“रिहाई के करीब 10 महीने बाद चाय की दुकान में मिला शव, फंदे से लटका मिला; मौत की परिस्थितियों की जांच में जुटी पुलिस”
हरिद्वार, 18 सितंबर 2026। देश के सबसे चर्चित और लंबे समय तक सुर्खियों में रहे निठारी कांड का नाम एक बार फिर सामने आया है। निठारी मामले में लंबे समय तक आरोपी और अलग-अलग मुकदमों में दोषसिद्ध रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत हो गई है। शुक्रवार को भूपतवाला क्षेत्र में एक चाय की दुकान के भीतर उसका शव फंदे से लटका मिला। शुरुआती रिपोर्टों में पुलिस अधिकारियों के हवाले से इसे आत्महत्या बताया गया है। घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।
कोली की मौत इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि करीब दो दशक तक जेल में रहने और अदालतों में कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निठारी से जुड़े उसके अंतिम लंबित मामले में भी उसकी दोषसिद्धि को रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया था। अदालत ने आदेश दिया था कि यदि किसी अन्य मामले में उसकी आवश्यकता नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए।
चाय की दुकान में मिला शव, इलाके में मचा हड़कंप
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सुरेंद्र कोली पिछले कुछ दिनों से हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में चाय की दुकान चला रहा था। शुक्रवार सुबह इसी दुकान के भीतर उसका शव मिला। रिपोर्टों में घटनास्थल को सप्त सरोवर रोड के आसपास, लाल माता मंदिर के निकट बताया गया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की।
पुलिस अब घटनास्थल से जुड़े तथ्यों, आसपास मौजूद लोगों और कोली की हाल की गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने की प्रक्रिया की गई है। मौत के कारणों और घटना की परिस्थितियों को लेकर जांच जारी है।
फिलहाल आत्महत्या के पीछे की वजह को लेकर कोई अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए किसी व्यक्तिगत, पारिवारिक या अन्य कारण को निश्चित वजह मानना जल्दबाजी होगी।
2006 में सामने आया था निठारी कांड, पूरे देश में मचा था हड़कंप
साल 2006 में नोएडा के निठारी गांव से सामने आए घटनाक्रम ने पूरे देश को झकझोर दिया था। 29 दिसंबर 2006 को नोएडा के निठारी इलाके में एक मकान के पीछे नाले से मानव अवशेष मिलने के बाद पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज हुई। इसके बाद कई बच्चों और युवतियों के लापता होने के मामलों की जांच निठारी से जुड़े घटनाक्रम से जोड़ी गई।
मामले की जांच आगे बढ़ी तो सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर के नाम प्रमुखता से सामने आए। पुलिस और सीबीआई की जांच के बाद दोनों के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज किए गए। निचली अदालतों में चली सुनवाई के दौरान कोली को अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया गया और कुछ मामलों में उसे मौत की सजा भी सुनाई गई।
लेकिन निठारी कांड की कानूनी कहानी बाद के वर्षों में पूरी तरह बदलती गई।
अदालतों में बदलती गई तस्वीर, एक के बाद एक मामलों में राहत
निठारी से जुड़े मामलों में लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान सबूतों और जांच के आधार पर गंभीर कानूनी सवाल उठे। अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी से जुड़े 12 मामलों में सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को बरी कर दिया था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों में बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा। हालांकि उस समय कोली के खिलाफ एक अन्य निठारी मामला लंबित था, जिसमें उसकी दोषसिद्धि पहले कायम थी।
फिर नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इसी अंतिम लंबित मामले में भी कोली की क्यूरेटिव पिटीशन स्वीकार कर ली और उसकी दोषसिद्धि को रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया। अदालत ने उसकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया, बशर्ते वह किसी अन्य मामले में वांछित न हो।
