Wednesday, August 26, 2026
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नेपाल में कुदरत का कहर: 400 लापता, 46 की मौत; भारत में गंडक को लेकर हाई अलर्ट

काठमांडू/नई दिल्ली: नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। बाढ़ के बाद करीब 400 लोगों के लापता होने की खबर है, जबकि कम से कम 46 लोगों की मौत की बात सामने आ रही है। लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है, जिनमें 105 भारतीय पर्यटक और 37 एनआरआई शामिल बताए जा रहे हैं। बाढ़ ने नेपाल के कई इलाकों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। कई बस्तियां जलमग्न हो गईं, सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए तथा बड़ी संख्या में वाहन और सामान तेज बहाव में बह गए।

आपदा की गंभीरता को देखते हुए भारत ने भी स्थिति पर नजर तेज कर दी है। भारतीय वायुसेना के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, बुधवार रात राहत एवं बचाव अभियान में मदद के लिए C-17 विमान के काठमांडू रवाना होने की संभावना है। वहीं C-130 विमान राहत सामग्री लेकर जाने की तैयारी में है। इसके साथ ही राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी NDRF की बाढ़ राहत टीमों को स्टैंडबाय पर रखा गया है।

नेपाल की बाढ़ का असर भारत तक पहुंचने का खतरा

नेपाल में आई बाढ़ के बाद भारत के सीमावर्ती राज्यों में भी चिंता बढ़ गई है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) की सलाह और सामने आई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नेपाल-चीन सीमा के करीब ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF जैसी गतिविधि की आशंका के बीच फुरके खोला के पास त्रिशूली नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि दर्ज की गई है।

बताया जा रहा है कि यह इलाका भारतीय सीमा से करीब 160 किलोमीटर दूर है। अचानक बढ़े जलस्तर के कारण बाढ़ की लहर के आगे बढ़कर गंडक नदी में पहुंचने की आशंका जताई गई है। इसी को देखते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश में भारत-नेपाल सीमा के आसपास गंडक नदी के किनारे रहने वाले लोगों और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

प्रशासन को नदी के जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। हालात बिगड़ने की स्थिति में प्रभावित इलाकों में तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू करने की तैयारी भी की जा रही है।

हाई अलर्ट पर NDRF, बिहार में 9 टीमें तैनात

नेपाल में आई बाढ़ को देखते हुए बिहार में भी प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। गंडक नदी में संभावित जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए NDRF की टीमों को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है।

रिपोर्टों के मुताबिक, बिहार के मुख्यमंत्री ने स्थिति का जायजा लिया है और खास तौर पर गंडक नदी के आसपास के क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाई गई है। पश्चिमी चंपारण और मुजफ्फरपुर में NDRF की दो टीमें भेजी गई हैं। राज्य में कुल 9 NDRF टीमें तैनात बताई जा रही हैं।

राज्य सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अगर नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ता है या किसी इलाके में बाढ़ का खतरा पैदा होता है, तो अतिरिक्त NDRF टीमों को भी तत्काल मौके पर भेजा जा सकता है।

कुशीनगर में भी NDRF की अतिरिक्त टीम पहुंची

नेपाल से निकलने वाली नदियों के संभावित प्रभाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश में भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है। कुशीनगर जिले में NDRF की एक अतिरिक्त टीम तैनात की गई है। गंडक नदी के करीब होने के कारण कुशीनगर को भी संवेदनशील क्षेत्रों में रखा गया है।

उत्तर प्रदेश में बाढ़ की चेतावनी और राहत-बचाव कार्यों के लिए कुल 11 टीमें तैनात बताई गई हैं। NDRF के मुताबिक, वह बिहार और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों तथा केंद्रीय जल आयोग के साथ लगातार समन्वय कर स्थिति पर नजर रख रहा है।

अधिकारियों के मुताबिक, किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त टीमें स्टैंडबाय पर हैं। प्रशासन की प्राथमिकता नदी के किनारे बसे इलाकों में रहने वाले लोगों को समय रहते सतर्क करना और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है।

