Thursday, September 17, 2026
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92.55 करोड़ की विदेशी फंडिंग पर CBI का शिकंजा! TTI के खिलाफ FIR, 1000+ डेबिट कार्ड और डिजिटल डेटा से जुड़े गंभीर आरोप

नई दिल्ली :विशेष रिपोर्ट

अमेरिकी संस्था The Timothy Initiative (TTI) और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने विदेशी फंडिंग के कथित उल्लंघन, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को नष्ट करने के आरोपों में मामला दर्ज किया है। सीबीआई की दिल्ली स्थित आर्थिक अपराध शाखा (EO-II) ने 27 अगस्त 2026 को FIR दर्ज की है। मामला Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010 (FCRA), भारतीय न्याय संहिता (BNS) और Information Technology Act की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। मामले की जांच इंस्पेक्टर अभिषेक कुमार गुप्त को सौंपी गई है।

FIR और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच रिपोर्ट में विदेशी डेबिट कार्ड के जरिए भारत में बड़ी रकम निकाले जाने, कथित तौर पर FCRA प्रावधानों से बचने के लिए वित्तीय लेनदेन किए जाने और डिजिटल अकाउंटिंग डेटा तक पहुंच प्रतिबंधित होने जैसे गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, ये सभी आरोप जांच का हिस्सा हैं और इनकी अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

92.55 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग पर जांच एजेंसियों की नजर

CBI की FIR में दर्ज आरोपों के मुताबिक, Jonathan S Rajan, Micah Mark, Ajit Verghese Mathal, Varghese Chacko, Bablu Kurmi, Supreme Joy और The Timothy Initiative, USA के खिलाफ विदेशी फंडिंग से जुड़े कथित अनियमित लेनदेन की जांच की जा रही है।

जांच एजेंसियों का आरोप है कि नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच करीब 92.55 करोड़ रुपये, यानी लगभग 99,95,240 अमेरिकी डॉलर, विदेशी डेबिट कार्ड के जरिए भारत में इस्तेमाल किए गए। एजेंसियां इस रकम को FCRA के कथित उल्लंघनों से जोड़कर देख रही हैं।

FIR के अनुसार, विदेशी स्रोतों से प्राप्त रकम के उपयोग और भारत में उससे संबंधित गतिविधियों की जांच की जा रही है। जांच का प्रमुख बिंदु यह है कि क्या विदेशी धनराशि का इस्तेमाल कानून में निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप किया गया था या नहीं।

कई राज्यों में ATM से रकम निकाले जाने का दावा

मामले में जनवरी 2024 से मार्च 2026 के बीच करीब 44 करोड़ रुपये विदेशी डेबिट कार्ड के माध्यम से निकाले जाने का भी उल्लेख है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, असम समेत कई राज्यों में ATM से रकम निकाली गई।

जांच एजेंसियां इन निकासी के पीछे वास्तविक लाभार्थियों, कार्ड धारकों, धन के स्रोत और उसके इस्तेमाल की कड़ियों का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं। यह भी जांच का विषय है कि निकाली गई रकम किन व्यक्तियों या संस्थाओं तक पहुंची और उसका उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया गया।

हालांकि, FIR में दर्ज रकम और अलग-अलग अवधि में बताई गई निकासी के बीच संबंधों को समझने के लिए जांच के विस्तृत निष्कर्ष सामने आना जरूरी होगा।

1000 से ज्यादा विदेशी डेबिट कार्ड: ED रिपोर्ट में बड़ा दावा

मामले की गंभीरता उस समय और बढ़ गई, जब ED की जांच रिपोर्ट में भारत में 1000 से ज्यादा विदेशी डेबिट कार्ड वितरित किए जाने का दावा सामने आया। इसी रिपोर्ट के आधार पर गृह मंत्रालय के FCRA विंग ने CBI जांच की सिफारिश की।

रिपोर्ट के अनुसार, 18 अप्रैल 2026 को बेंगलुरु एयरपोर्ट पर Micah Mark के पास 24 विदेशी डेबिट कार्ड मिले थे। जांच एजेंसी का कहना है कि इन कार्डों पर ‘Santosh Kumar’ नाम दर्ज था।

ED ने आरोप लगाया है कि इन कार्डों को वास्तविक उपयोगकर्ता की पहचान छिपाने और KYC नियमों से बचने के उद्देश्य से इस नाम पर जारी कराया गया था। यह आरोप जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि विदेशी बैंकिंग साधनों के जरिए भारत में धनराशि के इस्तेमाल और निकासी की वास्तविक व्यवस्था का पता लगाना जांच एजेंसियों की प्राथमिकता है।

कार्ड किसके लिए और किस उद्देश्य से इस्तेमाल हुए?

