पेरिस: फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था को लेकर हाईस्कूल छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। शिक्षक कम होने, भीड़भरी कक्षाओं, स्कूलों की खराब स्थिति और जरूरी सुविधाओं की कमी को लेकर हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। कई शहरों में स्कूलों के गेट बंद किए गए, कूड़ेदानों में आग लगाने की घटनाएं सामने आईं और प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प भी हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार से अब तक 5,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। शुक्रवार को ही करीब 1,747 गिरफ्तारियां हुईं। प्रदर्शन के कारण सैकड़ों शिक्षण संस्थान प्रभावित हुए हैं। छात्र संगठनों ने अब 6 अक्टूबर को देशभर में बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया है।
आखिर क्यों सड़कों पर उतरे छात्र?
छात्रों का कहना है कि फ्रांस की शिक्षा व्यवस्था लंबे समय से कई समस्याओं से जूझ रही है। सबसे बड़ी शिकायत शिक्षकों की कमी को लेकर है। कई स्कूलों में शिक्षक पद खाली हैं और किसी शिक्षक के अनुपस्थित होने पर उनकी जगह वैकल्पिक शिक्षक उपलब्ध नहीं हो पाते। इसका असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
इसके अलावा कई स्कूलों में कक्षाओं में छात्रों की संख्या काफी ज्यादा है। कुछ जगह स्कूल भवनों की खराब स्थिति, पानी की समस्या और गर्मी जैसी सुविधाओं की कमी की भी शिकायतें सामने आई हैं। छात्रों का कहना है कि लंबा और तनावपूर्ण स्कूल शेड्यूल भी उनकी परेशानी बढ़ा रहा है।
कहां से शुरू हुआ आंदोलन?
इस आंदोलन की शुरुआत 17 सितंबर को पेरिस के पास Créteil के Antoine de Saint-Exupéry हाईस्कूल से हुई थी। यहां शिक्षक स्टाफ और संसाधनों की कमी को लेकर विरोध कर रहे थे। बाद में छात्र भी उनके समर्थन में आंदोलन में शामिल हो गए।
स्थानीय स्तर पर प्रशासन ने अतिरिक्त स्टाफ उपलब्ध कराने की घोषणा की, लेकिन तब तक छात्रों का आंदोलन दूसरे इलाकों में भी फैल चुका था।
गरीब इलाकों में ज्यादा दिख रहा असर
प्रदर्शन का एक बड़ा मुद्दा शैक्षणिक असमानता भी है। पेरिस के आसपास के अपेक्षाकृत गरीब इलाकों, खासकर Seine-Saint-Denis में छात्रों का आरोप है कि उन्हें राजधानी के बेहतर स्कूलों की तुलना में कम सुविधाएं मिलती हैं।
इन इलाकों के कई स्कूलों में शिक्षक पद खाली होने के साथ-साथ नर्स और सोशल वर्कर जैसी जरूरी सुविधाओं की कमी की भी शिकायत है।
सोशल मीडिया ने आंदोलन को दी तेजी
TikTok, Snapchat, Instagram और WhatsApp जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी आंदोलन के तेजी से फैलने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। प्रदर्शन, स्कूल ब्लॉक किए जाने और पुलिस कार्रवाई से जुड़े वीडियो तेजी से शेयर हो रहे हैं, जिससे आंदोलन की जानकारी कुछ ही समय में दूसरे शहरों तक पहुंच रही है।
पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल
प्रदर्शन के दौरान कुछ जगह हिंसा और आगजनी की घटनाएं हुई हैं। पुलिस पर आंसू गैस, रबर बुलेट और बल प्रयोग करने के आरोप भी लगे हैं। पुलिस के मुताबिक सैकड़ों सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं, जबकि शिक्षा मंत्रालय की ओर से भी कई शिक्षा कर्मचारियों के घायल होने की जानकारी दी गई है।
एक 16 वर्षीय छात्र की आंख में गंभीर चोट लगने की रिपोर्ट ने पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल और बढ़ा दिए हैं।
6 अक्टूबर का प्रदर्शन क्यों अहम?
अब सभी की नजर 6 अक्टूबर पर है। छात्र संगठनों ने इस दिन देशभर में बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि बड़े प्रदर्शन के दौरान स्थिति और तनावपूर्ण हो सकती है।
फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव से कुछ महीने पहले छात्र आंदोलन का इतना बड़ा रूप लेना सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती भी बन सकता है। विपक्षी दलों की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
सिर्फ छात्रों का गुस्सा नहीं, शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
फ्रांस में स्कूलों की फंडिंग, शिक्षकों की कमी और शिक्षा में असमानता की समस्या नई नहीं है। पिछले दशकों में भी छात्र आंदोलन होते रहे हैं। अब मौजूदा प्रदर्शन ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या फ्रांस की शिक्षा व्यवस्था सभी छात्रों को समान अवसर और पर्याप्त सुविधाएं दे पा रही है?
आने वाले दिनों में सरकार छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है और 6 अक्टूबर का प्रदर्शन किस दिशा में जाता है, यह पूरे मामले के लिए अहम होगा।















