ईरान-इजराइल टकराव ने बढ़ाई वैश्विक बेचैनी
मध्य पूर्व में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ता तनाव एक बार फिर दुनिया की चिंता का कारण बन गया है। दोनों देशों के बीच बयानबाजी, सैन्य गतिविधियों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ते विवाद ने क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।
इजराइल के निशाने पर ईरान के परमाणु केंद्र?
ईरान के फोर्दो, नतांज, इस्फहान, खोंदाब और बुशहर स्थित परमाणु ठिकाने लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय निगरानी और विवाद का केंद्र रहे हैं। इजराइल का मानना है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम उसके राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इसी वजह से इन ठिकानों को संभावित सैन्य कार्रवाई के लक्ष्य के रूप में देखा जा रहा है।
नेतन्याहू की चेतावनी से बढ़ी अटकलें
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हालिया घटनाक्रम के बाद कड़ा संदेश देते हुए कहा कि जो भी इजराइल पर हमला करेगा, उसे उसका जवाब मिलेगा। उनके बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि इजराइल भविष्य में ईरान के परमाणु ढांचे को निशाना बना सकता है।
परमाणु वैज्ञानिकों पर हमलों के आरोप
ईरान का आरोप है कि पिछले वर्षों में उसके कई परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या की गई, जिनके पीछे इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद का हाथ था। हालांकि इजराइल ने इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इन घटनाओं ने दोनों देशों के बीच अविश्वास और टकराव को और गहरा किया है।
परमाणु ठिकानों को तबाह करने का इजराइल का इतिहास
इजराइल पहले भी अपने विरोधी देशों के परमाणु कार्यक्रमों को निशाना बना चुका है। 1981 में इराक के ओसिराक परमाणु रिएक्टर पर हमला और 2007 में सीरिया के संदिग्ध परमाणु ठिकाने को नष्ट करना इसके प्रमुख उदाहरण हैं। यही वजह है कि ईरान के परमाणु केंद्रों को लेकर भी ऐसी आशंकाएं लगातार बनी रहती हैं।
क्यों आसान नहीं होगा ईरान पर हमला?
विशेषज्ञों के अनुसार ईरान के परमाणु केंद्र इराक और सीरिया की तुलना में अधिक सुरक्षित, आधुनिक और कई मामलों में भूमिगत संरचनाओं में स्थित हैं। ऐसे में किसी भी सैन्य कार्रवाई के व्यापक और गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इससे क्षेत्रीय संघर्ष के बड़े युद्ध में बदलने का खतरा भी बढ़ सकता है।
अमेरिका की भूमिका भी अहम
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और इजराइल लंबे समय से चिंता जताते रहे हैं। वाशिंगटन लगातार यह सुनिश्चित करने की कोशिश करता रहा है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके। हालांकि इस मुद्दे पर कूटनीतिक प्रयास और प्रतिबंधों की नीति भी समानांतर रूप से चलती रही है।
क्या बढ़ रहा है परमाणु युद्ध का खतरा?
विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल परमाणु युद्ध की संभावना को लेकर कोई ठोस संकेत नहीं हैं, लेकिन यदि दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव बढ़ता है और परमाणु ठिकाने निशाने पर आते हैं, तो क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
दुनिया की नजरें मध्य पूर्व पर
ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव सिर्फ दो देशों का मामला नहीं रह गया है। ऊर्जा बाजार, वैश्विक व्यापार, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय राजनीति पर इसके प्रभाव को देखते हुए पूरी दुनिया की नजरें मध्य पूर्व के घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।














