नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले से दिए गए स्वतंत्रता दिवस संबोधन पर कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने तीखा राजनीतिक पलटवार किया। खरगे ने प्रधानमंत्री पर देश की उपलब्धियों का श्रेय खुद लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि भारत का निर्माण किसी एक व्यक्ति या सरकार की देन नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
खरगे ने तंज कसते हुए कहा, “गनीमत है कि उन्होंने यह नहीं कहा कि दुनिया मैंने ही बनाई।” उन्होंने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से लेकर लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और कांग्रेस की विभिन्न सरकारों ने देश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया, लेकिन कभी इन उपलब्धियों का इस तरह अहंकार नहीं किया गया।
खरगे का बयान ऐसे समय आया है जब स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री के लाल किले से दिए गए संबोधन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के भाषण को लेकर यह संदेश देने की कोशिश की कि आज के भारत की बुनियाद आजादी के बाद के दशकों में किए गए संस्थागत, वैज्ञानिक, औद्योगिक और सामाजिक विकास के कामों से तैयार हुई है।
‘देश के निर्माण में कांग्रेस की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता’
खरगे ने कांग्रेस सरकारों की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि जवाहरलाल नेहरू ने आधुनिक भारत की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने वैज्ञानिक संस्थानों, उच्च शिक्षा और तकनीकी विकास को प्राथमिकता दी। खरगे ने कहा कि देश में विज्ञान और तकनीक को बढ़ावा देने के लिए जिस स्तर पर निवेश किया गया, उसमें नेहरू का योगदान महत्वपूर्ण था।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जिक्र करते हुए कृषि क्षेत्र में उनके योगदान को रेखांकित किया। वहीं इंदिरा गांधी के कार्यकाल में देश की सैन्य क्षमता मजबूत होने और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसलों का उल्लेख किया।
खरगे ने कहा कि गोवा का भारत में एकीकरण और सिक्किम का भारत में विलय भी देश के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाएं हैं। उन्होंने इन उपलब्धियों को कांग्रेस के लंबे शासनकाल से जोड़ते हुए कहा कि देश को यहां तक पहुंचाने में कांग्रेस की सरकारों की भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता।
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का जिक्र करते हुए खरगे ने कहा कि भारत में सूचना प्रौद्योगिकी के विस्तार की नींव रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके मुताबिक, आज भारत जिस डिजिटल और तकनीकी शक्ति के रूप में अपनी पहचान बना रहा है, उसकी बुनियाद कई दशक पहले रखी गई थी।
‘खाने, शिक्षा और काम का अधिकार हमने दिया’
कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार पर सामाजिक अधिकारों के मुद्दे पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार उन अधिकारों और कल्याणकारी व्यवस्थाओं को कमजोर कर रही है, जिनके लिए कांग्रेस सरकारों ने कानून और संस्थागत ढांचे तैयार किए थे।
खरगे ने कहा कि खाने का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और काम से जुड़े अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में कांग्रेस ने काम किया। उन्होंने दावा किया कि देश में आज जो विकास दिखाई देता है, उसकी बुनियाद कांग्रेस के शासनकाल में तैयार की गई नीतियों और संस्थानों में है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा आम आदमी के जीवन को बेहतर बनाने की कोशिश की है। उनके मुताबिक, विकास का वास्तविक अर्थ केवल बड़ी परियोजनाएं और आर्थिक आंकड़े नहीं, बल्कि गरीब, किसान, मजदूर, छात्र, युवा और कमजोर वर्ग के जीवन में बदलाव लाना है।
‘युवाओं के सपने कुचले जा रहे हैं’
खरगे ने युवाओं के मुद्दे को भी अपने हमले के केंद्र में रखा। उन्होंने कहा कि देश का युवा आज अपने भविष्य, रोजगार, शिक्षा और अवसरों को लेकर चिंतित है। उनके मुताबिक, बड़ी संख्या में युवा अलग-अलग मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी युवाओं के साथ खड़े हैं और उनके मुद्दों को लगातार उठाते रहेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष ने युवाओं के आंदोलनों को लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए कहा कि उनकी आवाज को दबाने के बजाय सरकार को उनकी समस्याओं को सुनना चाहिए।
खरगे ने खास तौर पर Gen Z का जिक्र करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को देशद्रोही कहना उचित नहीं है। उन्होंने कहा, “Gen Z देशद्रोही नहीं हैं।” उनके मुताबिक, यह पीढ़ी अपने अधिकारों, भविष्य और देश के सवालों पर अपनी राय रख रही है।
‘कमजोर लोगों को आगे लाना हमारा काम’
