Saturday, August 29, 2026
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मोहन भागवत का न्यूयॉर्क में कृष्ण संदेश: “जीवन से भागें नहीं, डटकर खड़े रहें और अपना कर्तव्य निभाएं”

न्यूयॉर्क: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित इस्कॉन मंदिर में लोगों को संबोधित करते हुए आध्यात्मिक चेतना, मानव एकता, कर्तव्य और सेवा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया में विविधता, मतभेद और टकराव के बावजूद मनुष्य के भीतर एक ऐसी गहरी चेतना है, जो सभी को एक सूत्र में जोड़ती है। भागवत ने कहा कि “पूरी दुनिया कृष्णमय है और हमें उनकी चेतना को जगाना होगा।”

न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान भागवत ने मैनहट्टन स्थित इस्कॉन के उस ऐतिहासिक स्थल का भी दौरा किया, जहां 1966 में इस्कॉन के संस्थापक श्रील प्रभुपाद ने न्यूयॉर्क में अपनी आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत की थी। इस मौके पर उन्होंने भगवान की आरती और प्रार्थना में हिस्सा लिया तथा जरूरतमंद और बेघर लोगों के लिए चलाए जा रहे भोजन वितरण कार्यक्रम में भी भाग लिया।

“विविधता के बावजूद अंततः सब कुछ कृष्ण ही हैं”

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने भगवद्गीता की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया में अनेक प्रकार की विविधताएं, विरोधाभास और टकराव दिखाई देते हैं, लेकिन इनके बीच भी एकता की गहरी समझ मौजूद है। उनके मुताबिक, यही भगवद्गीता की मूल शिक्षा है कि मनुष्य परिस्थितियों से भागने के बजाय अपने कर्तव्य का निर्वहन करे।

उन्होंने कहा, “हम सब एक हैं और इस दुनिया के विरोधाभासों के बीच भी यह गहरी समझ रखते हैं कि इतनी विविधता, टकराव और विरोधाभासों के बावजूद अंततः सब कुछ कृष्ण ही हैं।”

भागवत ने लोगों से जीवन की कठिन परिस्थितियों से बचने के बजाय उनका सामना करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने दायित्वों से पीछे नहीं हटना चाहिए और यह समझना चाहिए कि उसके आसपास की पूरी सृष्टि में एक दिव्य तत्व मौजूद है।

उन्होंने कहा कि यदि यह संदेश हर व्यक्ति के दिल तक पहुंच जाए तो दुनिया को बेहतर बनाया जा सकता है। उनके अनुसार, ऐसी चेतना मानव समाज को केवल भौतिक सीमाओं तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि पूरी दुनिया को इंसानों के लिए बेहतर और स्वर्ग जैसी जगह बनाने की दिशा में ले जा सकती है।

कॉर्पोरेट संगठन का उदाहरण देकर समझाई सामूहिक जिम्मेदारी

मोहन भागवत ने अपने संबोधन में आध्यात्मिक विचारों को समझाने के लिए कॉर्पोरेट संगठन का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि किसी कंपनी में डायरेक्टर और CEO एक रणनीतिक योजना तैयार करते हैं और उसके बाद बड़ी संख्या में कर्मचारी उस विजन को साकार करने के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते हैं।

उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को पूरी योजना की जानकारी हो, यह जरूरी नहीं है। कुछ लोग संगठन के व्यापक उद्देश्य को पूरी तरह समझते हैं, जबकि कुछ लोग केवल अपने हिस्से का काम करते हैं। इसके बावजूद सभी एक अंतिम लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते हैं।

भागवत के मुताबिक, जब संगठन के प्रत्येक व्यक्ति को यह अहसास हो जाता है कि वह एक साझा उद्देश्य के लिए काम कर रहा है, तो प्रगति की गति कई गुना बढ़ जाती है। इसी उदाहरण के जरिए उन्होंने आध्यात्मिक सेवा और सामाजिक दायित्व के बीच संबंध समझाया।

