याब्लोको पार्टी का रजिस्ट्रेशन रद्द, अगले महीने होने वाले संसदीय चुनाव में नहीं उतरेगी; पार्टी ने फैसले के खिलाफ अपील का ऐलान किया
मॉस्को: रूस में यूक्रेन युद्ध का विरोध करने वाली प्रमुख विपक्षी पार्टी याब्लोको (Yabloko) को अगले महीने होने वाले संसदीय चुनाव से बाहर कर दिया गया है। रूस की सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पार्टी का चुनावी रजिस्ट्रेशन रद्द करने का आदेश दिया। यह फैसला ऐसे समय आया है जब रूस में राजनीतिक विरोध और विपक्ष की भूमिका को लेकर लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं।
याब्लोको को पिछले महीने केंद्रीय चुनाव आयोग ने 10 अन्य पार्टियों के साथ चुनावी बैलेट में शामिल होने की अनुमति दी थी। लेकिन बाद में क्रेमलिन समर्थक एक पार्टी की अपील के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और अदालत ने याब्लोको का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया।
कौन है याब्लोको?
याब्लोको रूस की पुरानी उदारवादी राजनीतिक पार्टियों में से एक है। कभी यह पार्टी संसद में सरकार की नीतियों की मुखर आलोचक रही थी। लेकिन समय के साथ क्रेमलिन की राजनीतिक पकड़ मजबूत होने के बाद पार्टी का संसदीय प्रभाव लगातार कम होता गया।
हाल के वर्षों में याब्लोको रूस की उन पंजीकृत पार्टियों में प्रमुख रही, जिसने यूक्रेन में रूसी सैन्य कार्रवाई का खुलकर विरोध किया।यह
पार्टी के चुनावी अभियान में युद्धविराम, कूटनीति और शांति जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई थी।
‘युद्ध नहीं, शांति चाहिए’ था अभियान का संदेश
याब्लोको के चुनावी नारों में युद्धविराम समझौते, कूटनीति और शांति की मांग प्रमुख थी। पार्टी ने परमाणु युद्ध के खतरे को रोकने और रूस में राजनीतिक दमन तथा भय के माहौल को खत्म करने की बात भी कही।
पार्टी के सह-संस्थापक और वरिष्ठ उदारवादी नेता ग्रिगोरी यावलिंस्की ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस फैसले के खिलाफ अपील करेगी।
उनके मुताबिक, याब्लोको को चुनाव से बाहर करने का मतलब उन लोगों के साथ राजनीतिक संवाद से पीछे हटना है जो सरकार से असहज सवाल पूछते हैं।
विदेश में रह रहे विपक्षी नेताओं ने किया समर्थन
रूस से बाहर रह रहे कई विपक्षी नेताओं ने चुनाव में याब्लोको का समर्थन करने की अपील की थी।
इनमें दिवंगत क्रेमलिन आलोचक एलेक्सी नवलनी की पत्नी यूलिया नवलनाया, विपक्षी नेता इल्या याशिन और व्लादिमीर कारा-मुर्जा शामिल हैं।
नवलनाया ने 6 अगस्त को सोशल मीडिया पर याब्लोको के समर्थन की अपील करते हुए पार्टी के युद्ध-विरोधी रुख को महत्वपूर्ण बताया था।
हालांकि, याब्लोको के चेयरमैन निकोलाई रिबाकोव ने पार्टी को विदेश में रह रहे विपक्षी नेताओं के समर्थन से अलग रखने की कोशिश की। उनका तर्क था कि पार्टी का अपना राजनीतिक कार्यक्रम और स्वतंत्र अभियान है।
सोशल मीडिया पर ‘सेब’ बना विरोध का प्रतीक
याब्लोको का रूसी अर्थ ‘सेब’ होता है। चुनावी अभियान के दौरान सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो सामने आए जिनमें युवा हाथ में सेब लेकर दिखाई दिए।
कई वीडियो में सीधे राजनीतिक नारे नहीं थे। इसके बजाय लोगों को सेब से जुड़े गानों पर नाचते या चुनाव में अपनी पसंद के बारे में संकेत देते हुए दिखाया गया।
पार्टी ने स्पष्ट किया कि इन वीडियो के लिए उसने किसी को भुगतान नहीं किया। समर्थकों का कहना था कि वे रूस में शांति और सामान्य जीवन चाहते हैं।
क्या शुरुआत में पार्टी को चुनाव लड़ने की अनुमति देना रणनीति थी?
राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि केंद्रीय चुनाव आयोग ने शुरुआत में याब्लोको को चुनावी बैलेट में शामिल होने की अनुमति क्यों दी।
NEST Center के वरिष्ठ शोधकर्ता निकोलाई पेत्रोव के अनुसार, संभव है कि अधिकारियों ने शुरुआत में पार्टी को चुनाव लड़ने की अनुमति इसलिए दी हो ताकि लोगों को अपनी नाराजगी व्यक्त करने का एक सीमित राजनीतिक रास्ता मिले और साथ ही यह भी दिखाया जा सके कि युद्ध-विरोधी रुख को व्यापक समर्थन नहीं है।
लेकिन पार्टी के अभियान को अपेक्षा से अधिक समर्थन मिलने के बाद परिस्थितियां बदल गईं—ऐसा उनका आकलन है।
चुनाव से बाहर करना क्यों महत्वपूर्ण है?
याब्लोको को चुनाव से बाहर करने के फैसले ने रूस की राजनीतिक व्यवस्था में विपक्ष की भूमिका पर नई बहस छेड़ दी है।
आलोचकों का सवाल है कि यदि सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण और चुनावी रास्ते से अपनी राय रखने वाली पार्टी को भी चुनाव से बाहर कर दिया जाता है, तो विपक्ष के लिए राजनीतिक विकल्प कितने खुले रह जाते हैं?
वहीं रूसी अधिकारियों और क्रेमलिन समर्थक पक्ष का रुख अलग हो सकता है और पार्टी के चुनावी पंजीकरण से जुड़े कानूनी आधार पर जोर दिया जा सकता है।
याब्लोको ने क्या कहा?
ग्रिगोरी यावलिंस्की ने फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि अदालत का फैसला उनकी पार्टी के राजनीतिक मंच की प्रासंगिकता को ही सामने लाता है।
उनका कहना है कि शांति और स्वतंत्रता की मांग को दबाने के बजाय उस पर सार्वजनिक बहस होनी चाहिए।
पार्टी ने संकेत दिया है कि वह कानूनी प्रक्रिया के तहत फैसले को चुनौती देगी।
रूस के चुनाव पर पड़ेगा क्या असर?
याब्लोको का चुनाव से बाहर होना रूस की आगामी संसदीय राजनीति में विपक्षी विकल्पों को और सीमित कर सकता है। खासकर उन मतदाताओं के लिए जो यूक्रेन युद्ध का विरोध करते हैं और राजनीतिक बदलाव के लिए चुनावी रास्ते का इस्तेमाल करना चाहते हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या याब्लोको की अपील सफल होगी और क्या पार्टी चुनावी मैदान में वापस आ पाएगी?
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने रूस में विपक्ष, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और युद्ध-विरोधी राजनीति को लेकर बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।














