“174 यात्रियों की जिंदगी हवा में अटकी, कथित तौर पर को-पायलट ने संभालने की कोशिश की कमान—घायल होने के बावजूद भारतीय पायलट स्मित मछार पहुंचे कॉकपिट तक, यात्रियों और दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा”
नई दिल्ली: आसमान में उड़ता एक यात्री विमान, हजारों फीट नीचे जमीन और ऊपर सिर्फ आसमान… ऐसे में अगर विमान के कॉकपिट के भीतर ही नियंत्रण को लेकर संकट पैदा हो जाए तो कुछ सेकंड भी जिंदगी और मौत के बीच का फासला बन सकते हैं। फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में सामने आई कथित घटना ने इसी भयावह संभावना को दुनिया के सामने ला दिया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, विमान करीब 30,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था और उसमें 174 लोग सवार थे, तभी कॉकपिट के भीतर ऐसी स्थिति पैदा हुई जिसमें को-पायलट द्वारा कथित तौर पर विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश किए जाने की बात सामने आई। हालात बिगड़ने के बाद विमान में मौजूद कुछ यात्रियों और दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने हस्तक्षेप किया।
इस पूरे घटनाक्रम में भारतीय पायलट स्मित मछार सहित पांच लोगों की भूमिका का उल्लेख सामने आया है। बताया गया है कि स्मित मछार खुद घायल होने के बावजूद कॉकपिट तक पहुंचे और दरवाजा खोलने में कामयाब हुए। इसके बाद विमान में मौजूद अन्य लोगों को अंदर पहुंचकर स्थिति संभालने का अवसर मिला।
हालांकि, इस घटना को लेकर सामने आए विवरणों की पूरी स्वतंत्र पुष्टि और घटना की अंतिम वजह अभी जांच का विषय है। फ्लाईदुबई की ओर से भी कथित घटनाक्रम के मूल कारण पर अंतिम निष्कर्ष से बचने की बात कही गई है। इसलिए कॉकपिट के भीतर वास्तव में क्या हुआ, यह जांच पूरी होने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगा।
30 हजार फीट पर चंद सेकंड का फैसला, 174 जिंदगियों का सवाल
विमान में आपात स्थिति पैदा होना अपने आप में गंभीर होता है, लेकिन कॉकपिट के नियंत्रण से जुड़ा संकट उससे कहीं अधिक संवेदनशील माना जाता है। विमान हजारों फीट ऊपर हो और उड़ान के दौरान नियंत्रण को लेकर विवाद या हस्तक्षेप की स्थिति पैदा हो जाए, तो पायलटों के पास हालात संभालने के लिए बेहद सीमित समय होता है।
बताई गई घटना में भी स्थिति कथित तौर पर तेजी से बिगड़ी। रिपोर्टों के अनुसार यात्रियों को जब संकट की गंभीरता का एहसास हुआ तो कुछ लोगों ने कॉकपिट की तरफ बढ़कर हस्तक्षेप किया।
यहीं से कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सामने आता है—कॉकपिट तक पहुंचने और विमान के नियंत्रण को स्थिर रखने की कोशिश।
अगर घटनाक्रम में सामने आए दावे सही साबित होते हैं, तो उस समय विमान में मौजूद लोगों की त्वरित प्रतिक्रिया बेहद महत्वपूर्ण रही होगी। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि इस तरह की घटना के प्रत्येक तथ्य की पुष्टि आधिकारिक जांच से होना जरूरी है।
घायल भारतीय पायलट स्मित मछार की भूमिका ने खींचा ध्यान
इस पूरे घटनाक्रम में भारतीय पायलट स्मित मछार का नाम विशेष रूप से सामने आया है।
रिपोर्ट के अनुसार, वह घटना के दौरान घायल हो गए थे। इसके बावजूद उन्होंने कॉकपिट तक पहुंचने और दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की।
कॉकपिट का दरवाजा खुलना इस घटनाक्रम का निर्णायक मोड़ बताया जा रहा है। इसके बाद अन्य लोगों को भीतर पहुंचने और स्थिति नियंत्रित करने का मौका मिला।
यहां यह सवाल भी उठता है कि आखिर ऐसी स्थिति में एक घायल व्यक्ति ने किस तरह प्रतिक्रिया दी और किस प्रक्रिया के तहत कॉकपिट का दरवाजा खोला गया। इन सवालों का जवाब जांच में सामने आना बाकी है।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में स्मित मछार की भूमिका को संकट के दौरान महत्वपूर्ण बताया गया है।