19 साल जेल में रहने के बाद निकला था बाहर
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सुरेंद्र कोली करीब 19 साल जेल में रहने के बाद नवंबर 2025 में जेल से बाहर आया था। उसकी रिहाई निठारी मामले की लगभग दो दशक लंबी कानूनी कहानी में एक बड़ा मोड़ थी।
जिस व्यक्ति पर कभी निठारी मामले में गंभीर आरोप लगे और जिसे अदालतों ने अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया था, वही व्यक्ति अंततः सुप्रीम कोर्ट से अपने खिलाफ लंबित अंतिम निठारी मामले में भी बरी हो गया।
लेकिन रिहाई के लगभग दस महीने बाद हरिद्वार से उसकी मौत की खबर सामने आई है।
हरिद्वार में चाय बेच रहा था कोली
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जेल से रिहाई के बाद सुरेंद्र कोली हरिद्वार पहुंचा था। पिछले कुछ दिनों से वह भूपतवाला क्षेत्र में चाय की दुकान चला रहा था। इसी दुकान के भीतर शुक्रवार को उसका शव मिला।
उसकी मौत की खबर सामने आते ही निठारी कांड एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा में आ गया है। हालांकि, इस बार कहानी का संदर्भ अलग है—कोली की मौत ऐसे समय हुई है जब निठारी से जुड़े सभी लंबित मामलों में उसे अदालत से राहत मिल चुकी थी।
आत्महत्या की वजह बनी सबसे बड़ा सवाल
सुरेंद्र कोली की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उसने यह कदम क्यों उठाया। शुरुआती रिपोर्टों में उसकी मौत को आत्महत्या बताया गया है, लेकिन मौत के पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है।
पुलिस जांच में घटनास्थल से मिले साक्ष्य, आसपास के लोगों से बातचीत, कोली के संपर्क में रहे लोगों की जानकारी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण हो सकती है। जांच पूरी होने के बाद ही मौत की परिस्थितियों को लेकर ठोस तस्वीर सामने आएगी।
इसलिए फिलहाल किसी भी संभावित कारण को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा।
निठारी कांड की कहानी का नया और अप्रत्याशित मोड़
निठारी कांड भारतीय आपराधिक न्याय व्यवस्था के सबसे चर्चित मामलों में रहा है। इसकी जांच, अदालतों में चले मुकदमे, मौत की सजा, बाद में मिली राहत और अंततः सुप्रीम कोर्ट से बरी होने तक की पूरी प्रक्रिया करीब दो दशक तक चली।
सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में अंतिम मामले में कोली को बरी करते हुए कहा था कि जिन साक्ष्यों के आधार पर उसकी दोषसिद्धि कायम थी, उसी तरह के साक्ष्यों पर आधारित अन्य मामलों में अदालतों ने बाद में उसे राहत दी थी। अदालत ने उसकी दोषसिद्धि को कायम रखना उचित नहीं माना और उसे रिहा करने का आदेश दिया।
यानी कानूनी रूप से सुरेंद्र कोली निठारी से जुड़े अंतिम मामले में बरी हो चुका था। इसलिए उसकी आज की खबर में उसे वर्तमान समय का “दोषी” कहना सही नहीं होगा।
करीब दो दशक पुरानी कहानी का आखिरी अध्याय?
सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत ने निठारी कांड की पुरानी यादों को फिर ताजा कर दिया है। एक ऐसा मामला जिसने 2006 में पूरे देश को झकझोर दिया था, उसकी कानूनी कहानी नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंची थी।
अब सितंबर 2026 में कोली की मौत ने उसी कहानी में एक और अप्रत्याशित मोड़ जोड़ दिया है।
फिलहाल पुलिस जांच जारी है। आत्महत्या की प्रारंभिक जानकारी सामने आई है, लेकिन घटना की पूरी परिस्थितियां और मौत के पीछे की वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
BREAKING UPDATE
निठारी कांड से जुड़े रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत। भूपतवाला की चाय की दुकान में मिला शव। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से निठारी के अंतिम लंबित मामले में बरी हुआ था कोली। पुलिस घटना की जांच में जुटी।















