“फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन के बच्चों ने हाथ से बने उपहार भेंट कर जीता श्रद्धालुओं का दिल, कावड़ यात्रा से जुड़कर सीखा संस्कृति और आस्था का महत्व”
नोएडा, 10 अगस्त: सावन के पावन महीने में जहां एक ओर लाखों श्रद्धालु भगवान शिव की भक्ति में लीन होकर कावड़ यात्रा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नोएडा के सेक्टर-73 में एक ऐसा भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला जिसने हर किसी का दिल छू लिया। फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन के दिव्यांग और विशेष बच्चों ने कावड़ यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं का स्वागत कर न केवल भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया, बल्कि समाज को सेवा, संवेदनशीलता और समावेशिता का एक सशक्त संदेश भी दिया।
सावन के दूसरे सोमवार को आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में बच्चों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ कावड़ियों का स्वागत किया। अधिकांश बच्चों के लिए यह पहला अवसर था जब उन्होंने कावड़ यात्रा को इतने करीब से देखा और कावड़ियों से सीधे संवाद किया। बच्चों की आंखों में उत्सुकता, चेहरे पर मुस्कान और मन में श्रद्धा का भाव साफ दिखाई दे रहा था।
टीवी पर देखी थी कावड़ यात्रा, आज सामने मिले कावड़िए
फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन में अध्ययन और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कई बच्चों ने अब तक कावड़ यात्रा के बारे में केवल टीवी, मोबाइल या समाचारों के माध्यम से ही देखा और सुना था। जब उन्हें पता चला कि कावड़ यात्रा के श्रद्धालु उनके बीच आने वाले हैं, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते ही बच्चों ने फूलों और सम्मान के साथ कावड़ियों का स्वागत किया। कावड़ियों ने भी बच्चों के उत्साह और प्रेम को देखकर उन्हें स्नेहपूर्वक आशीर्वाद दिया। यह दृश्य वहां उपस्थित लोगों के लिए बेहद भावुक और प्रेरणादायक था।
बच्चों ने श्रद्धालुओं से यात्रा के अनुभवों के बारे में सवाल पूछे। उन्होंने जानना चाहा कि इतनी लंबी यात्रा कैसे पूरी की जाती है, रास्ते में किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और भगवान शिव की भक्ति उन्हें किस प्रकार शक्ति प्रदान करती है।
201 लीटर गंगाजल लेकर यात्रा कर रहे बॉबी यादव बने आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम के दौरान 201 लीटर गंगाजल लेकर कावड़ यात्रा कर रहे श्रद्धालु बॉबी यादव विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। बच्चों ने उनसे यात्रा के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।
बॉबी यादव ने बच्चों को बताया कि कावड़ यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन, त्याग और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ के प्रति अटूट विश्वास ही उन्हें इतनी कठिन यात्रा पूरी करने की शक्ति देता है।
उन्होंने बच्चों को बताया कि सावन का महीना शिवभक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है और गंगाजल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। बच्चों ने बड़ी उत्सुकता से उनकी बातें सुनीं और कई सवाल पूछे, जिनका उन्होंने बड़े प्रेम और धैर्य से उत्तर दिया।
जब बच्चों ने अपने हाथों से बनाए उपहार किए भेंट
कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षण तब आया जब फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन के बच्चों ने अपने हाथों से तैयार किए गए विशेष उपहार कावड़ियों को भेंट किए।
इन उपहारों में बच्चों द्वारा तैयार किया गया हैंडवॉश, सम्मान पत्र तथा भगवान महादेव की मिट्टी से बनाई गई सुंदर कलाकृतियां शामिल थीं। इन कलाकृतियों को बनाने में बच्चों ने कई दिनों तक मेहनत की थी।
जब बच्चों ने अपने हाथों से ये उपहार श्रद्धालुओं को सौंपे, तो कावड़ियों के चेहरे पर भावुकता और गर्व साफ दिखाई दिया। उन्होंने बच्चों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह उनके लिए किसी भी बड़े सम्मान से कम नहीं है।
कई श्रद्धालुओं ने कहा कि यह सम्मान उनके जीवन की सबसे यादगार स्मृतियों में शामिल रहेगा क्योंकि इसमें बच्चों का प्रेम, मेहनत और निष्कपट भावनाएं जुड़ी हुई हैं।
सेवा और संस्कार का जीवंत पाठ बना कार्यक्रम
फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल स्वागत या सम्मान तक सीमित नहीं था। संस्था चाहती थी कि विशेष बच्चे भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को निकट से समझें।
संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि बच्चों में सेवा, सहयोग, सम्मान और संस्कार की भावना विकसित करने के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से बच्चों का सामाजिक और भावनात्मक विकास होता है। उन्हें समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़ने का अवसर मिलता है और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
इस कार्यक्रम में बच्चों ने न केवल कावड़ यात्रा के महत्व को समझा, बल्कि यह भी सीखा कि किसी की सेवा करना और उसका सम्मान करना भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने बढ़ाया बच्चों का उत्साह
इस अवसर पर फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन के डायरेक्टर डॉ. महिपाल सिंह, मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. दीक्षा श्रीवास्तव, सीईओ डॉ. सुष्मिता भाटी, एडमिन हेड कृष्णा यादव, स्पेशल एजुकेटर इलिका रावत तथा फिजियोथेरेपिस्ट अभिनव प्रताप सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे।
सभी पदाधिकारियों ने बच्चों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम उन्हें समाज से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांग और विशेष बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं होती, आवश्यकता केवल उन्हें अवसर और प्रोत्साहन देने की होती है।
उन्होंने कहा कि बच्चों द्वारा बनाए गए उपहार इस बात का प्रमाण हैं कि यदि सही मार्गदर्शन मिले तो विशेष बच्चे भी समाज में सकारात्मक योगदान दे सकते हैं।
बच्चों की भागीदारी ने बढ़ाई कार्यक्रम की शोभा
कार्यक्रम में स्नेहा पुरी, ग्रंथ गुप्ता, वंश, सानवी सिन्हा, राजवी सिंह, राघवी सिंह और आरव सिंह सहित कई बच्चों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ तैयारियां कीं और श्रद्धालुओं का स्वागत किया। कई बच्चों ने पहली बार इतने बड़े धार्मिक आयोजन से जुड़कर नया अनुभव प्राप्त किया।
उनके अभिभावकों ने भी संस्था के इस प्रयास की सराहना की और कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वॉलंटियर्स ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था के वॉलंटियर्स का योगदान भी उल्लेखनीय रहा। दीपक सिंह, भावना सोनी, गौरी पुरी, सुनीता भाटी, अनाया सिंह, भाविका चौहान, रजत शर्मा और रितेश सिन्हा ने विभिन्न व्यवस्थाओं को संभालते हुए कार्यक्रम को सुचारु रूप से संपन्न कराया।
वॉलंटियर्स ने बच्चों को मार्गदर्शन देने से लेकर अतिथियों के स्वागत और कार्यक्रम के संचालन तक हर जिम्मेदारी को समर्पण के साथ निभाया।
समाज को दिया समावेशिता और संवेदनशीलता का संदेश
फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन का मानना है कि दिव्यांग और विशेष बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। संस्था का यह आयोजन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि समाज के प्रत्येक वर्ग को विशेष बच्चों के साथ जुड़कर उनके आत्मविश्वास और प्रतिभा को प्रोत्साहित करना चाहिए।
संस्था ने कहा कि जब समाज विशेष बच्चों को बराबरी का अवसर देता है, तब वे भी अपनी क्षमताओं से समाज को नई दिशा दे सकते हैं।
संस्कृति से जुड़ाव ही मजबूत समाज की पहचान
कार्यक्रम के अंत में फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन ने सभी सामाजिक संस्थाओं, शिक्षण संस्थानों और नागरिकों से अपील की कि वे भी ऐसे आयोजनों में भाग लें जो लोगों को अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ते हैं।
संस्था के प्रतिनिधियों ने कहा कि आधुनिक जीवन की व्यस्तता के बीच ऐसे अवसर हमें अपनी जड़ों से जुड़ने का मौका देते हैं। विशेष बच्चों को इन आयोजनों से जोड़ना न केवल उनके विकास के लिए आवश्यक है बल्कि समाज में संवेदनशीलता और समावेशिता को भी मजबूत करता है।
इस अवसर पर पप्पू यादव ने सभी अतिथियों, कावड़ियों, बच्चों, अभिभावकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। वहीं महादेव अपार्टमेंट से नरेश यादव, आमोद कुमार सहित अनेक गणमान्य नागरिक भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
सावन के इस पावन अवसर पर सेक्टर-73 में आयोजित यह आयोजन केवल एक स्वागत समारोह नहीं था, बल्कि यह आस्था, सेवा, संस्कार और सामाजिक समरसता का ऐसा उत्सव बन गया जिसने यह साबित कर दिया कि जब संवेदनाएं और संस्कार एक साथ जुड़ते हैं तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नई राहें खुलती हैं।














