वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने राजनीतिक फैसलों से ज्यादा अपनी निजी संपत्ति और कारोबारी हितों को लेकर चर्चा में हैं। दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष में जारी संघीय वित्तीय खुलासों ने यह संकेत दिया है कि ट्रंप और उनके परिवार से जुड़े कारोबार की आय में भारी बढ़ोतरी हुई है। इस खुलासे के बाद अमेरिका में हितों के टकराव (Conflict of Interest), राष्ट्रपति पद के दुरुपयोग और सरकारी नीतियों से निजी लाभ जैसे मुद्दों पर नई बहस शुरू हो गई है।
हाल ही में सार्वजनिक किए गए 927 पन्नों के वित्तीय डिस्क्लोजर में ट्रंप की कंपनियों, निवेशों और विदेशी व्यावसायिक समझौतों का विस्तृत विवरण दिया गया है। दस्तावेजों के अनुसार ट्रंप से जुड़े कारोबारी साम्राज्य की आय पिछले वर्ष की तुलना में कई गुना बढ़ी है। हालांकि व्हाइट हाउस और ट्रंप प्रशासन का कहना है कि राष्ट्रपति के निजी निवेश स्वतंत्र वित्तीय संस्थानों द्वारा संचालित किए जाते हैं और नीतिगत निर्णयों से उनका कोई सीधा संबंध नहीं है।
क्रिप्टो बना सबसे बड़ा कमाई का जरिया
एक समय रियल एस्टेट कारोबार के लिए पहचाने जाने वाले ट्रंप अब क्रिप्टोकरेंसी सेक्टर से सबसे अधिक आय अर्जित कर रहे हैं।
वित्तीय खुलासे के अनुसार ट्रंप और उनके बेटों से जुड़ी कंपनी World Liberty Financial (WLF) ने भारी कमाई दर्ज की है। रिपोर्ट के मुताबिक इस प्लेटफॉर्म से अरबों डॉलर की आय हुई है। इसके अलावा ट्रंप ब्रांड से जुड़े मीम कॉइन और डिजिटल टोकन परियोजनाओं से भी करोड़ों डॉलर की रॉयल्टी प्राप्त हुई।
डेमोक्रेटिक सांसदों और कई सरकारी नैतिकता विशेषज्ञों का कहना है कि किसी मौजूदा राष्ट्रपति का निजी क्रिप्टो कारोबार चलाना हितों के टकराव का विषय हो सकता है। दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि सभी कारोबारी गतिविधियां कानूनी ढांचे के भीतर संचालित हो रही हैं।
रियल एस्टेट कारोबार भी लगातार मजबूत
क्रिप्टो के अलावा ट्रंप का पारंपरिक रियल एस्टेट कारोबार भी तेजी से बढ़ा है।
फ्लोरिडा स्थित उनका प्रसिद्ध मार-ए-लागो (Mar-a-Lago) रिजॉर्ट पिछले वर्ष रिकॉर्ड आय अर्जित करने में सफल रहा। इस रिजॉर्ट में दुनिया भर के उद्योगपति, राजनयिक और राजनीतिक हस्तियां नियमित रूप से आती रही हैं। बढ़ती सदस्यता फीस, कार्यक्रमों और विशेष आयोजनों ने इसकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की।
इसके अतिरिक्त ट्रंप ऑर्गनाइजेशन ने मध्य पूर्व, यूरोप और एशिया के कई देशों में नए लाइसेंसिंग और प्रबंधन समझौते किए हैं। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और रोमानिया जैसी परियोजनाओं से भी कंपनी को करोड़ों डॉलर की आय होने की बात सामने आई है।
विदेशी समझौतों पर उठे सवाल
इन अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं को लेकर आलोचकों ने सवाल उठाए हैं कि जिन देशों के साथ अमेरिका व्यापार, रक्षा और टैरिफ जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत कर रहा था, उन्हीं देशों में ट्रंप ब्रांड के कारोबारी समझौते भी तेजी से बढ़े।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी राष्ट्रपति के निजी कारोबारी हित विदेशी सरकारों या कंपनियों से जुड़े हों तो इससे नीति निर्माण की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
हालांकि ट्रंप प्रशासन लगातार कहता रहा है कि राष्ट्रपति के सरकारी फैसले पूरी तरह राष्ट्रीय हितों के आधार पर लिए जाते हैं।
बेल्जियम से मिला हीरे जड़ित उपहार
रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चर्चा बेल्जियम के हीरा उद्योग से मिले एक महंगे उपहार की भी हुई।
बेल्जियम के एंटवर्प स्थित हीरा व्यापार संगठन AWDC की ओर से ट्रंप को एक विशेष सोने की अंगूठी भेंट की गई। इस अंगूठी में सैकड़ों हीरे, नीलम, पन्ने और माणिक जड़े बताए गए हैं।
“रिपोर्टों के अनुसार इसकी कीमत लगभग 21 लाख रुपये आंकी गई है।”
यह उपहार उस समय चर्चा में आया जब कुछ महीने पहले अमेरिकी प्रशासन ने बेल्जियम के पॉलिश्ड डायमंड उद्योग पर लगाए गए आयात शुल्क को समाप्त कर दिया था।