खरगे ने सामाजिक न्याय के मुद्दे को भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कमजोर और वंचित वर्गों को आगे लाने के लिए संघर्ष करती रहेगी।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों को उनका अधिकार नहीं मिला है, उन्हें अधिकार दिलाना कांग्रेस की जिम्मेदारी है। खरगे ने दावा किया कि पार्टी समाज के कमजोर तबकों को राजनीतिक और सामाजिक रूप से मजबूत करने की दिशा में काम करेगी।
उन्होंने “मोहब्बत की दुकान” के कांग्रेस के राजनीतिक संदेश को दोहराते हुए कहा कि देश में एकता और शांति कायम करने की जरूरत है। खरगे ने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस सामाजिक एकता को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस अपने अभियान से पीछे नहीं हटेगी।
‘गरीब और गरीब, अमीर और अमीर हो रहा है’
कांग्रेस अध्यक्ष ने आर्थिक असमानता के सवाल पर भी केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की नीतियों का लाभ बड़े और संपन्न वर्ग को ज्यादा मिल रहा है, जबकि गरीब और कमजोर वर्ग आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है।
खरगे ने कहा कि “गरीब और गरीब हो रहा है और अमीर और अमीर हो रहा है।” उन्होंने इसे भाजपा सरकार की नीति बताते हुए कहा कि सरकार को आर्थिक विकास के साथ-साथ उसके लाभ के समान वितरण पर भी ध्यान देना चाहिए।
उनका आरोप था कि गरीबों और कमजोर तबकों के हितों की अनदेखी की जा रही है और सरकार की प्राथमिकताएं आम आदमी की परेशानियों से अलग होती जा रही हैं।
संसद से लेकर संवैधानिक संस्थाओं तक सरकार पर हमला
खरगे ने संसद की कार्यवाही को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की संसद में मौजूदगी को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह हैरानी की बात है कि सदन के परिसर में बयान दिए जाते हैं, लेकिन सदन की कार्यवाही के दौरान पर्याप्त भागीदारी नहीं दिखाई जाती।
इसके साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग, मीडिया, विश्वविद्यालयों, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और अन्य संस्थाओं को लेकर भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
खरगे ने दावा किया कि देश की कई महत्वपूर्ण संस्थाएं सरकार के प्रभाव में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवैधानिक और स्वायत्त संस्थाओं की स्वतंत्रता बेहद महत्वपूर्ण है और इन संस्थाओं पर किसी भी प्रकार का राजनीतिक दबाव लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
नेहरू से विज्ञान तक का सवाल
विज्ञान और तकनीक के बजट को लेकर भी खरगे ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र में निवेश को लेकर जवाहरलाल नेहरू के समय से ही मजबूत आधार तैयार किया गया था।
उनका कहना था कि भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियां किसी एक सरकार की उपलब्धि नहीं हैं। इसके पीछे वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, शोधकर्ताओं और कई दशकों की सरकारी नीतियों का योगदान है।
खरगे ने इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री पर उपलब्धियों का राजनीतिक श्रेय लेने का आरोप लगाया और कहा कि देश के विकास की कहानी को केवल एक व्यक्ति के खाते में नहीं डाला जा सकता।
राम मंदिर चंदे पर भी कार्रवाई की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष ने राम मंदिर से जुड़े चंदे के कथित दुरुपयोग के आरोपों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर चंदा चोरी में जो भी लोग शामिल हैं, उनके खिलाफ जल्द कार्रवाई होनी चाहिए।
खरगे ने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े किसी भी चंदे में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। उन्होंने आरोपों की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
‘श्रेय की राजनीति नहीं, जवाबदेही जरूरी’
मल्लिकार्जुन खरगे के पूरे बयान का राजनीतिक संदेश साफ था—कांग्रेस अब प्रधानमंत्री के लाल किले के भाषण को केवल एक राष्ट्रीय संबोधन के रूप में नहीं, बल्कि विकास और उपलब्धियों के श्रेय को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के नए मंच के तौर पर देख रही है।
एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार की उपलब्धियों, नीतियों और भविष्य के भारत का विजन सामने रख रहे हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस पुराने भारत के निर्माण में अपने योगदान को सामने रखकर यह सवाल उठा रही है कि देश की उपलब्धियों का श्रेय आखिर किसे दिया जाए।
खरगे का “गनीमत है कि दुनिया मैंने बनाई नहीं कहा” वाला तंज इसी राजनीतिक टकराव का सबसे तीखा हिस्सा बनकर सामने आया। कांग्रेस का दावा है कि भारत की प्रगति एक लंबी यात्रा का परिणाम है, जबकि भाजपा सरकार अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को केंद्र में रखती है।
ऐसे में स्वतंत्रता दिवस के मंच से शुरू हुई यह बहस आने वाले दिनों में संसद से लेकर चुनावी मैदान तक और तेज होने के संकेत दे रही है। एक ओर ‘नया भारत’ का दावा है, तो दूसरी ओर कांग्रेस ‘भारत निर्माण’ में अपने ऐतिहासिक योगदान की कहानी सामने रख रही है।














