“अपराधियों के खिलाफ साहसिक अभियानों और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशनों में उल्लेखनीय भूमिका का सम्मान—लोक भवन में 26 पुलिसकर्मियों को मिला पदक, सेंट्रल नोएडा के ADCP स्वतंत्र कुमार सिंह का नाम भी गौरवशाली सूची में शामिल”
लखनऊ/नोएडा। उत्तर प्रदेश पुलिस की वर्दी सिर्फ कानून लागू करने की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में नागरिकों की सुरक्षा के लिए खड़े रहने का संकल्प भी है। इसी संकल्प और साहस को सम्मानित करते हुए राजधानी लखनऊ स्थित लोक भवन में आयोजित भव्य अलंकरण समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सेंट्रल नोएडा के अपर पुलिस उपायुक्त (ADCP) स्वतंत्र कुमार सिंह को पुलिस वीरता पदक (Gallantry Medal) से सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने मंच पर स्वतंत्र कुमार सिंह को प्रशस्ति पत्र और वीरता पदक प्रदान किया। यह सम्मान उनकी पूर्व तैनातियों के दौरान अपराधियों के खिलाफ की गई उल्लेखनीय कार्रवाई, चुनौतीपूर्ण ऑपरेशनों में प्रदर्शित साहस और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में निभाई गई भूमिका के लिए प्रदान किया गया।
26 जांबाज पुलिसकर्मी सम्मानित, 10 को वीरता पदक
लोक भवन में आयोजित इस उच्चस्तरीय समारोह में उत्तर प्रदेश के कुल 26 पुलिसकर्मियों को पदक देकर सम्मानित किया गया। इनमें 10 पुलिसकर्मियों को मुख्यमंत्री वीरता पदक और 16 पुलिसकर्मियों को विशिष्ट सेवा पदक प्रदान किए गए।
इन्हीं सम्मानित अधिकारियों में सेंट्रल नोएडा के ADCP स्वतंत्र कुमार सिंह का नाम शामिल रहा। मुख्यमंत्री के हाथों मिला यह सम्मान उनके पुलिस करियर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
यह समारोह केवल पदक वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस अधिकारियों और जवानों के लिए यह संदेश भी रहा कि कठिन परिस्थितियों में कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता और साहस को संस्थागत सम्मान दिया जाता है।
जौनपुर की मिट्टी से निकला अधिकारी, खाकी में बनाई अलग पहचान
स्वतंत्र कुमार सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने इतिहास विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन यानी एमए की शिक्षा प्राप्त की है। वर्ष 2012 बैच के PPS अधिकारी के रूप में पुलिस सेवा में आने के बाद उन्होंने अलग-अलग महत्वपूर्ण तैनातियों में जिम्मेदारियां संभालीं।
नोएडा और गाजियाबाद क्षेत्र में उनकी तैनाती के दौरान अपराध नियंत्रण से जुड़े कई चुनौतीपूर्ण मामलों में उनकी भूमिका सामने आई। विभागीय स्तर पर उन्हें कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने और ऑपरेशनल जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से संभालने वाले अधिकारियों में गिना जाता रहा है।
मार्च 2026 में उन्हें ACP से प्रमोट कर ADCP बनाया गया। वर्तमान में वह सेंट्रल नोएडा में अपर पुलिस उपायुक्त के पद पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
कफ सिरप माफिया से लेकर चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन तक
स्वतंत्र कुमार सिंह को वीरता सम्मान दिए जाने के पीछे उनकी पूर्व तैनातियों के दौरान किए गए विभिन्न पुलिस अभियानों का उल्लेख किया गया है। इनमें कफ सिरप से जुड़े अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई और चुनौतीपूर्ण एनकाउंटर ऑपरेशनों में उनकी भूमिका प्रमुख रही।
पुलिसिंग का सबसे कठिन पक्ष उन परिस्थितियों में सामने आता है जहां अपराधियों की गतिविधियों पर कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम को जोखिम उठाना पड़ता है। ऐसे अभियानों में नेतृत्व, त्वरित निर्णय और टीम समन्वय महत्वपूर्ण होते हैं।
स्वतंत्र कुमार सिंह के मामले में भी विभागीय सेवा रिकॉर्ड और उनके पूर्व ऑपरेशनल कार्यों को सम्मान के आधार के तौर पर देखा गया है। वीरता पदक इसी प्रकार की सेवा और साहस के लिए प्रदान किया गया।
वर्दी के पीछे निशानेबाज भी हैं स्वतंत्र कुमार सिंह
स्वतंत्र कुमार सिंह की पहचान सिर्फ पुलिस अधिकारी के रूप में नहीं है। वह नेशनल स्तर के शूटर भी हैं और 12 बोर शॉटगन शूटिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हैं।
उत्तर प्रदेश स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में उन्होंने एक गोल्ड और तीन सिल्वर समेत पांच पदक हासिल किए हैं। पुलिस सेवा के साथ शूटिंग जैसे खेल में सक्रिय भागीदारी उनके प्रोफाइल को एक अलग आयाम देती है।
एक तरफ कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी और दूसरी तरफ शूटिंग प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन—दोनों क्षेत्रों में उनकी सक्रियता ने उन्हें विभाग में अलग पहचान दिलाई है।
