नोएडा, 15 अगस्त 2026। सेक्टर-122 स्थित कम्युनिटी हॉल में शनिवार को फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन की ओर से देश का 80वां स्वतंत्रता दिवस उत्साह, उमंग और राष्ट्रप्रेम के माहौल में मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम् के सामूहिक गायन और ध्वजारोहण के साथ हुई। तिरंगे के सम्मान में पूरा परिसर देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। इस अवसर पर फाउंडेशन से जुड़े दिव्यांग बच्चों ने अपनी प्रतिभा, रचनात्मकता और आत्मविश्वास का शानदार प्रदर्शन कर उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया।
दिव्यांग बच्चों की कलाकृतियां बनीं समारोह का आकर्षण
स्वतंत्रता दिवस समारोह में इस बार सबसे खास आकर्षण फाउंडेशन के दिव्यांग बच्चों द्वारा तैयार की गई हस्तनिर्मित कलाकृतियों की शोकेस गैलरी रही। बच्चों ने अपनी मेहनत और हुनर से पुष्पगुच्छ, मोमेंटो, रेजिन आर्ट और राखियां तैयार कीं। इन कलाकृतियों को जब बच्चों ने कार्यक्रम में आए अतिथियों को अपने हाथों से भेंट किया तो पूरा वातावरण तालियों की गूंज से भर गया।
बच्चों की बनाई कलाकृतियों में उनकी रचनात्मक सोच के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनने की दृढ़ इच्छा भी दिखाई दी। अतिथियों और अभिभावकों ने बच्चों की कला को देखकर उनकी जमकर सराहना की और कहा कि प्रतिभा किसी शारीरिक क्षमता की मोहताज नहीं होती। उचित अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर दिव्यांग बच्चे भी समाज के हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकते हैं।
डांस, म्यूजिक और रिदमिक योगा ने बांधा समां
समारोह में बच्चों ने विभिन्न सांस्कृतिक एवं रचनात्मक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का दिल जीत लिया। डांस, म्यूजिक और रिदमिक योगा की प्रस्तुतियों में बच्चों का आत्मविश्वास देखते ही बना। मंच पर बच्चों की ऊर्जा और उत्साह ने उपस्थित लोगों को लंबे समय तक तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम में आयोजित ड्राइंग प्रतियोगिता में भी बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। रंगों और कल्पनाओं के माध्यम से बच्चों ने देशप्रेम, स्वतंत्रता और अपने सपनों को कागज पर उतारा। उनकी प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि अगर बच्चों को सही मंच और अवसर मिले तो वे अपनी प्रतिभा के जरिए समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
विशिष्ट अतिथियों ने बच्चों का बढ़ाया हौसला
समारोह में डॉ. सुधांशु जी, पूर्व सचिव, एपेडा तथा श्रीमती विमला बाथम जी, पूर्व अध्यक्ष, महिला आयोग, उत्तर प्रदेश मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। दोनों अतिथियों ने फाउंडेशन की ओर से लगाई गई बच्चों की शोकेस गैलरी का अवलोकन किया और उनकी बनाई कलाकृतियों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
अतिथियों ने बच्चों से बातचीत कर उनकी प्रतिभा और रुचियों को जाना। बच्चों की मेहनत और आत्मविश्वास को देखकर वे भावुक भी हुए। उन्होंने कहा कि दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना केवल किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों को केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि सम्मान, अवसर और आत्मनिर्भरता का मंच मिलना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दिव्यांग बच्चों को सशक्त बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा में आगे लाने की इस मुहिम में वे फाउंडेशन के साथ खड़े हैं।
‘सच्ची आजादी आत्मनिर्भर बनना है’
कार्यक्रम के दौरान डॉ. महीपाल सिंह जी ने दिव्यांग बच्चों के भविष्य और उनके सशक्तीकरण को लेकर महत्वपूर्ण विचार रखे। उन्होंने कहा कि इन बच्चों के लिए स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ केवल आजादी का उत्सव मनाना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर होकर अपने पैरों पर खड़ा होना है।
उन्होंने कहा कि फाउंडेशन के बच्चे आज पैरामेडिकल, कौशल प्रशिक्षण और पैरा स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं। बच्चों की प्रतिभा को सही दिशा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इन बच्चों को खेलों के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना लक्ष्य है।
डॉ. महीपाल सिंह ने कहा कि पैरा ओलंपिक में देश का नाम रोशन करना फाउंडेशन के बड़े लक्ष्यों में शामिल है। बच्चों द्वारा बनाई गई कलाकृतियां उनके आत्मविश्वास, मेहनत और हुनर का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि जब कोई बच्चा अपनी क्षमता पर विश्वास करना सीखता है, तभी वास्तविक सशक्तीकरण की शुरुआत होती है।
कला से आत्मविश्वास, कौशल से आत्मनिर्भरता की ओर कदम
फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन का यह आयोजन केवल स्वतंत्रता दिवस समारोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा और क्षमता को समाज के सामने रखने का एक प्रभावी मंच भी बना। बच्चों की ओर से तैयार की गई वस्तुओं की प्रदर्शनी ने यह संदेश दिया कि उन्हें अवसर मिले तो वे न केवल अपने लिए बल्कि समाज के लिए भी उपयोगी और रचनात्मक कार्य कर सकते हैं।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने बच्चों की प्रस्तुतियों और कलाकृतियों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों से बच्चों के भीतर आत्मविश्वास बढ़ता है। साथ ही समाज में दिव्यांगता को लेकर बनी कई धारणाओं को बदलने में भी मदद मिलती है। बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों से जोड़ना आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
समावेशी समाज की ओर बढ़ता कदम
समारोह के दौरान बार-बार इस बात पर जोर दिया गया कि दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए केवल सरकारी या संस्थागत प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। परिवार, समाज, शिक्षण संस्थान, उद्योग और सामाजिक संगठन सभी को मिलकर काम करना होगा।
फाउंडेशन की ओर से बच्चों को कौशल प्रशिक्षण, खेल और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने की पहल इसी दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में सामने आई। कार्यक्रम में बच्चों की सक्रिय भागीदारी ने यह साबित किया कि सही वातावरण मिलने पर वे अपनी क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।
राष्ट्रगान के साथ हुआ समारोह का समापन
देशभक्ति से ओतप्रोत इस समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस दौरान पूरा परिसर राष्ट्रप्रेम और गर्व की भावना से भर गया। बच्चों, अभिभावकों, अतिथियों और फाउंडेशन से जुड़े सदस्यों ने एक स्वर में देश की एकता, सम्मान और समावेशिता का संदेश दिया।
फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन का 80वां स्वतंत्रता दिवस समारोह इस मायने में भी खास रहा कि यहां स्वतंत्रता का उत्सव केवल तिरंगा फहराने और देशभक्ति गीतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दिव्यांग बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक स्थान दिलाने के संकल्प के रूप में सामने आया।
कार्यक्रम ने स्पष्ट संदेश दिया कि जब समाज किसी बच्चे की कमी देखने के बजाय उसकी क्षमता को पहचानता है, तो वही बच्चा अपनी प्रतिभा से नई मिसाल कायम कर सकता है।
एकता • सम्मान • समावेशिता • राष्ट्रप्रेम
जय हिन्द! वन्दे मातरम्!