प्लंबर यानिव हायुन भी संकट में उतरे मैदान में
विमान में मौजूद इजराइली नागरिक यानिव हायुन, जो पेशे से प्लंबर बताए गए हैं, की भूमिका भी रिपोर्टों में सामने आई है।
बताया गया है कि उन्होंने विमान के नियंत्रण से जुड़े लीवर को संभालने में मदद की। यह दावा अपने आप में बताता है कि संकट की स्थिति कितनी असामान्य रही होगी कि विमान में मौजूद एक यात्री को भी स्थिति संभालने में हस्तक्षेप करना पड़ा।
हायुन के मुताबिक, उन्होंने उपलब्ध परिस्थितियों में विमान को नियंत्रण में रखने में मदद की।
हालांकि, विमान के तकनीकी नियंत्रण से जुड़े किसी भी विवरण की अंतिम पुष्टि संबंधित विमानन जांच एजेंसियों और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही हो सकेगी।
डेंटिस्ट ने घायल पायलट को दी चिकित्सा मदद
किसी विमान में आपात स्थिति केवल उड़ान नियंत्रण तक सीमित नहीं रहती। अगर कोई व्यक्ति घायल हो जाए तो तत्काल चिकित्सा सहायता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो जाती है।
इस मामले में इजराइली डेंटिस्ट डॉ. शोता मुसायेव का नाम सामने आया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने घायल भारतीय पायलट की मदद की। उन्होंने इजराइली मीडिया से कथित तौर पर कहा कि यदि समय रहते स्थिति को नियंत्रित नहीं किया जाता तो मामला बेहद गंभीर विमान दुर्घटना में बदल सकता था।
डॉक्टर होने के नाते उनकी भूमिका कथित तौर पर घायल व्यक्ति को तत्काल सहायता देने में रही।
यहां भी जांच यह स्पष्ट करेगी कि किस समय कौन-सी चिकित्सा सहायता दी गई और घायल पायलट की स्थिति कितनी गंभीर थी।
पांच नाम, एक संकट और 174 लोगों की जिंदगी
रिपोर्टों में इस घटना के दौरान मदद करने वाले पांच लोगों के नाम सामने आए हैं:
स्मित मछार — भारतीय पायलट
यानिव हायुन — इजराइली नागरिक और प्लंबर
डॉ. शोता मुसायेव — डेंटिस्ट
आसफ रजुआन — इंश्योरेंस एजेंसी के मालिक
ज्विका मानेस — बैंकर
इन पांचों की भूमिका अलग-अलग बताई गई है। किसी ने कॉकपिट तक पहुंचने में मदद की, किसी ने नियंत्रण संभालने में सहयोग किया और किसी ने घायल व्यक्ति को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई।
लेकिन इन भूमिकाओं का अंतिम और आधिकारिक विवरण जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।
क्या को-पायलट ने वाकई विमान पर नियंत्रण लेने की कोशिश की?
यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है।
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि को-पायलट ने कथित तौर पर कॉकपिट का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की। लेकिन इस दावे की वास्तविक प्रकृति, कारण और घटनाक्रम की पूरी श्रृंखला अभी जांच के दायरे में है।
क्या यह जानबूझकर किया गया प्रयास था?
क्या कॉकपिट में कोई तकनीकी या मानवीय समस्या उत्पन्न हुई?
क्या को-पायलट की गतिविधि को गलत समझा गया?
या फिर वास्तव में विमान के नियंत्रण को लेकर गंभीर संघर्ष हुआ?
इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही मिलेंगे।
इसलिए किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले आधिकारिक जांच के निष्कर्ष का इंतजार करना आवश्यक है।
ओमान का नागरिक होने की रिपोर्ट, सऊदी अरब में हिरासत की बात
एक इजराइली अधिकारी के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, संबंधित को-पायलट के ओमान का नागरिक होने की बात कही गई है और उसके सऊदी अरब में हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है।
लेकिन इस संबंध में भी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है।
न तो घटना के पूरे क्रम और न ही कथित हिरासत की परिस्थितियों को लेकर पर्याप्त आधिकारिक विवरण उपलब्ध है। ऐसे में इस पहलू पर भी अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही निकाला जाना चाहिए।
फ्लाईदुबई ने क्यों बरती सावधानी?