हालांकि AWDC ने कहा कि यह उपहार अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के सम्मान में दिया गया था, लेकिन आलोचकों ने इसके समय को लेकर सवाल उठाए।
शेयर बाजार में निवेश पर विवाद
वित्तीय खुलासे में ट्रंप के नाम से जुड़े निवेश खातों का भी उल्लेख किया गया है।
दस्तावेजों के अनुसार इन खातों में बड़ी संख्या में शेयरों की खरीद-फरोख्त हुई। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि ईरान संकट और टैरिफ नीति से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के दौरान ऊर्जा, रक्षा और प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयर खरीदे गए।
इससे विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि महत्वपूर्ण सरकारी घोषणाओं के आसपास हुए निवेशों की जांच होनी चाहिए।
हालांकि व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि इन खातों का संचालन स्वतंत्र वित्तीय सलाहकार करते हैं और राष्ट्रपति व्यक्तिगत रूप से रोजमर्रा के निवेश निर्णयों में शामिल नहीं होते।
ब्लाइंड ट्रस्ट पर बहस
अमेरिका में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि राष्ट्रपति अपने निजी निवेश को ब्लाइंड ट्रस्ट में रख देते हैं ताकि सरकारी फैसलों और निजी हितों के बीच किसी प्रकार का टकराव न हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लाइंड ट्रस्ट का उद्देश्य यही होता है कि राष्ट्रपति को यह जानकारी न हो कि उनका पैसा किन कंपनियों में निवेश किया गया है।
ट्रंप के आलोचकों का कहना है कि उनकी कारोबारी संरचना पहले के राष्ट्रपतियों से अलग रही है, जबकि उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने सभी आवश्यक कानूनी खुलासे समय-समय पर किए हैं।
राजनीतिक विवाद और विपक्ष के आरोप
डेमोक्रेटिक पार्टी के कई नेताओं ने कांग्रेस से मांग की है कि राष्ट्रपति के कारोबारी हितों की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
उनका कहना है कि यदि सरकारी नीतियों से किसी राष्ट्रपति के निजी कारोबार को लाभ पहुंचता है तो जनता का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
वहीं रिपब्लिकन नेताओं का कहना है कि ट्रंप को केवल इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वे एक सफल कारोबारी रहे हैं और उनके खिलाफ लगाए गए अधिकांश आरोप राजनीतिक हैं।
ट्रंप प्रशासन का पक्ष
व्हाइट हाउस का कहना है कि राष्ट्रपति के सभी वित्तीय खुलासे अमेरिकी कानून के अनुरूप हैं।
प्रशासन के अनुसार सभी कारोबारी गतिविधियों का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया गया है और किसी भी निवेश या कारोबारी निर्णय में कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है।
ट्रंप के सहयोगियों का यह भी कहना है कि राष्ट्रपति के कारोबारी अनुभव ने अमेरिका की आर्थिक नीतियों को मजबूत बनाने में मदद की है।
आगे क्या होगा?
अब यह मुद्दा केवल ट्रंप की निजी संपत्ति तक सीमित नहीं रह गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में कांग्रेस, सरकारी नैतिकता एजेंसियां और राजनीतिक दल इन खुलासों पर और गहराई से चर्चा करेंगे।
यदि किसी प्रकार की जांच शुरू होती है तो यह अमेरिकी राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है। दूसरी ओर यदि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं मिलते हैं तो ट्रंप प्रशासन इसे राजनीतिक अभियान करार देकर खारिज कर सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष के वित्तीय खुलासों ने उनकी बढ़ती संपत्ति, क्रिप्टो निवेश, विदेशी कारोबारी समझौतों, महंगे उपहारों और शेयर बाजार में निवेश को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल कई आरोप राजनीतिक और नैतिक सवालों के रूप में सामने आए हैं, जबकि ट्रंप प्रशासन सभी गतिविधियों को कानूनी और पारदर्शी बता रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन मामलों पर कोई आधिकारिक जांच होती है या नहीं और यदि होती है तो उसके निष्कर्ष क्या निकलते हैं।