जांच रिपोर्ट में कार्डों के कथित वितरण का उल्लेख करते हुए एजेंसियों ने इस बात पर सवाल उठाए हैं कि क्या इनका इस्तेमाल वास्तविक लाभार्थियों की पहचान छिपाने के लिए किया गया। विदेशी डेबिट कार्ड के जरिए ATM से निकासी के मामलों में कार्ड जारी करने वाली संस्था, उपयोगकर्ता की पहचान, निकासी का स्थान और रकम के अंतिम इस्तेमाल जैसे बिंदुओं की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

CBI अब FIR के आधार पर इन आरोपों की जांच करेगी। जांच के दौरान बैंकिंग रिकॉर्ड, ATM लेनदेन, संबंधित व्यक्तियों के बयान और अन्य उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर घटनाक्रम की पुष्टि की जा सकती है।

TTI के भारत में ऑपरेशंस और वित्तीय संचालन की जांच

ED की रिपोर्ट में Jonathan Rajan को TTI के भारत में ऑपरेशंस का प्रभारी और Ajit Verghese Mathai को वित्तीय संचालन से जुड़ा प्रमुख व्यक्ति बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी डेबिट कार्ड से ATM के जरिए निकाली गई रकम का इस्तेमाल भारत में TTI की गतिविधियों के लिए किया जाता था।

जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि इन गतिविधियों में प्रशिक्षण, धार्मिक प्रचार और अन्य कार्य शामिल थे। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि TTI ने भारत में 95 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च किया।

इन आरोपों की जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि धनराशि किन खातों या व्यक्तियों के माध्यम से संचालित हुई, किन गतिविधियों पर खर्च की गई और क्या संबंधित लेनदेन FCRA के तहत लागू कानूनी प्रावधानों के अनुरूप थे।

विदेशी फंडिंग से जुड़े मामलों में केवल रकम का स्रोत ही नहीं, बल्कि उसके उपयोग, रिकॉर्डिंग और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया भी जांच का हिस्सा बनती है। इसी वजह से इस मामले में वित्तीय दस्तावेजों और डिजिटल अकाउंटिंग रिकॉर्ड को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

डिजिटल डेटा डिलीट करने के आरोपों ने बढ़ाई जांच की गंभीरता

CBI की FIR में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को नष्ट करने या उन्हें उपलब्ध नहीं रहने देने से जुड़े आरोप भी शामिल हैं। ED की रिपोर्ट के मुताबिक, 18 अप्रैल 2026 को Micah Mark के ठिकाने पर तलाशी के दौरान Bill.com, QuickBooks और एक HP लैपटॉप पर वित्तीय तथा अकाउंटिंग से संबंधित डेटा मौजूद था।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उसी दिन Bill.com पर भारत से संबंधित जानकारी का एक्सेस प्रतिबंधित हो गया और लैपटॉप को पूरी तरह वाइप कर दिया गया। इसके अगले दिन QuickBooks पर भारत से संबंधित डेटा तक पहुंच भी प्रतिबंधित होने की बात कही गई है।

ED ने इन घटनाओं को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को नष्ट करने या जांच के लिए उपलब्ध नहीं रहने देने से जोड़कर देखा है। इसी संदर्भ में BNS की धारा 238 के तहत कार्रवाई का आधार बनाए जाने का उल्लेख किया गया है।

अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर और लैपटॉप की जांच अहम

डिजिटल रिकॉर्ड किसी भी वित्तीय जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। इनमें लेनदेन, भुगतान, खर्च, प्राप्त धन और संबंधित व्यक्तियों की गतिविधियों की जानकारी मिल सकती है। इसलिए जांच एजेंसियां यह निर्धारित करने का प्रयास कर सकती हैं कि डेटा तक पहुंच प्रतिबंधित होने या लैपटॉप वाइप किए जाने की घटनाएं किसके निर्देश पर हुईं और उनका वास्तविक प्रभाव क्या रहा।

हालांकि, डेटा डिलीट किए जाने का आरोप अपने आप में किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी सिद्ध नहीं करता। इसके लिए डिजिटल फॉरेंसिक जांच, तकनीकी रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटनाओं की पुष्टि आवश्यक होगी।

गृह मंत्रालय ने CBI को क्यों सौंपी जांच?