उन्होंने इस्कॉन से जुड़े लोगों को बधाई देते हुए कहा कि जिस प्रकार किसी संगठन के लोग साझा लक्ष्य के लिए काम करते हैं, उसी तरह समाज में रहने वाले लोगों को भी यह समझ विकसित करनी चाहिए कि वे एक व्यापक दिव्य उद्देश्य का हिस्सा हैं।

“इस्कॉन में रोज आना कृष्ण चेतना से जुड़े रहने का अवसर”

RSS प्रमुख ने इस्कॉन से जुड़े लोगों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें इस पवित्र स्थान पर बार-बार आने और लगातार कृष्ण चेतना से जुड़े रहने का अवसर मिलता है। उन्होंने इसे सौभाग्य बताते हुए कहा कि आध्यात्मिक चेतना केवल किसी एक दिन या अवसर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

भागवत ने कहा कि सेवा, कर्तव्य और आध्यात्मिक चेतना को साथ लेकर चलने से समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।

उन्होंने RSS की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने का भी उल्लेख किया और कहा कि संघ भी इसी प्रकार समाज को उच्च चेतना की ओर ले जाने तथा लोगों को सामाजिक जिम्मेदारियों के लिए तैयार करने का प्रयास करता रहा है।

26 सेकंड एवेन्यू: प्रभुपाद की ऐतिहासिक विरासत

मोहन भागवत का न्यूयॉर्क दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि उन्होंने 26 सेकंड एवेन्यू स्थित उस स्थान का दौरा किया, जिसका इस्कॉन के इतिहास में विशेष महत्व है। यही वह स्थान है जहां श्रील प्रभुपाद ने 1966 में इस्कॉन की स्थापना के शुरुआती दिनों में अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाया था।

इस्कॉन की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भागवत ने प्रार्थना और आरती में हिस्सा लिया। इस दौरान जरूरतमंद लोगों के लिए भोजन वितरण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।

इस्कॉन के गवर्निंग बॉडी कमीशन (GBC) के सदस्य गौरांग दास ने भागवत के दौरे को संगठन के लिए गौरव का अवसर बताया। उन्होंने कहा कि 1966 में श्रील प्रभुपाद ने न्यूयॉर्क से इस्कॉन की स्थापना की थी और अब 60 वर्ष बाद उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए संगठन आध्यात्मिकता और सेवा के क्षेत्र में काम कर रहा है।

“आध्यात्मिकता, सेवा और सामाजिक बदलाव पर हो रही चर्चा”

गौरांग दास के अनुसार, मोहन भागवत की यात्रा के दौरान तीन प्रमुख विषयों—आध्यात्मिकता, सेवा और सामाजिक बदलाव—पर चर्चा हो रही है। उन्होंने बताया कि इस्कॉन पिछले एक साल से न्यूयॉर्क में ‘जीरो हंगर न्यूयॉर्क’ नाम से भोजन वितरण अभियान चला रहा है।

इसी अभियान के तहत 1,00,000वीं प्लेट भोजन परोसे जाने के अवसर को विशेष कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया। भागवत को इसी कार्यक्रम के उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया गया था।

गौरांग दास ने कहा कि इस्कॉन का उद्देश्य आध्यात्मिक विचारों को केवल मंदिरों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें लोगों के दैनिक जीवन से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की शिक्षाओं को अधिक से अधिक घरों तक पहुंचाने और लोगों को उन्हें व्यवहार में अपनाने के तरीकों पर भी चर्चा हो रही है।

RSS के 100 साल और इस्कॉन के 60 साल का संयोग

इस पूरे कार्यक्रम में RSS और इस्कॉन की वर्षगांठ का संयोग भी चर्चा का विषय रहा। वर्ष 2026 में RSS अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने का अवसर मना रहा है, जबकि इस्कॉन अपनी स्थापना की 60वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।

