“एक छत के नीचे सभी सुविधाएं’ का सपना अधूरा? मुख्यमंत्री के वादे और ज़मीनी हकीकत के बीच बड़ा सवाल”
नोएडा: 27 जून 2026 को सेक्टर-96 स्थित नोएडा प्राधिकरण के नए मुख्य प्रशासनिक भवन का उद्घाटन पूरे सरकारी वैभव के साथ हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे केवल एक भवन नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुधार की नई शुरुआत बताया। मंच से कहा गया कि अब किसानों, भू-स्वामियों, उद्यमियों, आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों और आम नागरिकों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। दावा था कि “एक छत के नीचे सभी सुविधाएं” उपलब्ध होंगी और अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन एवं पारदर्शी व्यवस्था के तहत संचालित होंगी।
लेकिन उद्घाटन के कुछ ही सप्ताह बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह सपना धरातल पर उतरा भी है, या फिर करोड़ों रुपये खर्च कर केवल एक भव्य भवन खड़ा कर दिया गया?
दावा था ‘वन स्टॉप सॉल्यूशन’, हकीकत में कई दफ्तरों की दौड़
नए मुख्यालय के उद्घाटन के समय यह संदेश दिया गया था कि नोएडा प्राधिकरण की सेवाओं का केंद्रीकरण होगा और नागरिकों को एक ही परिसर में समाधान मिलेगा। लेकिन वर्तमान व्यवस्था इस दावे से मेल नहीं खाती।
आज भी कई महत्वपूर्ण विभाग पुराने कार्यालयों से संचालित हो रहे हैं—
- ऑनलाइन विभाग — सेक्टर-6
- रिकॉर्ड रूम — सेक्टर-6
- सिविल इंजीनियरिंग की विभिन्न शाखाएं — सेक्टर-6, सेक्टर-19 एवं सेक्टर-20
- जेएचआर विभाग — सेक्टर-19
- जल एवं सीवर विभाग — सेक्टर-5 और सेक्टर-37
- विद्युत विभाग — सेक्टर-39
- स्वास्थ्य विभाग — सेक्टर-94
- इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर — सेक्टर-94
- मुख्य प्रशासनिक भवन — सेक्टर-96
ऐसी स्थिति में यदि किसी नागरिक का कार्य एक से अधिक विभागों से जुड़ा हो, तो उसे आज भी अलग-अलग सेक्टरों में स्थित कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
क्या ‘एक छत’ का दावा समय से पहले कर दिया गया था?
यही सबसे बड़ा सवाल बनकर सामने आ रहा है।
यदि अधिकांश विभागों का स्थानांतरण अभी पूरा नहीं हुआ था, तो क्या उद्घाटन के दौरान “एक छत के नीचे सभी सुविधाएं” की तस्वीर वास्तविक स्थिति से पहले प्रस्तुत कर दी गई? या फिर यह एक ऐसी प्रक्रिया थी जिसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाना था, लेकिन इसकी स्पष्ट जानकारी जनता को नहीं दी गई?
जनता अब जवाब चाहती है कि यदि व्यवस्था अभी अधूरी थी, तो इसे पूरी तरह तैयार बताने की आवश्यकता क्यों महसूस हुई।
390 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजना, लेकिन सुविधा अधूरी
यह भवन प्रदेश की सबसे आधुनिक प्रशासनिक इमारतों में गिना जाता है।
परियोजना से जुड़े उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार—
- मूल स्वीकृत लागत लगभग 478 करोड़ रुपये
- पुनरीक्षित लागत लगभग 390.06 करोड़ रुपये
- सिविल कार्यों पर 266 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान
इसके अलावा भवन में आधुनिक जनसुनवाई केंद्र, विशाल बोर्ड रूम, ऑडिटोरियम, कॉन्फ्रेंस हॉल, अत्याधुनिक कार्यालय, बेसमेंट पार्किंग और हाईस्पीड लिफ्ट जैसी अनेक सुविधाएं विकसित की गईं।
लेकिन नागरिक पूछ रहे हैं कि यदि विभाग ही अलग-अलग स्थानों पर बने रहें, तो इस आधुनिक परिसर का सबसे बड़ा उद्देश्य आखिर क्या था?
