“20 मिनट की समय सीमा पार होने पर चेयर ने रोका, तेजस्वी बोले– ‘बार-बार क्यों टोक रहे हैं?”
नई दिल्ली: लोकसभा में मंगलवार को सार्वजनिक परीक्षा सुधार विधेयक (एंटी पेपर लीक बिल) पर चर्चा के दौरान उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के युवा सांसद तेजस्वी सूर्या और अध्यक्षीय आसन पर बैठे वरिष्ठ भाजपा सांसद जगदंबिका पाल के बीच समय सीमा को लेकर तीखी नोकझोंक हो गई। सदन में चल रही गंभीर बहस के बीच यह घटनाक्रम कुछ देर के लिए चर्चा का केंद्र बन गया।
दरअसल, भाजपा की ओर से सार्वजनिक परीक्षा सुधार विधेयक पर बोलने के लिए तेजस्वी सूर्या को 20 मिनट का समय निर्धारित किया गया था। हालांकि, निर्धारित समय पूरा होने के बाद भी वह अपना भाषण जारी रखे हुए थे। ऐसे में अध्यक्षीय आसन पर बैठे जगदंबिका पाल ने उन्हें अपना वक्तव्य समाप्त करने का संकेत दिया। पहले तो सूर्या ने दो मिनट का अतिरिक्त समय मांगा, लेकिन जब कुछ देर बाद भी उन्हें फिर रोका गया तो उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “दो मिनट दीजिए अध्यक्ष जी… बार-बार क्यों टोक रहे हैं? पार्टी ने मुझे 20 मिनट का समय दिया है।”
‘क्यों न टोकेंगे, यह गलत बात है’— जगदंबिका पाल का सख्त जवाब
तेजस्वी सूर्या की टिप्पणी के बाद सदन का माहौल कुछ पल के लिए तनावपूर्ण हो गया। जगदंबिका पाल ने भी स्पष्ट शब्दों में जवाब देते हुए कहा, “क्यों न टोकेंगे? यह गलत बात है। यह कौन-सी बात है?”
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सदन की कार्यवाही निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार चलती है और प्रत्येक दल के कई सांसदों को बोलने का अवसर दिया जाना होता है। इसलिए किसी एक सदस्य को तय समय से अधिक बोलने देना अन्य वक्ताओं के अधिकारों को प्रभावित करता है।
प्रल्हाद जोशी ने संभाला मोर्चा, बोले– पांच मिनट और दे दीजिए
स्थिति को सामान्य बनाने के लिए केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी बीच में हस्तक्षेप करते हुए खड़े हुए। उन्होंने अध्यक्षीय आसन से आग्रह किया कि तेजस्वी सूर्या को कुछ और समय दिया जाए।
जोशी ने कहा, “अध्यक्ष जी, इन्हें बोलने दीजिए। पांच मिनट और दे दीजिए, हम पार्टी के समय में एडजस्ट कर लेंगे।”
इसके जवाब में जगदंबिका पाल ने कहा कि तेजस्वी सूर्या को पहले ही निर्धारित 20 मिनट के स्थान पर करीब 27 मिनट का समय मिल चुका है और अन्य सांसद भी अपनी बात रखने के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं।
अंततः अध्यक्ष ने समय सीमा का पालन कराने पर जोर दिया और चर्चा आगे बढ़ाई।
एंटी पेपर लीक बिल पर चल रही थी महत्वपूर्ण बहस
यह पूरा घटनाक्रम उस समय हुआ जब लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा सुधार विधेयक पर गंभीर चर्चा चल रही थी। इस विधेयक का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाना, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करना तथा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाना है।
सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में कई राज्यों में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। इसी कारण इस कानून को सख्त बनाने की आवश्यकता महसूस की गई।
तेजस्वी सूर्या अपने भाषण में परीक्षा प्रणाली में सुधार, युवाओं के भविष्य की सुरक्षा तथा पेपर माफिया के खिलाफ कठोर कार्रवाई की आवश्यकता पर विस्तार से अपने विचार रख रहे थे। इसी दौरान समय सीमा का मुद्दा सामने आया।
सुप्रिया सुले ने उठाए संसदीय गरिमा के सवाल
तेजस्वी सूर्या के भाषण के बाद अध्यक्ष ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले को बोलने के लिए आमंत्रित किया। अपने संबोधन की शुरुआत में ही उन्होंने अभी-अभी हुई घटना का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी की भूमिका पर सवाल उठाए।
