अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि उसने लगातार तीसरी रात ईरान के सैन्य ठिकानों, ड्रोन नेटवर्क और तटीय रक्षा क्षमताओं को निशाना बनाकर हमले किए हैं। दूसरी ओर, तेहरान ने इन कार्रवाइयों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
दक्षिणी ईरान के कई इलाकों, जिनमें बंदर अब्बास, किश द्वीप और अन्य रणनीतिक क्षेत्र शामिल हैं, में विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, इन हमलों से हुए नुकसान और हताहतों की संख्या को लेकर स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
होर्मुज स्ट्रेट बना टकराव का केंद्र
ताजा संकट का सबसे बड़ा कारण होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ता विवाद है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है, जहां से दुनिया के तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अमेरिका ने क्षेत्र में नौवहन सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही है, जबकि ईरान ने किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को अस्वीकार्य बताया है।
ट्रंप प्रशासन का सख्त रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य और आर्थिक दबाव आगे भी जारी रह सकता है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। वहीं ईरान का आरोप है कि अमेरिका क्षेत्रीय मामलों में गैर-कानूनी हस्तक्षेप कर रहा है।
वैश्विक बाजारों पर असर
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही बाधित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है और वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। हाल के दिनों में तेल बाजारों में अस्थिरता बढ़ने के संकेत भी मिले हैं।
कूटनीतिक समाधान पर सवाल
संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय शक्तियां दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों का सिलसिला जारी रहा, तो पूरा पश्चिम एशिया एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष की ओर बढ़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वॉशिंगटन और तेहरान बातचीत का रास्ता अपनाते हैं या टकराव और गहराता है।














