Thursday, August 13, 2026
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कर्नाटक कांग्रेस में नहीं थम रही कलह: CM बदलने के बाद भी कैबिनेट पर बवाल, नाराज विधायकों को मनाने में जुटा आलाकमान

“डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद कैबिनेट विस्तार से बढ़ा असंतोष, सुरजेवाला और पार्टी नेतृत्व ने शुरू किया डैमेज कंट्रोल”

बेंगलुरु। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के भीतर जारी सियासी उठापटक थमने का नाम नहीं ले रही है। लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद को लेकर चली रस्साकशी के बाद आखिरकार पार्टी नेतृत्व ने सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार को राज्य की कमान सौंप दी, लेकिन नेतृत्व परिवर्तन से जिस स्थिरता की उम्मीद की जा रही थी, वह फिलहाल दिखाई नहीं दे रही है। नई सरकार के पहले कैबिनेट विस्तार के बाद मंत्री पद से वंचित कई विधायक खुलकर नाराजगी जता रहे हैं, जिससे कांग्रेस नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

स्थिति को संभालने के लिए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला और प्रदेश नेतृत्व लगातार असंतुष्ट नेताओं से मुलाकात कर उन्हें मनाने में जुटे हैं। पार्टी को आशंका है कि यदि समय रहते असंतोष दूर नहीं किया गया तो इसका असर सरकार की कार्यशैली और संगठन दोनों पर पड़ सकता है।

कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी नाराजगी

सोमवार को हुए कैबिनेट विस्तार में 19 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। हालांकि कई वरिष्ठ और प्रभावशाली विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। इसके बाद विभिन्न क्षेत्रों से विरोध की आवाजें उठने लगीं। कई विधायकों के समर्थकों ने खुलकर नाराजगी जाहिर की, जबकि कुछ नेताओं ने पार्टी नेतृत्व के फैसले पर सवाल भी उठाए।

राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे नेताओं और उनके समर्थकों को निराशा हाथ लगी है। यही वजह है कि कैबिनेट विस्तार के तुरंत बाद कांग्रेस नेतृत्व को डैमेज कंट्रोल की रणनीति अपनानी पड़ी।

शिवकुमार और सुरजेवाला ने संभाला मोर्चा

बढ़ते असंतोष के बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने बुधवार को कई असंतुष्ट विधायकों से अलग-अलग मुलाकात की। दोनों नेताओं ने नाराज विधायकों को भरोसा दिलाया कि पार्टी उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं करेगी और भविष्य में उन्हें उचित जिम्मेदारी दी जाएगी।

इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद और कई वरिष्ठ मंत्रियों को भी अलग-अलग नेताओं से संपर्क कर माहौल शांत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। पार्टी की कोशिश है कि किसी भी विधायक की नाराजगी सार्वजनिक विवाद का रूप न ले।

असंतुष्ट विधायकों की बैठक की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट में जगह नहीं पाने वाले कई विधायक आपस में बैठक करने की तैयारी कर रहे हैं। ये विधायक समान सोच वाले नेताओं के साथ आगे की रणनीति तय कर सकते हैं।

हालांकि पार्टी नेतृत्व लगातार संवाद बनाए हुए है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इन नेताओं की नाराजगी लंबी चली तो सरकार पर दबाव बढ़ सकता है।

यशवंत पाटिल ने वापस लिया इस्तीफा

कांग्रेस नेतृत्व की पहल का असर भी दिखाई देने लगा है। इंडिया गठबंधन के विधायक यशवंतरायगौड़ा वी. पाटिल ने विधायक पद से दिया गया अपना इस्तीफा वापस ले लिया है।

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कुछ वरिष्ठ मंत्रियों ने उनसे व्यक्तिगत बातचीत की, जिसके बाद उन्होंने विधानसभा सचिव को पत्र लिखकर अपना इस्तीफा वापस लेने का फैसला किया। इसे कांग्रेस नेतृत्व के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है।

शिवकुमार की दो टूक चेतावनी

कैबिनेट में जगह नहीं मिलने से नाराज कुछ विधायकों द्वारा इस्तीफे की धमकी दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सख्त संदेश भी दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि कोई विधायक इस्तीफा देना चाहता है तो पार्टी कुछ ही मिनटों में उसका इस्तीफा स्वीकार कर सकती है।

साथ ही उन्होंने नाराज नेताओं से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि राज्य सरकार के विभिन्न बोर्डों और निगमों में जल्द ही नियुक्तियां की जाएंगी, जहां योग्य नेताओं को जिम्मेदारी दी जाएगी।

मुख्यमंत्री का यह बयान जहां अनुशासन का संदेश माना जा रहा है, वहीं इसे असंतुष्ट नेताओं के लिए चेतावनी के रूप में भी देखा जा रहा है।