विमानन क्षेत्र में किसी भी गंभीर घटना के बाद जांच पूरी होने से पहले निष्कर्ष निकालना जोखिम भरा होता है। खासकर जब मामला कॉकपिट, पायलट व्यवहार और विमान नियंत्रण जैसे संवेदनशील मुद्दों से जुड़ा हो।
यही वजह है कि फ्लाईदुबई की ओर से कथित तौर पर घटना के मूल कारण को लेकर जांच पूरी होने से पहले निष्कर्ष नहीं निकालने की बात कही गई है।
यह सावधानी महत्वपूर्ण है।
क्योंकि एक तरफ यात्रियों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान हो सकते हैं, दूसरी तरफ विमान का तकनीकी डेटा, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर, फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, क्रू रिपोर्ट और संबंधित अधिकारियों की जांच जैसे कई स्रोत पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकते हैं।
नेतन्याहू ने भी की मदद करने वालों की सराहना
इस घटना में मदद करने वाले लोगों की भूमिका को लेकर इजराइल में भी प्रतिक्रिया सामने आई है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा संकट के दौरान मदद करने वाले लोगों की सराहना किए जाने की जानकारी रिपोर्टों में दी गई है।
इससे संकेत मिलता है कि घटना को केवल विमानन संकट के तौर पर नहीं, बल्कि यात्रियों द्वारा संकट की घड़ी में दिखाई गई त्वरित प्रतिक्रिया के रूप में भी देखा गया।
हालांकि, प्रशंसा और राजनीतिक प्रतिक्रिया घटना के तकनीकी या कानूनी निष्कर्ष का विकल्प नहीं हो सकती। वास्तविक जिम्मेदारी और घटनाक्रम की पुष्टि आधिकारिक जांच से ही होगी।
सबसे बड़ा सवाल—कॉकपिट में आखिर हुआ क्या था?
FZ1073 की यह कथित घटना कई गंभीर सवाल पीछे छोड़ती है।
30 हजार फीट की ऊंचाई पर विमान में वास्तव में क्या हुआ?
कॉकपिट के भीतर नियंत्रण को लेकर विवाद की स्थिति क्यों बनी?
किस परिस्थिति में कॉकपिट का दरवाजा खोला गया?
घायल भारतीय पायलट की चोट कैसे लगी?
यात्रियों को कब और कैसे स्थिति की गंभीरता का पता चला?
और सबसे अहम—क्या वास्तव में को-पायलट ने विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने का प्रयास किया था?
इन सवालों के जवाब अभी बाकी हैं।
174 लोग सुरक्षित—लेकिन जांच से ही सामने आएगा पूरा सच
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यह रहा कि विमान में सवार 174 लोग सुरक्षित लैंडिंग तक पहुंच सके, जैसा कि उपलब्ध रिपोर्टों में बताया गया है।
अगर कथित घटनाक्रम की पुष्टि होती है तो संकट की उस घड़ी में पायलट, यात्रियों और अन्य मददगारों की त्वरित प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण रही होगी। लेकिन विमानन सुरक्षा के लिहाज से इससे भी बड़ा सबक यह है कि ऐसी घटना की हर कड़ी की वैज्ञानिक और स्वतंत्र जांच जरूरी है।
क्योंकि विमानन में एक छोटी-सी चूक भी सैकड़ों जिंदगियों को खतरे में डाल सकती है।
अब जांच पर टिकी नजर
फ्लाईदुबई FZ1073 से जुड़ा यह घटनाक्रम फिलहाल कई सवालों, दावों और जांच के बीच खड़ा है। एक तरफ भारतीय पायलट स्मित मछार और अन्य यात्रियों की कथित बहादुरी की चर्चा है, तो दूसरी तरफ कॉकपिट में पैदा हुए संकट की वास्तविक वजह अब भी स्पष्ट नहीं है।
पर्दाफाश न्यूज़ के लिए इस कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि सनसनी से ज्यादा जरूरी सच है।
अगर जांच में यह साबित होता है कि कॉकपिट के भीतर जानबूझकर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश हुई थी, तो यह विमानन सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत गंभीर मामला होगा। अगर जांच किसी दूसरी वजह की ओर इशारा करती है, तो मौजूदा दावों की तस्वीर भी उसी के अनुसार बदलनी होगी।
फिलहाल इतना जरूर है कि 30 हजार फीट की ऊंचाई पर पैदा हुए इस कथित संकट ने 174 लोगों की जिंदगी को कुछ समय के लिए अनिश्चितता के हवाले कर दिया था।
विमान सुरक्षित जमीन पर उतर गया, लोग बच गए—लेकिन कॉकपिट के अंदर वास्तव में क्या हुआ था, इसका पूरा सच अब जांच की रिपोर्ट ही बताएगी।