मुख्यमंत्री ने ऑनलाइन सेवाओं पर दिया था जोर, लेकिन ऑनलाइन विभाग ही बाहर
उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन को डिजिटल बनाने और सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया था।
विडंबना यह है कि आज भी ऑनलाइन विभाग सेक्टर-96 के मुख्यालय में नहीं पहुंचा है। वह अभी भी सेक्टर-6 स्थित इंदिरा गांधी कला केंद्र से संचालित हो रहा है।
इसका सीधा असर आम नागरिक पर पड़ रहा है। कई मामलों में आवेदन एक स्थान पर, रिकॉर्ड दूसरे स्थान पर और संबंधित अधिकारी तीसरे स्थान पर मिलते हैं।
डिजिटल प्रशासन की परिकल्पना तब तक अधूरी प्रतीत होती है जब तक उससे जुड़े प्रमुख विभाग ही मुख्यालय का हिस्सा नहीं बनते।
ग्राम विकास संगठन ने उठाई आवाज
इसी मुद्दे को लेकर सोमवार को ग्राम विकास संगठन ने नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपा।
संगठन की प्रमुख मांग थी कि ऑनलाइन विभाग को तत्काल सेक्टर-96 स्थित मुख्य प्रशासनिक भवन में स्थानांतरित किया जाए ताकि नागरिकों को अनावश्यक दौड़-भाग से राहत मिल सके।
संगठन का तर्क है कि यदि मुख्यालय बदल चुका है, तो उससे जुड़े प्रमुख विभागों का भी शीघ्र स्थानांतरण होना चाहिए।
सबसे अधिक परेशानी किसे?
इस स्थिति का सबसे अधिक असर उन लोगों पर पड़ रहा है जिनका काम कई विभागों से जुड़ा होता है।
एक किसान को भूमि संबंधी दस्तावेजों के लिए अलग कार्यालय जाना पड़ सकता है। यदि तकनीकी रिपोर्ट चाहिए तो दूसरे कार्यालय जाना होगा। बिजली, जल, सीवर या इंजीनियरिंग से जुड़ा मामला हो तो तीसरे और चौथे कार्यालय तक जाना पड़ सकता है।
ऐसे में “सिंगल विंडो सिस्टम” की अवधारणा फिलहाल व्यवहारिक रूप से पूरी होती दिखाई नहीं देती।
दस वर्षों की परियोजना, लेकिन बदलाव अधूरा
यह परियोजना 5 जनवरी 2016 को शुरू हुई थी।
करीब दस वर्षों के लंबे इंतजार और सैकड़ों करोड़ रुपये के निवेश के बाद जब नया मुख्यालय तैयार हुआ, तो उम्मीद थी कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव दिखाई देगा।
भवन तो तैयार हो गया, लेकिन यदि विभागों का एकीकरण पूरा नहीं हुआ, तो प्रशासनिक सुधार का उद्देश्य अभी भी अधूरा माना जाएगा।
क्या जनता को मिला निवेश का पूरा लाभ?
सवाल केवल भवन निर्माण का नहीं है।
सवाल यह है कि जिस उद्देश्य से सार्वजनिक धन खर्च किया गया, क्या उसका लाभ आम नागरिक तक पहुंचा?
यदि आज भी नागरिकों को पहले जैसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है, तो स्वाभाविक रूप से परियोजना की प्रभावशीलता पर प्रश्न उठेंगे।
भव्य भवन अपने आप में उपलब्धि हो सकता है, लेकिन किसी भी प्रशासनिक परियोजना की सफलता का वास्तविक पैमाना नागरिक सुविधा होती है।
अब जवाबदेही तय करने का समय
इतनी बड़ी परियोजना के बाद जनता यह जानना चाहती है—
- सभी विभागों के स्थानांतरण की समय-सीमा क्या है?
- कौन-कौन से विभाग अभी स्थानांतरित होने बाकी हैं?
- क्या इसके लिए कोई आधिकारिक रोडमैप तैयार किया गया है?
- यदि देरी हुई है तो उसके कारण क्या हैं?
- और सबसे महत्वपूर्ण—जनता को एक ही स्थान पर सेवाएं कब तक मिलेंगी?
इन सवालों का स्पष्ट उत्तर केवल नोएडा प्राधिकरण ही दे सकता है।
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सबसे बड़ा सवाल
सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च कर आधुनिक भवन तैयार करना निश्चित रूप से बड़ी उपलब्धि है, लेकिन किसी भी परियोजना का अंतिम मूल्यांकन उसके उद्देश्य की पूर्ति से होता है।
यदि नागरिक आज भी अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, तो “एक छत के नीचे सभी सुविधाएं” का सपना अभी अधूरा दिखाई देता है।
अब जरूरत केवल भवन के उद्घाटन की नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने की है जिसका वादा जनता से किया गया था।
जब तक सभी प्रमुख विभाग एकीकृत होकर एक ही परिसर से कार्य नहीं करेंगे और नागरिकों को वास्तविक रूप से एक स्थान पर समाधान नहीं मिलेगा, तब तक यह परियोजना अपने घोषित उद्देश्य को पूरी तरह हासिल करती हुई नजर नहीं आएगी।
यदि लगभग 390 करोड़ रुपये (मूल स्वीकृति 478 करोड़ रुपये) की लागत से बने मुख्यालय के बाद भी नोएडा का नागरिक एक आवेदन के लिए कई कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर है, तो क्या ‘एकीकृत प्रशासन’ का सपना अभी अधूरा है? अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी नोएडा प्राधिकरण की है कि वह अपने घोषित लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतारकर जनता का भरोसा मजबूत करे।