एस.आर. श्रीनिवास की नाराजगी बनी चर्चा का विषय

गुब्बी से विधायक एस.आर. श्रीनिवास उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने मंत्री नहीं बनाए जाने पर खुलकर नाराजगी जाहिर की थी। हालांकि बुधवार को मुख्यमंत्री शिवकुमार से मुलाकात के बाद उनके तेवर कुछ नरम दिखाई दिए।

दिलचस्प बात यह रही कि बातचीत के बाद भी उन्होंने अपनी पूर्व पार्टी जनता दल (सेकुलर) और उसके नेता एच.डी. कुमारस्वामी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि कुमारस्वामी ने अपनी सरकार में उन्हें मंत्री बनाया था।

उनका यह बयान कांग्रेस के लिए असहज स्थिति पैदा करने वाला माना जा रहा है।

वरिष्ठ नेताओं के घर पहुंचा कांग्रेस नेतृत्व

पार्टी नेतृत्व ने केवल नाराज विधायकों तक ही खुद को सीमित नहीं रखा। वरिष्ठ विधायक टी.बी. जयचंद्र, बेंगलुरु के विधायक एम. कृष्णप्पा और उनके बेटे प्रिय कृष्णा से भी मुलाकात कर उन्हें मनाने की कोशिश की गई।

शाम के समय मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और रणदीप सुरजेवाला स्वयं कृष्णप्पा के आवास पहुंचे और विस्तृत चर्चा की।

उधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने भी वरिष्ठ विधायक एच.के. पाटिल, पूर्व मंत्री दिनेश गुंडू राव और टी.बी. जयचंद्र के घर जाकर बातचीत की।

मुलाकात के बाद जयचंद्र ने कहा कि पार्टी में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन उनका समाधान संगठन के भीतर ही होना चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि मुख्यमंत्री और आलाकमान इस मामले का उचित समाधान निकालेंगे।

सिद्धारमैया की नाराजगी भी बनी चर्चा

राजनीतिक हलकों में इस बात की भी चर्चा है कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया स्वयं कैबिनेट विस्तार से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं।

सूत्रों के अनुसार, उन्होंने जिन नेताओं के नाम मंत्री पद के लिए सुझाए थे, उनमें से कई को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। इससे उनके समर्थकों में भी असंतोष देखा जा रहा है।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला जल्द ही सिद्धारमैया से मुलाकात कर स्थिति पर चर्चा कर सकते हैं।

समुदाय आधारित प्रतिनिधित्व पर भी उठे सवाल

जानकारी के अनुसार, सिद्धारमैया विशेष रूप से इस बात से नाराज बताए जा रहे हैं कि कुरुबा समुदाय के विधायक बसवराज शिवन्ननवर को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया।

वहीं इसी समुदाय से आने वाली विधान परिषद सदस्य गायत्री शांतेगौड़ा का नाम अंतिम सूची में होने के बावजूद आखिरी समय पर उनका शपथ ग्रहण टाल दिया गया।

इसके अलावा विधान परिषद सदस्य उमाश्री को मंत्री बनाने के बजाय उन्हें विधान परिषद के उपसभापति पद का उम्मीदवार बनाए जाने से भी सिद्धारमैया खफा बताए जा रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि समुदायों के प्रतिनिधित्व का मुद्दा लंबा खिंचता है तो इसका असर कांग्रेस के सामाजिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।

एक मंत्री पद अब भी खाली

कर्नाटक मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री सहित कुल 34 मंत्री बनाए जा सकते हैं। सोमवार के कैबिनेट विस्तार के बाद भी एक मंत्री पद अभी खाली है।

ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि पार्टी असंतुष्ट नेताओं को साधने के लिए भविष्य में इस रिक्त पद का इस्तेमाल कर सकती है। हालांकि अंतिम फैसला कांग्रेस आलाकमान के स्तर पर ही लिया जाएगा।

सरकार के सामने बड़ी चुनौती

मुख्यमंत्री बदलने के बाद कांग्रेस नेतृत्व उम्मीद कर रहा था कि सरकार के भीतर स्थिरता आएगी और संगठन तथा सरकार दोनों एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे। लेकिन कैबिनेट विस्तार के बाद उभरे असंतोष ने यह साफ कर दिया है कि पार्टी के सामने चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है।

फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व लगातार संवाद, बैठकों और राजनीतिक संतुलन के जरिए असंतोष कम करने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि पार्टी इस आंतरिक संकट से कितनी जल्दी उबर पाती है या फिर यह नाराजगी आगे चलकर सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक संकट बन जाती है।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
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