291 विदेशी नागरिक समेत करीब 400 लोग लापता

नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, अचानक आई बाढ़ के बाद 291 विदेशी नागरिकों और 93 नेपाली नागरिकों समेत करीब 400 लोगों के लापता होने की सूचना है। विदेशी नागरिकों में 105 भारतीय पर्यटक और 37 एनआरआई शामिल बताए गए हैं।

लापता लोगों में भारत के अलावा अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड के नागरिक भी शामिल हैं। कुछ लोगों की राष्ट्रीयता की अभी पुष्टि नहीं हुई है।

बाढ़ के बाद नेपाल सरकार ने बड़े पैमाने पर खोज एवं बचाव अभियान शुरू किया है। नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस की टीमें प्रभावित इलाकों में भेजी गई हैं। राहतकर्मी मलबे और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं।

14 हेलीकॉप्टर और ड्रोन से चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन

लापता लोगों की तलाश के लिए आधुनिक संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। राहत और बचाव अभियान में ड्रोन, खोजी कुत्तों और करीब 14 हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों और बाढ़ से कट चुके क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए हवाई अभियान बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।

तेज बहाव और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण कई इलाकों में जमीन के रास्ते राहत पहुंचाना मुश्किल बना हुआ है। ऐसे में हेलीकॉप्टरों के जरिए प्रभावित लोगों तक जरूरी सामग्री पहुंचाने और गंभीर रूप से फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा रही है।

बाढ़ के पीछे GLOF या भूस्खलन की आशंका

नेपाल में अचानक आई इस विनाशकारी बाढ़ के पीछे की वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। नेपाल के जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग ने कहा है कि रसुवा में हुई बारिश को इस बाढ़ का सीधा कारण नहीं माना जा रहा है।

अधिकारियों की जांच इस बात पर केंद्रित है कि कहीं यह घटना किसी हिमनदी झील के फटने यानी GLOF, भूस्खलन या सीमा के तिब्बती हिस्से में हुई किसी अन्य प्राकृतिक घटना का परिणाम तो नहीं है।

भोटे कोशी नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने से स्थिति बेहद गंभीर हुई। इसके बाद नदी का पानी तेज रफ्तार से आगे बढ़ा और अपने रास्ते में आने वाले इलाकों को प्रभावित करता गया। अचानक आई बाढ़ ने स्थानीय लोगों को संभलने का पर्याप्त मौका भी नहीं दिया।

रसुवा सबसे ज्यादा प्रभावित, पुल और वाहन बहे

इस आपदा में नेपाल का रसुवा जिला सबसे बुरी तरह प्रभावित बताया जा रहा है। तिमुरे और स्याफ्रुबेसी समेत कई क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ है। सीमा शुल्क परिसर में खड़े कई वाहन और वहां रखा सामान बाढ़ के तेज बहाव में बह गया।

हाल ही में बनाया गया एक पुल भी बाढ़ की चपेट में आकर नष्ट हो गया। इसके अलावा नदी किनारे बसे कई गांवों और बस्तियों में पानी और मलबा घुस गया। स्याफ्रुबेसी, बेत्रावती, मैलुंग, सलेटार, शांतिबाजार, पैरेबेसी, खाल्टी बस्ती, सोल, त्रिशूली और बत्तर समेत कई इलाकों में बाढ़ का असर देखा गया है।

भारत ने बढ़ाई निगरानी, राहत अभियान की तैयारी

नेपाल की स्थिति को देखते हुए भारत में भी केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाया गया है। खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश में गंडक नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन को संभावित बाढ़ की स्थिति में संवेदनशील इलाकों की पहचान करने और स्थानीय स्तर पर तैयारियां मजबूत रखने को कहा गया है।

भारतीय वायुसेना के संभावित राहत अभियान और NDRF की तैनाती से संकेत है कि भारत नेपाल में पैदा हुए इस प्राकृतिक संकट के बीच हरसंभव सहायता देने की तैयारी में है।

फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों को खोज निकालना, प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और भारत की सीमा से सटे इलाकों में गंडक नदी के संभावित खतरे से निपटना है। आने वाले घंटों में नदी के जलस्तर और मौसम की स्थिति पर भारत और नेपाल दोनों की निगाहें टिकी हुई हैं।

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VIKAS TRIPATHI
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