सुप्रिया सुले ने कहा कि उन्होंने सदन में एक कैबिनेट मंत्री को अपने पार्टी सांसद के लिए अतिरिक्त समय मांगते हुए देखा, जो संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं लगता।
उन्होंने टिप्पणी की, “हमने अभी शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी को कहते हुए देखा कि हमारे वक्ता को पांच मिनट और दे दीजिए। क्या यह एक कैबिनेट मंत्री की गरिमा के अनुरूप है? यह संसद है, किसी पार्टी का मंच नहीं।”
उन्होंने यह भी कहा कि संसद में समय प्रबंधन और कार्यवाही का संचालन पूरी तरह अध्यक्षीय आसन के अधिकार क्षेत्र का विषय है और सभी सदस्यों को उसकी गरिमा बनाए रखनी चाहिए।
नीट प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल की जांच की मांग
सुप्रिया सुले ने अपने भाषण में सार्वजनिक परीक्षा सुधार विधेयक से जुड़े व्यापक मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने हाल ही में दिल्ली में नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने मांग की कि उन परिस्थितियों की जांच के लिए एक स्वतंत्र जांच समिति गठित की जाए, जिनमें प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित रूप से पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया।
सुले ने कहा कि यदि छात्रों पर बल प्रयोग हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों को अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखने का अधिकार है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
समय प्रबंधन और संसदीय अनुशासन पर फिर छिड़ी बहस
लोकसभा की इस घटना ने एक बार फिर संसदीय कार्यवाही में समय प्रबंधन और अनुशासन के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। संसद में प्रत्येक दल को उसकी संख्या के अनुसार बोलने का समय आवंटित किया जाता है और उसी के आधार पर सभी सांसदों को अवसर मिलता है।
ऐसी स्थिति में यदि कोई सदस्य निर्धारित समय से अधिक बोलता है तो अध्यक्षीय आसन का दायित्व होता है कि वह समय सीमा का पालन कराए, ताकि अन्य सदस्यों को भी बराबर अवसर मिल सके।
हालांकि, कई बार महत्वपूर्ण विषयों पर बोल रहे सांसदों को कुछ अतिरिक्त समय भी दिया जाता है, लेकिन इसका अंतिम निर्णय पूरी तरह अध्यक्षीय आसन के विवेक पर निर्भर करता है।
एंटी पेपर लीक कानून पर सरकार की मंशा स्पष्ट
सार्वजनिक परीक्षा सुधार विधेयक को सरकार युवाओं के भविष्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम बता रही है। सरकार का दावा है कि इस कानून के लागू होने के बाद प्रश्नपत्र लीक कराने वाले संगठित गिरोहों, परीक्षा माफिया और तकनीकी माध्यमों से धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई संभव होगी।
विपक्ष का कहना है कि कानून बनाने के साथ-साथ उसकी प्रभावी क्रियान्वयन व्यवस्था, परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही और छात्रों के हितों की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
सदन की बहस से अधिक चर्चा में रही नोकझोंक
एंटी पेपर लीक बिल पर हुई विस्तृत बहस के बीच तेजस्वी सूर्या और जगदंबिका पाल के बीच समय सीमा को लेकर हुई तीखी बातचीत पूरे घटनाक्रम का सबसे चर्चित हिस्सा बन गई। हालांकि बाद में सदन की कार्यवाही सामान्य रूप से आगे बढ़ी, लेकिन इस घटना ने संसदीय मर्यादा, अध्यक्षीय अधिकार और वक्ताओं के समय प्रबंधन को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी। वहीं, सुप्रिया सुले द्वारा उठाए गए सवालों और नीट प्रदर्शन से जुड़े मुद्दों ने इस चर्चा को और राजनीतिक रंग दे दिया।














