“व्यावसायिक विज्ञापनों ने ढका बिजली तंत्र’, सरकारी पैनलों की बिगड़ती हालत पर RWA का बड़ा सवाल—दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई”
नोएडा: नोएडा के सेक्टर-105 में सरकारी विद्युत पैनलों पर अवैध पोस्टर और विज्ञापन चिपकाने का मामला अब गंभीर प्रशासनिक और कानूनी मुद्दा बन गया है। रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) सेक्टर-105 के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय (दीपक शर्मा) ने विद्युत विभाग के मुख्य अभियंता को आधिकारिक पत्र भेजकर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले असामाजिक तत्वों और संबंधित संस्थाओं के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। उनका कहना है कि क्षेत्र में लाखों रुपये की लागत से लगाए गए आधुनिक विद्युत पैनलों को कुछ निजी संस्थाएं अपने व्यावसायिक प्रचार का माध्यम बना रही हैं, जिससे न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान हो रहा है बल्कि बिजली व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है।
महंगे विद्युत पैनल बने अवैध विज्ञापनों का बोर्ड
RWA अध्यक्ष द्वारा भेजे गए पत्र में बताया गया है कि सेक्टर-105 में विभिन्न स्थानों पर स्थापित विद्युत पैनलों पर बड़े पैमाने पर निजी कंपनियों, संस्थाओं, स्वास्थ्य शिविरों, कोचिंग सेंटरों तथा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े पोस्टर और स्टीकर लगाए जा रहे हैं। यह सिलसिला लंबे समय से जारी है, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।
इन पैनलों का उद्देश्य बिजली आपूर्ति को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखना है, लेकिन अब वे विज्ञापन बोर्ड में तब्दील होते जा रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति का इस तरह दुरुपयोग न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि पूरे सेक्टर की छवि भी खराब कर रहा है।
पोस्टर हटते हैं तो उखड़ जाता है पेंट, सरकारी संपत्ति को हो रहा नुकसान
RWA के अनुसार समस्या केवल पोस्टर चिपकाने तक सीमित नहीं है। जब ये पोस्टर समय के साथ हटाए या फाड़े जाते हैं तो उनके साथ विद्युत पैनलों का मूल पेंट भी उखड़ जाता है। इससे पैनलों की बाहरी सतह खराब हो रही है और उनकी गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है।
संस्था का कहना है कि सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किए गए विद्युत ढांचे को इस प्रकार नुकसान पहुंचाना सीधे-सीधे सरकारी धन की बर्बादी है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो भविष्य में इन पैनलों की मरम्मत और रंगाई-पुताई पर अतिरिक्त सरकारी खर्च करना पड़ेगा।
बिजली कर्मचारियों के काम में भी बन रही बाधा, हादसे की आशंका
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि विद्युत पैनलों पर चिपके बड़े-बड़े पोस्टरों के कारण बिजली विभाग के तकनीकी कर्मचारियों को संचालन और रखरखाव के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
आपातकालीन स्थिति में यदि किसी पैनल को तुरंत खोलने या तकनीकी जानकारी देखने की आवश्यकता हो तो पोस्टर और स्टीकर बाधा बन जाते हैं। इससे बिजली आपूर्ति बहाल करने में देरी हो सकती है और किसी बड़े तकनीकी हादसे की आशंका भी बढ़ जाती है। RWA का कहना है कि यह केवल सौंदर्य का विषय नहीं बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है।
फोटो साक्ष्य के साथ मुख्य अभियंता को भेजी शिकायत
RWA अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने अपनी शिकायत के साथ कई तस्वीरें भी संलग्न की हैं। इन तस्वीरों में विभिन्न संस्थाओं के प्रचार-प्रसार से जुड़े पोस्टर और विज्ञापन विद्युत पैनलों पर स्पष्ट रूप से चिपके दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने मुख्य अभियंता से अनुरोध किया है कि इन विज्ञापनों के आधार पर संबंधित संस्थाओं और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं लगातार बढ़ती रहेंगी।
‘सरकारी संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम’ के तहत FIR की मांग
RWA अध्यक्ष ने अपनी शिकायत में स्पष्ट रूप से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ ‘सरकारी संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम (Prevention of Damage to Public Property Act)’ के तहत तत्काल प्राथमिकी दर्ज कराई जाए। उनका कहना है कि सरकारी संपत्ति पर अवैध पोस्टर लगाना केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि सार्वजनिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाने जैसा अपराध है।
उन्होंने विद्युत विभाग से यह भी अपेक्षा की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नियमित निगरानी, समय-समय पर निरीक्षण तथा दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
स्थानीय लोगों ने भी उठाई कार्रवाई की मांग
सेक्टर-105 के कई निवासियों ने भी RWA की इस पहल का समर्थन किया है। उनका कहना है कि शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए सार्वजनिक संपत्तियों पर अवैध पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है। लोगों का मानना है कि यदि शुरुआती स्तर पर ही ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज होने लगे तो अवैध प्रचार-प्रसार पर स्वतः रोक लग जाएगी।
प्रशासन के सामने अब सख्त कार्रवाई की चुनौती
सेक्टर-105 का यह मामला केवल एक कॉलोनी तक सीमित नहीं माना जा रहा है। नोएडा के कई अन्य सेक्टरों में भी सरकारी विद्युत पैनलों, ट्रांसफॉर्मरों, दीवारों और सार्वजनिक परिसंपत्तियों पर अवैध पोस्टर चिपकाने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विद्युत विभाग और स्थानीय प्रशासन इस शिकायत पर कितना शीघ्र संज्ञान लेते हैं और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कितनी प्रभावी कार्रवाई करते हैं।
यदि इस मामले में उदाहरणात्मक कार्रवाई होती है तो यह न केवल सेक्टर-105 बल्कि पूरे नोएडा में सार्वजनिक संपत्तियों को अवैध विज्ञापनों से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।














