करने का आरोप लगाती रही है। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का मामला सामने आने के बाद विपक्ष को सरकार पर हमला करने का एक और बड़ा मुद्दा मिल गया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए इस तरह के विकास कार्य अब केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक बहस का भी केंद्र बनते जा रहे हैं। विपक्ष इसे सरकार की विफलता बता रहा है, जबकि भाजपा इसे सामान्य तकनीकी प्रक्रिया बताकर बचाव कर सकती है।


प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है एक्सप्रेसवे

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में गिना जाता है। लगभग 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का उद्देश्य प्रदेश के दो सबसे बड़े औद्योगिक और प्रशासनिक शहरों को तेज और सुरक्षित संपर्क देना है।

इस परियोजना पर करीब 4700 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। एक्सप्रेसवे का लगभग 13 से 18 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड बनाया गया है ताकि शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक की समस्या कम हो सके और यात्रा अधिक सुगम बने।

सरकार का दावा है कि इस परियोजना से दोनों शहरों के बीच औद्योगिक गतिविधियों, निवेश, रोजगार और व्यापार को नई गति मिलेगी।


2-3 घंटे का सफर अब 35-45 मिनट में

इस एक्सप्रेसवे के चालू होने से पहले लखनऊ से कानपुर तक पहुंचने में सामान्य दिनों में दो से तीन घंटे तक लग जाते थे। ट्रैफिक जाम और शहरों के भीतर वाहनों की भीड़ के कारण यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ती थी।

एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद यह दूरी अब 35 से 45 मिनट में तय की जा सकती है। कारों के लिए अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है, जबकि बस और ट्रकों जैसे भारी वाहनों के लिए 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड तय की गई है।

यात्रा समय में आई इस कमी को सरकार अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करती रही है।


गुणवत्ता पर उठे सवाल, जवाब का इंतजार

हालांकि सड़क निर्माण विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नई सड़क पर शुरुआती चरण में छोटी-मोटी तकनीकी मरम्मत असामान्य नहीं होती। कई बार तापमान, भारी वर्षा, यातायात का दबाव या निर्माण के दौरान सामने आए तकनीकी कारणों से सुधार कार्य करने पड़ते हैं।

लेकिन इस मामले में विवाद इसलिए बढ़ गया क्योंकि मरम्मत का तरीका और उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। विपक्ष इसे निर्माण गुणवत्ता से जोड़कर देख रहा है, जबकि अब सभी की नजर सरकार और संबंधित एजेंसियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर है।


राजनीति से आगे जनता की चिंता

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल आम जनता की सुरक्षा और सरकारी परियोजनाओं की गुणवत्ता का है। करोड़ों रुपये की लागत से बने एक्सप्रेसवे से लोगों को सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक यात्रा की उम्मीद है। यदि निर्माण के शुरुआती दौर में ही मरम्मत की नौबत आती है तो स्वाभाविक रूप से परियोजना की गुणवत्ता पर प्रश्न उठेंगे।

आने वाले दिनों में सरकार यदि इस पूरे मामले पर विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक करती है तो स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे विकास, गुणवत्ता और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप—तीनों के केंद्र में आ चुका है।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
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