“पंजाब-हरियाणा सीमा से आज शुरू होगी ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ | 51 किसान तय करेंगे 228 किलोमीटर का सफर, 200 से ज्यादा समर्थक भी रहेंगे साथ | MSP की कानूनी गारंटी समेत लंबित मांगों को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी”
पंजाब-हरियाणा सीमा पर स्थित दाता सिंह वाला-खनौरी बॉर्डर से आज किसानों की एक बड़ी पदयात्रा दिल्ली के लिए रवाना होगी। करीब 228 किलोमीटर लंबी इस ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ का लक्ष्य 29 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचना है, जहां किसान महापंचायत प्रस्तावित है। इस बार आंदोलन का स्वरूप पहले से अलग होगा। किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के बजाय पैदल दिल्ली की ओर कूच करेंगे।
आयोजकों के मुताबिक, 51 किसान पूरी 228 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करेंगे, जबकि करीब 200 सहयोगी किसान और सपोर्ट वाहन उनके साथ रहेंगे। यात्रा पंजाब-हरियाणा सीमा से शुरू होकर हरियाणा के नरवाना, जींद और आगे दिल्ली की ओर बढ़ेगी। रास्ते में अलग-अलग स्थानों से किसान और समर्थक पदयात्रा से जुड़ते जाएंगे।
किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ के मुताबिक, यात्रा का उद्देश्य किसानों की लंबित मांगों को मजबूती से उठाना और केंद्र सरकार का ध्यान उन मुद्दों की ओर आकर्षित करना है, जिन पर किसान संगठन लंबे समय से बातचीत और समाधान की मांग कर रहे हैं।
MSP की कानूनी गारंटी समेत कई मांगें
किसानों की प्रमुख मांगों में फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी सबसे प्रमुख है। इसके अलावा किसानों और खेत मजदूरों से जुड़े मुद्दे, कर्ज, पेंशन और अन्य लंबित मांगों को भी आंदोलन के केंद्र में रखा गया है।
किसान संगठनों का आरोप है कि कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं और सरकार के साथ इन पर अपेक्षित स्तर की बातचीत नहीं हो पा रही है। ऐसे में पदयात्रा के जरिए किसानों की आवाज को दिल्ली तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की ओर से भी पदयात्रा को लेकर जानकारी साझा की गई है। संगठन के अनुसार, दाता सिंह वाला गांव से शुरू होने वाली यह यात्रा 29 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर किसान पंचायत के साथ समाप्त होगी।
ट्रैक्टर-ट्रॉली नहीं, इस बार पैदल दिल्ली कूच
इस पदयात्रा की सबसे बड़ी खासियत इसका पैदल स्वरूप है। पिछले किसान आंदोलनों में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां आंदोलन की प्रमुख पहचान रही हैं, लेकिन इस बार 51 किसान बिना ट्रैक्टर-ट्रॉली के 228 किलोमीटर का सफर पैदल पूरा करेंगे।
आयोजकों का कहना है कि यह फैसला पदयात्रा को अधिक अनुशासित और शांतिपूर्ण स्वरूप देने के उद्देश्य से लिया गया है। किसानों के साथ सपोर्ट वाहन रहेंगे, ताकि लंबी दूरी तय करने वाले प्रतिभागियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
51 किसानों के साथ चलने वाले करीब 200 सहयोगी रास्ते में अलग-अलग जगहों पर इस अभियान को समर्थन देंगे। इससे पदयात्रा के आगे बढ़ने के साथ इसका आकार भी बढ़ने की संभावना है।
29 अगस्त को जंतर-मंतर पर किसान पंचायत
किसान संगठनों की योजना के मुताबिक पदयात्रा 29 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचेगी। यहां किसान पंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें किसानों की मांगों और आंदोलन की आगे की रणनीति पर चर्चा प्रस्तावित है।
किसान नेताओं का कहना है कि दिल्ली पहुंचकर केंद्र सरकार के सामने अपनी मांगों को एक बार फिर मजबूती से रखा जाएगा। विशेष रूप से MSP की कानूनी गारंटी और किसानों तथा खेत मजदूरों से जुड़े आर्थिक एवं सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
पदयात्रा को केवल एक मार्च के रूप में नहीं देखा जा रहा है, बल्कि किसान संगठन इसे अपने लंबित मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर फिर से प्रमुखता देने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।
नरवाना, जींद होते हुए दिल्ली की ओर बढ़ेगी यात्रा
दाता सिंह वाला से शुरू होने के बाद पदयात्रा हरियाणा के विभिन्न इलाकों से होते हुए दिल्ली की ओर बढ़ेगी। नरवाना और जींद जैसे महत्वपूर्ण स्थान इसके मार्ग में शामिल हैं। आगे चलकर यात्रा सिंघु बॉर्डर क्षेत्र से दिल्ली में प्रवेश करेगी।
रास्ते में किसानों और समर्थकों के जुड़ने की संभावना है। आयोजकों ने अपील की है कि पदयात्रा में शामिल होने वाले लोग अनुशासन बनाए रखें और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सामने रखें।
लंबी दूरी और कई दिनों तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान किसानों की संख्या बढ़ने से प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की भी निगाह इस पर रहेगी।
‘आम लोगों को नहीं होगी परेशानी’
पदयात्रा के आयोजकों ने इसे पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित रखने का भरोसा दिया है। किसानों का कहना है कि उनका उद्देश्य आम लोगों को परेशान करना या यातायात बाधित करना नहीं है। इसी वजह से यात्रा के दौरान व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
आयोजकों के मुताबिक, किसानों से अपील की गई है कि वे रास्ते में अनुशासन बनाए रखें और स्थानीय लोगों तथा यातायात व्यवस्था का सम्मान करें। पदयात्रा को शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली तक ले जाना संगठन की प्राथमिकता है।
किसान शुभम को भी दी जाएगी श्रद्धांजलि
इस पदयात्रा को किसानों के मुद्दों के साथ-साथ किसान शुभम की स्मृति से भी जोड़ा जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, शुभम ने पहले हुए एक प्रदर्शन के दौरान अपनी जान गंवाई थी। किसानों का कहना है कि मौजूदा पदयात्रा उनके लिए श्रद्धांजलि का माध्यम भी है।
किसान संगठनों का संदेश है कि आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों और उनके परिवारों के मुद्दों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ में मांगों के साथ संघर्ष और बलिदान की स्मृति को भी प्रमुखता दी जा रही है।
दिल्ली पहुंचकर क्या होगा अगला कदम?
29 अगस्त को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित किसान पंचायत के बाद आंदोलन की अगली दिशा पर नजर रहेगी। किसान संगठन सरकार के साथ लंबित मुद्दों पर बातचीत और ठोस समाधान की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल किसानों का पूरा ध्यान 228 किलोमीटर की पदयात्रा को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा करने और बड़ी संख्या में किसानों को दिल्ली तक जोड़ने पर है। 51 किसानों का पैदल मार्च इस आंदोलन का प्रतीकात्मक चेहरा होगा, जबकि रास्ते में जुड़ने वाले सैकड़ों समर्थक इसे व्यापक जनसमर्थन देने की कोशिश करेंगे।
दाता सिंह वाला से दिल्ली तक 228 किलोमीटर का यह पैदल सफर किसानों की मांगों को राजधानी तक पहुंचाने की एक नई कोशिश है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि 29 अगस्त को जंतर-मंतर पर होने वाली किसान पंचायत में कितनी संख्या में किसान जुटते हैं और सरकार की ओर से इन लंबित मांगों पर क्या रुख सामने आता है।














