“राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाओं से संवाद, 5 वर्षीय विराज से लेकर 63 वर्षीय कर्नल विजय चौधरी तक बने प्रेरणा के प्रतीक”
नोएडा: 5 जुलाई। उत्तर प्रदेश के नोएडा में खेल संस्कृति को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली, जब नोएडा सिटीजन फोरम (एनसीएफ) की कार्यकारी अध्यक्ष शालिनी सिंह ने नोएडा स्टेडियम स्थित “अजीत कुमार सिंह आर्चरी एकेडमी” का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और खेल प्रबंधन से जुड़े लोगों से विस्तृत संवाद कर न केवल उनका उत्साहवर्धन किया, बल्कि खेल प्रतिभाओं के विकास को लेकर अपनी स्पष्ट सोच भी सामने रखी।
यह दौरा केवल औपचारिक मुलाकात नहीं था, बल्कि खेलों के माध्यम से युवाओं के भविष्य को सशक्त बनाने, प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराने और नोएडा को राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक मजबूत संदेश भी था।
खिलाड़ियों से सीधा संवाद, संघर्ष और सपनों को जाना
शालिनी सिंह ने एकेडमी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तरीय खिलाड़ियों से मुलाकात की और उनके अभ्यास, प्रशिक्षण व्यवस्था, चुनौतियों तथा आगामी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारियों के बारे में विस्तार से जानकारी ली।
उन्होंने खिलाड़ियों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत करते हुए उनके अनुभव सुने और कहा कि किसी भी खिलाड़ी की सफलता केवल उसके पदक से नहीं, बल्कि उसके संघर्ष, अनुशासन और निरंतर अभ्यास से तय होती है।
इस अवसर पर एकेडमी के मुख्य कोच बलम खानी और दानिश चौहान भी मौजूद रहे। उन्होंने एकेडमी की उपलब्धियों, खिलाड़ियों के प्रदर्शन तथा भविष्य की योजनाओं की जानकारी साझा की।
5 वर्षीय विराज और 63 वर्षीय कर्नल विजय चौधरी बने आकर्षण का केंद्र
दौरे का सबसे प्रेरणादायक क्षण तब देखने को मिला जब शालिनी सिंह ने मात्र 5 वर्षीय विराज और 63 वर्षीय कर्नल विजय चौधरी से विशेष रूप से मुलाकात की।
एक ओर जहां विराज जैसी नन्ही प्रतिभा अपने छोटे-से हाथों में धनुष थामकर बड़े सपने देख रही है, वहीं दूसरी ओर 63 वर्ष की आयु में कर्नल विजय चौधरी का आर्चरी के प्रति समर्पण यह संदेश देता है कि खेल के लिए न तो उम्र की कोई सीमा होती है और न ही जुनून की।
इस दृश्य ने वहां मौजूद सभी खिलाड़ियों और अभिभावकों को भावुक कर दिया। दोनों पीढ़ियों का एक ही मैदान पर अभ्यास करना इस बात का जीवंत उदाहरण था कि खेल वास्तव में समाज को जोड़ने का सबसे बड़ा माध्यम है।
‘खेल की असली पहचान उम्र नहीं, संकल्प और अनुशासन है’
खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए शालिनी सिंह ने कहा कि खेल किसी भी राष्ट्र की प्रगति का महत्वपूर्ण आधार होते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों के समर्पण और कठिन परिश्रम की सराहना करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद खिलाड़ी जिस दृढ़ निश्चय के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहे हैं, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणा का विषय है।
उन्होंने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, आत्मविश्वास, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का सबसे प्रभावी साधन भी हैं।
‘नोएडा में तैयार हो रहा है खेल क्रांति का मजबूत वातावरण’
अपने संबोधन में शालिनी सिंह ने कहा कि उन्हें यह देखकर गर्व महसूस हो रहा है कि नोएडा में खेलों के प्रति सकारात्मक माहौल तेजी से विकसित हो रहा है।
उन्होंने कहा—