इस्कॉन की ओर से कहा गया कि दोनों संगठनों की अपनी-अपनी भूमिका और कार्यक्षेत्र हैं, लेकिन सेवा, समाज और आध्यात्मिक चेतना जैसे विषयों पर संवाद की संभावनाएं मौजूद हैं।

भागवत ने भी अपने संबोधन में सामाजिक संगठन और साझा उद्देश्य की अवधारणा को रेखांकित किया। उनका संदेश था कि व्यक्तिगत जीवन, सामाजिक जिम्मेदारी और आध्यात्मिक चेतना को अलग-अलग खांचों में देखने के बजाय उन्हें एक-दूसरे से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

न्यूयॉर्क में कार्यक्रम को लेकर विरोध भी

हालांकि मोहन भागवत के न्यूयॉर्क दौरे के दौरान जहां एक ओर इस्कॉन में उनका स्वागत किया गया, वहीं दूसरी ओर 29 अगस्त को प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर विरोध भी सामने आया है।

न्यूयॉर्क में मैडिसन स्क्वायर गार्डन में होने वाले ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ को लेकर कुछ संगठनों ने आपत्ति जताई है। कार्यक्रम का आयोजन AHEAD Forum की ओर से किया जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि RSS की विचारधारा को लेकर उनके अपने मत और आपत्तियां हैं।

न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी की ओर से भी RSS को लेकर टिप्पणी किए जाने का उल्लेख सामने आया है। वहीं अमेरिका में सक्रिय कुछ हिंदू संगठनों ने भी कार्यक्रम का विरोध किया है।

‘हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स’ की निदेशक सुनीता विश्वनाथ के अनुसार, 61 धार्मिक और सेक्युलर संगठनों ने कार्यक्रम के खिलाफ एक खुला पत्र लिखा है। उनका दावा है कि इन संगठनों से जुड़े कई लोग कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर यह संदेश देंगे कि RSS की विचारधारा उनका प्रतिनिधित्व नहीं करती।

आध्यात्मिक संदेश बनाम राजनीतिक विरोध

न्यूयॉर्क में मोहन भागवत का दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब एक तरफ इस्कॉन अपनी ऐतिहासिक यात्रा के 60 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है और दूसरी तरफ RSS अपनी शताब्दी के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रिय है।

भागवत ने अपने संबोधन में राजनीतिक मुद्दों के बजाय आध्यात्मिक चेतना, कर्तव्य और सेवा को केंद्र में रखा। उन्होंने भगवद्गीता की शिक्षाओं के जरिए लोगों को जीवन की चुनौतियों का सामना करने और अपने कर्तव्य को निभाने का संदेश दिया।

उनका जोर इस बात पर रहा कि मनुष्य अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर व्यापक समाज और मानवता के हित में काम करे। उन्होंने कहा कि यदि एकता और दिव्य चेतना का यह संदेश हर दिल तक पहुंचता है, तो दुनिया के मौजूदा विरोधाभासों को कम करने की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है।

न्यूयॉर्क में भागवत का यह दौरा इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि यह केवल एक धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा। इसमें आध्यात्मिकता के साथ सेवा, भूख के खिलाफ अभियान, सामाजिक बदलाव और मानव एकता जैसे मुद्दे भी सामने आए। एक ओर 26 सेकंड एवेन्यू की ऐतिहासिक विरासत ने अतीत की याद दिलाई, तो दूसरी ओर ‘जीरो हंगर’ जैसे कार्यक्रमों ने सेवा के वर्तमान स्वरूप को सामने रखा।

मोहन भागवत का संदेश साफ था—जीवन से भागना नहीं है, चुनौतियों के बीच खड़े रहना है, अपना कर्तव्य निभाना है और यह समझना है कि समूची मानवता एक व्यापक दिव्य चेतना से जुड़ी है। वहीं कार्यक्रम को लेकर हो रहा विरोध यह भी दिखाता है कि अमेरिका में भारतीय धार्मिक-सांस्कृतिक संगठनों की बढ़ती सक्रियता के साथ वैचारिक बहस भी तेज हो रही है।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
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