“मुरादाबाद से राजनीतिक और वैचारिक संदेश”
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में रविवार को आयोजित गुरुकुल उद्घाटन समारोह केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यहां से राष्ट्रीय राजनीति, शिक्षा, सनातन संस्कृति और सामाजिक सौहार्द जैसे कई मुद्दों पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कल्कि धाम के प्रमुख आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, निर्दलीय सांसद पप्पू यादव, मौलाना जरजिस, असदुद्दीन ओवैसी और कथित “कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)” पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने विपक्षी नेताओं के संसद में व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर है, उसे थिएटर में बदलने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
‘राहुल गांधी संसद को थिएटर बनाना चाहते हैं’
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने संसद में विपक्ष के हालिया विरोध प्रदर्शन पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब से राहुल गांधी विपक्ष के नेता बने हैं, ऐसा प्रतीत होता है कि वे भारतीय संसद को थिएटर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि देश की संसद गंभीर बहस और जनहित के मुद्दों पर चर्चा का मंच है, न कि नाटकीय प्रदर्शन करने की जगह। उनका कहना था कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध की भी एक मर्यादा होती है। संसद की गरिमा बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि विपक्ष केवल प्रदर्शन और नाटकीयता पर ध्यान देगा तो जनता के असली मुद्दे पीछे छूट जाएंगे।
पप्पू यादव को दी रामलीला में अभिनय करने की सलाह
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने निर्दलीय सांसद पप्पू यादव पर भी व्यंग्य करते हुए कहा कि यदि उन्हें अभिनय का इतना ही शौक है तो उन्हें संसद की बजाय रामलीला में अपनी प्रतिभा दिखानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पप्पू यादव रामलीला में कालनेमि, खर-दूषण, मेघनाद या रावण जैसे पात्रों की भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन उन्हें सनातन संस्कृति और धार्मिक भावनाओं का अपमान करने से बचना चाहिए।
उनका यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि इसे विपक्षी नेताओं पर सीधा हमला माना जा रहा है।
गुरुकुल शिक्षा को बताया राष्ट्र निर्माण का आधार
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गुरुकुल का उद्घाटन था। इस दौरान आचार्य प्रमोद कृष्णम ने देशभर से आए अभिभावकों को संबोधित करते हुए आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ भारतीय परंपरागत गुरुकुल शिक्षा के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि यदि माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे स्वामी विवेकानंद, महर्षि दयानंद सरस्वती और अन्य महान राष्ट्रनिर्माताओं की तरह संस्कारित बनें, तो उन्हें गुरुकुल जैसी शिक्षा प्रणाली अपनानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि केवल डिग्री प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों में नैतिकता, संस्कार, राष्ट्रभक्ति और चरित्र निर्माण भी उतना ही आवश्यक है।
‘कॉकरोच पार्टी’ पर तीखा हमला
अपने संबोधन में आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कथित “कॉकरोच पार्टी (CJP)” का उल्लेख करते हुए उस पर भी जमकर हमला बोला।
उन्होंने कहा कि हाल ही में जो घटनाएं हुईं, उन्हें आंदोलन कहना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार यह केवल हंगामा था, जिसका लोकतांत्रिक आंदोलन से कोई संबंध नहीं था।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने विरोध करने वालों को अपने बच्चों की तरह मानते हुए क्षमा कर दिया। यह उनकी उदारता और बड़े दिल का परिचायक है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि देश की जनता ऐसे लोगों को आसानी से माफ नहीं करेगी।
मौलाना जरजिस के बयान पर जताई नाराजगी
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने मौलाना जरजिस द्वारा हिंदू देवी-देवताओं पर की गई कथित टिप्पणियों की भी कड़ी आलोचना की।
उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म के व्यक्ति को दूसरे धर्म का अपमान करने का अधिकार नहीं है। उनके अनुसार एक सच्चा मुसलमान कभी दूसरे धर्म की आस्था का मजाक नहीं उड़ाता।
उन्होंने कहा कि मौलाना जरजिस को इस्लाम की वास्तविक शिक्षाओं को समझने की जरूरत है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा कि उन्हें सद्बुद्धि मिले और वे समाज में सौहार्द का वातावरण बनाने का प्रयास करें।
ओवैसी के बयान पर भी प्रतिक्रिया
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के ‘वंदे मातरम्’ संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि देशभक्ति किसी धर्म विशेष से जुड़ी नहीं होती।
उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति सभी धर्मों का सम्मान करना सिखाती है और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने ओवैसी से भी इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
प्रधानमंत्री मोदी की सराहना
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने भगवान बुद्ध की करुणा, भगवान महावीर की अहिंसा और महात्मा गांधी के सत्य के मार्ग को अपनाते हुए अपने विरोधियों को भी क्षमा किया।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन व्यक्तिगत कटुता से ऊपर उठकर काम करना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान होती है।
राजनीतिक बयान से बढ़ सकती है सियासी गर्मी
आचार्य प्रमोद कृष्णम के इन बयानों के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म होने की संभावना है। राहुल गांधी, पप्पू यादव, ओवैसी और अन्य विपक्षी नेताओं पर उनके तीखे हमले को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।
साथ ही गुरुकुल शिक्षा, सनातन संस्कृति और धार्मिक सौहार्द पर दिए गए उनके संदेश भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष इन बयानों का किस तरह जवाब देता है और राजनीतिक बहस किस दिशा में आगे बढ़ती है।