“यह देखकर अत्यंत गर्व की अनुभूति होती है कि नोएडा में खेल क्रांति का एक सशक्त वातावरण तैयार हो रहा है और इसकी मजबूत नींव हमारी आर्चरी एकेडमी जैसे संस्थानों द्वारा रखी जा रही है। आज हर आयु वर्ग के खिलाड़ी यहां अपने सपनों को साकार करने के लिए निरंतर अभ्यास कर रहे हैं। यही ‘खेल क्रांति मुहिम’ का वास्तविक उद्देश्य है—हर हाथ में खेल और हर मन में जीत का विश्वास।”
उनके इस वक्तव्य का खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया।
‘खेल क्रांति मुहिम’ केवल अभियान नहीं, भविष्य निर्माण का संकल्प
शालिनी सिंह ने स्पष्ट किया कि “खेल क्रांति मुहिम” केवल प्रतियोगिताएं आयोजित करने तक सीमित कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसका व्यापक उद्देश्य देश के प्रत्येक प्रतिभाशाली खिलाड़ी तक गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, आवश्यक संसाधन, आधुनिक सुविधाएं और निरंतर प्रोत्साहन पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि यदि सही समय पर प्रतिभाओं को उचित मार्गदर्शन और संसाधन मिल जाएं तो भारत खेल जगत में विश्व स्तर पर नई उपलब्धियां हासिल कर सकता है।
उन्होंने युवाओं से खेलों को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का भी आह्वान किया।
सरकार, समाज और उद्योग जगत को मिलकर निभानी होगी जिम्मेदारी
अपने संबोधन में शालिनी सिंह ने कहा कि खेलों के विकास की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज, शैक्षणिक संस्थानों, खेल संगठनों, उद्योग जगत और अभिभावकों की भी समान रूप से है।
उन्होंने कहा कि जब सभी पक्ष मिलकर खेल प्रतिभाओं के विकास के लिए कार्य करेंगे, तभी भारत विश्व खेल मंच पर स्थायी रूप से अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।
उन्होंने समाज के सभी वर्गों से खेल प्रतिभाओं के संरक्षण, प्रोत्साहन और सहयोग का आह्वान किया।
आर्चरी एकेडमी बन रही नई प्रतिभाओं की नर्सरी
नोएडा स्टेडियम स्थित “अजीत कुमार सिंह आर्चरी एकेडमी” पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के कई खिलाड़ियों को तैयार कर चुकी है। यहां आधुनिक प्रशिक्षण, अनुभवी प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन और अनुशासित वातावरण खिलाड़ियों को लगातार बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित कर रहा है।
मुख्य कोच बलम खानी और दानिश चौहान के नेतृत्व में यहां बड़ी संख्या में बच्चे, युवा और वरिष्ठ नागरिक भी नियमित अभ्यास कर रहे हैं, जिससे यह एकेडमी केवल प्रशिक्षण केंद्र नहीं बल्कि खेल संस्कृति का मजबूत केंद्र बनती जा रही है।
एनसीएफ के प्रयासों की खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों ने की सराहना
कार्यक्रम के अंत में एकेडमी के प्रशिक्षकों और खिलाड़ियों ने नोएडा सिटीजन फोरम द्वारा खेलों के विकास, खिलाड़ियों के मनोबल को बढ़ाने और खेल संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी एनसीएफ इसी प्रकार खिलाड़ियों के साथ खड़ा रहेगा और खेल सुविधाओं के विस्तार, प्रशिक्षण और प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाएगा।
नोएडा से उठ रही नई खेल क्रांति की आवाज
आज जब देश अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में लगातार नई सफलताएं हासिल कर रहा है, तब स्थानीय स्तर पर इस प्रकार की पहलें भविष्य के चैंपियनों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। नोएडा स्टेडियम में शालिनी सिंह का यह दौरा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि यदि समाज, संस्थाएं और खेल संगठन मिलकर आगे बढ़ें, तो आने वाले वर्षों में नोएडा न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश का एक प्रमुख खेल केंद्र बन सकता है।
‘हर हाथ में खेल और हर मन में जीत का विश्वास’ का संदेश अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि नोएडा में आकार ले रही नई खेल क्रांति की पहचान बनता दिखाई दे रहा है।














