रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित धांधली और अनियमितताओं का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों के बीच अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन गिरफ्तारियों के साथ ही इस मामले में अब तक कुल 19 लोगों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।
सीआईडी की जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए आरोपी केवल परीक्षा में गलत तरीके से सफल होने तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे अन्य अभ्यर्थियों को भी नकल, फर्जीवाड़ा और अवैध साधनों के जरिए परीक्षा पास कराने का नेटवर्क चला रहे थे। इस खुलासे ने पूरे भर्ती तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दूसरी ओर, राजधानी रांची में छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और परीक्षा घोटाले की सीबीआई जांच की मांग पर अडिग हैं।
रांची और लखनऊ से हुई गिरफ्तारी, एजेंट नेटवर्क का खुलासा
सीआईडी ने रांची और उत्तर प्रदेश के लखनऊ पुलिस के सहयोग से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में मनोज कुमार, रोशन केरकेट्टा, उमाकांत उरांव, रक्षक सिंह और धर्मेंद्र कुमार शामिल हैं।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, ये सभी 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में कथित रूप से गलत तरीके और अनुचित साधनों का इस्तेमाल कर सफल हुए थे। इतना ही नहीं, जांच एजेंसियों का दावा है कि ये लोग अन्य अभ्यर्थियों को भी परीक्षा में अनुचित लाभ दिलाने के लिए एजेंट के रूप में काम करते थे।
सीआईडी अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ मिले डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच जारी है। एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसमें और कौन-कौन लोग शामिल थे।
अब तक 19 गिरफ्तारियां, जांच का दायरा लगातार बढ़ा
परीक्षा धांधली मामले में सीआईडी अब तक कुल 19 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, जांच में केवल अभ्यर्थियों की भूमिका ही नहीं बल्कि ऐसे लोगों की भी जांच की जा रही है जिन्होंने कथित तौर पर परीक्षा प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया या गलत तरीके से चयन कराने में मदद की।
जांच अधिकारी इस बात का भी पता लगाने में जुटे हैं कि कहीं यह नेटवर्क कई वर्षों से तो सक्रिय नहीं था और क्या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी इसी तरह की अनियमितताएं हुई थीं।
सड़कों पर उतरे छात्र, भर्ती प्रक्रिया पर उठाए सवाल
जेपीएससी परीक्षा में कथित धांधली के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी रांची में हजारों अभ्यर्थी कई दिनों से धरना और प्रदर्शन कर रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि वर्षों की मेहनत के बाद यदि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं होगी तो योग्य उम्मीदवारों के भविष्य के साथ अन्याय होगा।
प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि राज्य की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन दोषियों के खिलाफ समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होती।
इसी कारण छात्र अब केवल JPSC ही नहीं बल्कि अन्य भर्ती परीक्षाओं की भी निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
CBI जांच और भर्ती एजेंसियों में सुधार की मांग
आंदोलन कर रहे छात्रों की सबसे बड़ी मांग इस पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराने की है।
छात्रों का कहना है कि राज्य स्तर की जांच एजेंसियों के अलावा एक स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच कराए जाने से पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित होगी।
इसके अलावा छात्र भर्ती एजेंसियों में व्यापक सुधार, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, डिजिटल निगरानी व्यवस्था मजबूत करने और भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की भी मांग कर रहे हैं।
उनका कहना है कि जब तक व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।
सरकार से बातचीत को तैयार छात्र, रखी अहम शर्त
लगातार आंदोलन के बीच छात्रों ने सरकार से बातचीत के संकेत दिए हैं।
हालांकि प्रदर्शनकारी छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी बैठक की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी ताकि बातचीत में हुई हर बात सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा बन सके।
छात्र नेताओं का कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली बातचीत पूरी तरह रिकॉर्ड हो।
उनका कहना है कि केवल आश्वासन नहीं बल्कि लिखित और समयबद्ध कार्रवाई चाहिए।
भूख हड़ताल में शामिल हुए नए प्रदर्शनकारी
जेपीएससी और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में चल रही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी लगातार मजबूत होती जा रही है।
हाल ही में पांच और प्रदर्शनकारी इस भूख हड़ताल में शामिल हुए हैं, जिसके बाद आंदोलन का दायरा और व्यापक हो गया है।
प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना है कि यह संघर्ष केवल एक परीक्षा का नहीं बल्कि पूरे युवावर्ग के भविष्य का सवाल है।
उनका मानना है कि यदि अभी कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाली पीढ़ियों का भरोसा भी प्रतियोगी परीक्षाओं से उठ जाएगा।
‘यह केवल झारखंड का नहीं, पूरे देश का मुद्दा’
आंदोलन कर रहे छात्रों ने कहा कि पेपर लीक और भर्ती घोटाले केवल झारखंड तक सीमित नहीं हैं।
देश के कई राज्यों में समय-समय पर प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने और भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के मामले सामने आते रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि लाखों युवा वर्षों तक कठिन मेहनत करते हैं, लेकिन कुछ लोगों की मिलीभगत और भ्रष्टाचार उनकी मेहनत पर पानी फेर देता है।
उनका कहना है कि सरकारों को अब इस समस्या को राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से लेना होगा।
सरकार का दावा- दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा
सरकार की ओर से कहा गया है कि युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से लिया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि जांच एजेंसियां दिन-रात इस मामले की जांच कर रही हैं और दोषियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है।
सरकारी पक्ष का दावा है कि उद्देश्य केवल गिरफ्तारी करना नहीं बल्कि भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
युवाओं का भरोसा लौटाना सबसे बड़ी चुनौती
जेपीएससी परीक्षा धांधली का मामला अब केवल एक भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है। यह पूरे भर्ती तंत्र की पारदर्शिता, प्रशासनिक जवाबदेही और युवाओं के भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।
सीआईडी की लगातार कार्रवाई से जांच आगे बढ़ रही है, लेकिन छात्रों का कहना है कि केवल गिरफ्तारियां पर्याप्त नहीं हैं। जब तक पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश नहीं होगा, दोषियों को सजा नहीं मिलेगी और भर्ती व्यवस्था में ठोस सुधार नहीं होंगे, तब तक युवाओं का भरोसा पूरी तरह बहाल नहीं हो पाएगा।
फिलहाल पूरे राज्य की नजर सीआईडी की अगली कार्रवाई, सरकार और छात्रों के बीच संभावित वार्ता तथा इस बहुचर्चित परीक्षा घोटाले की आगे की जांच पर टिकी हुई है।