मामले में गृह मंत्रालय के FCRA विंग की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। ED से प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर मंत्रालय ने आगे की जांच CBI को सौंपने की सिफारिश की।

मंत्रालय के पत्र में FCRA की धारा 43 और केंद्र सरकार की अधिसूचना के तहत मामले की आगे की जांच CBI द्वारा किए जाने का उल्लेख किया गया है। इसके बाद CBI की आर्थिक अपराध शाखा ने 27 अगस्त 2026 को FIR दर्ज की।

FCRA विदेशी योगदान प्राप्त करने और उसके उपयोग से संबंधित नियमों का कानूनी ढांचा प्रदान करता है। किसी संस्था या व्यक्ति पर कानून के उल्लंघन का आरोप लगने पर जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड, अनुमति, लेनदेन और धनराशि के इस्तेमाल की जांच कर सकती हैं।

अन्य कानूनों के उल्लंघन की जानकारी मिलने पर कार्रवाई संभव

गृह मंत्रालय ने यह भी कहा है कि जांच के दौरान यदि Income Tax Act या Prevention of Money Laundering Act (PMLA) समेत अन्य कानूनों के उल्लंघन की जानकारी सामने आती है, तो संबंधित सक्षम एजेंसियों को उचित कार्रवाई के लिए संदर्भ भेजा जा सकता है।

इसका अर्थ है कि जांच केवल FCRA से जुड़े आरोपों तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि साक्ष्यों के आधार पर अन्य संभावित कानूनी पहलुओं की भी जांच हो सकती है। हालांकि, आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और संबंधित एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र पर निर्भर करेगी।

अब CBI की जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?

FIR दर्ज होने के बाद मामले में कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं। इनमें विदेशी डेबिट कार्ड जारी होने की वास्तविक प्रक्रिया, कार्डों के कथित वितरण की व्यवस्था, ATM से निकाली गई रकम के अंतिम लाभार्थी और TTI की गतिविधियों में धनराशि के इस्तेमाल से जुड़े तथ्य शामिल हैं।

जांच एजेंसी यह भी पता लगा सकती है कि विदेशी धनराशि के लेनदेन में कौन-कौन से बैंकिंग चैनल इस्तेमाल हुए और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका क्या रही। डिजिटल डेटा से जुड़े आरोपों की पुष्टि के लिए तकनीकी साक्ष्यों का परीक्षण किया जाना भी अहम होगा।

जांच के दौरान आरोपित व्यक्तियों के बयान, बैंक रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके बाद ही आरोपों की वास्तविकता और संबंधित व्यक्तियों की संभावित कानूनी जिम्मेदारी पर स्पष्ट निष्कर्ष सामने आएंगे।

FCRA के कथित उल्लंघन से लेकर डिजिटल साक्ष्यों तक, कई मोर्चों पर जांच

The Timothy Initiative, USA और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज यह मामला विदेशी फंडिंग, बैंकिंग लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों से जुड़े कई आरोपों को एक साथ सामने लाता है। 92.55 करोड़ रुपये की कथित विदेशी फंडिंग, 1000 से अधिक डेबिट कार्ड वितरित किए जाने का दावा और डिजिटल डेटा मिटाने के आरोप इस जांच के प्रमुख पहलू हैं।

CBI की FIR के बाद अब मामले में साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच की जाएगी। ED की रिपोर्ट और FIR में दर्ज आरोपों को न्यायिक रूप से स्थापित तथ्यों से अलग समझना जरूरी है। आरोपों की पुष्टि या खंडन जांच और न्यायिक प्रक्रिया के परिणामों के आधार पर ही किया जा सकेगा।

27 अगस्त 2026 को दर्ज FIR ने विदेशी फंडिंग से जुड़े इस मामले को औपचारिक आपराधिक जांच के दायरे में ला दिया है। अब जांच का केंद्र यह रहेगा कि विदेशी रकम का प्रवाह कैसे हुआ, उसका इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया गया और क्या संबंधित लेनदेन में कानून का उल्लंघन हुआ था।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
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