एनकाउंटर की चुनौती और कानून की कसौटी
पुलिस अभियानों में एनकाउंटर हमेशा संवेदनशील विषय रहा है। ऐसे मामलों में पुलिस के सामने अपराध नियंत्रण के साथ-साथ कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी होती है।
स्वतंत्र कुमार सिंह को मिले वीरता सम्मान के संदर्भ में चुनौतीपूर्ण ऑपरेशनों में उनकी भूमिका का उल्लेख किया गया है। ऐसे किसी भी ऑपरेशन का अंतिम मूल्यांकन संबंधित जांच, रिकॉर्ड और लागू कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही किया जाता है।
यही वजह है कि वीरता का सम्मान जहां पुलिसकर्मियों के साहस को प्रोत्साहित करता है, वहीं कानून के शासन और जवाबदेही की कसौटी भी उतनी ही महत्वपूर्ण बनी रहती है।
CM योगी का संदेश—‘शॉर्टकट’ नहीं, कानून के रास्ते पर चले पुलिस
समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कानून-व्यवस्था को लेकर स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “शॉर्टकट का रास्ता जब भी कोई व्यक्ति अपनाने का प्रयास करता है, तो वह प्रगति का नहीं, दुर्गति का ही कारण बनता है।”
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और वर्तमान स्थिति के बीच आए बदलाव का भी उल्लेख किया।
उनका संदेश पुलिस व्यवस्था के लिए यह रहा कि कानून-व्यवस्था में सुधार केवल कार्रवाई की संख्या से नहीं, बल्कि कानून के प्रभावी और निष्पक्ष अनुपालन से जुड़ा है।
87 नए इंटरसेप्टर वाहनों को भी हरी झंडी
अलंकरण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 87 नए इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इंटरसेप्टर वाहनों का इस्तेमाल सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के उल्लंघन की निगरानी सहित विभिन्न प्रवर्तन गतिविधियों में किया जाता है। इन वाहनों की तैनाती से यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा अभियानों को तकनीकी एवं परिचालन स्तर पर मजबूती मिलने की उम्मीद है।
समारोह में पुलिस व्यवस्था को आधुनिक बनाने और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक एवं संसाधनों की भूमिका पर भी जोर रहा।
‘संघर्ष’ का विमोचन, पुलिस सेवा के अनुभवों को मिला साहित्यिक मंच
कार्यक्रम में पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह द्वारा लिखित पुस्तक ‘संघर्ष’ का भी विमोचन किया गया।
पुलिस सेवा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी द्वारा लिखी गई पुस्तक का विमोचन समारोह को एक अतिरिक्त आयाम देता है। पुलिसिंग केवल अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासन, कानून, संस्थागत सुधार और सामाजिक जिम्मेदारी से भी उसका गहरा संबंध है।
पदक के साथ बढ़ी जिम्मेदारी
स्वतंत्र कुमार सिंह के लिए मुख्यमंत्री के हाथों मिला वीरता पदक निश्चित रूप से सम्मान का क्षण है, लेकिन पुलिस सेवा में सम्मान के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ती है।
सेंट्रल नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में पुलिस के सामने अपराध नियंत्रण, यातायात प्रबंधन, साइबर अपराध, संगठित अपराध और नागरिक सुरक्षा जैसी अनेक चुनौतियां हैं। ऐसे में ADCP स्तर के अधिकारी से अपेक्षा केवल कार्रवाई करने की नहीं, बल्कि कानून के दायरे में रहते हुए प्रभावी पुलिसिंग सुनिश्चित करने की भी होती है।
‘पर्दाफाश न्यूज़’ की नजर में असली सम्मान यही है
वीरता पदक किसी भी पुलिस अधिकारी के लिए गौरव का विषय है। स्वतंत्र कुमार सिंह को मिला यह सम्मान उनके पूर्व सेवा कार्यों और चुनौतीपूर्ण पुलिस अभियानों में निभाई गई भूमिका के लिए है।
लेकिन इस सम्मान का व्यापक अर्थ इससे आगे जाता है। जनता के लिए पुलिस की असली कसौटी यह है कि कानून सभी के लिए समान रूप से लागू हो, पीड़ित को समय पर न्याय मिले और अपराध के खिलाफ कार्रवाई करते हुए नागरिक अधिकारों तथा कानूनी प्रक्रिया का भी पूरा सम्मान किया जाए।
खाकी की असली ताकत सिर्फ हथियार में नहीं, बल्कि कानून के प्रति निष्ठा, निर्णय की निष्पक्षता और जनता के विश्वास में होती है।
लोक भवन में मिला वीरता पदक स्वतंत्र कुमार सिंह के लिए उपलब्धि जरूर है, मगर आने वाले समय में इस सम्मान की सबसे बड़ी कसौटी यही होगी कि वह अपनी नई जिम्मेदारी में कानून-व्यवस्था, नागरिक सुरक्षा और जवाबदेह पुलिसिंग के मानकों को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।
पर्दाफाश न्यूज़ की ओर से स्वतंत्र कुमार सिंह को इस सम्मान पर बधाई—और साथ ही खाकी से जुड़े हर अधिकारी के लिए वही संदेश: साहस जरूरी है, लेकिन साहस की सबसे मजबूत पहचान कानून की सीमा के भीतर किया गया कर्तव्य है।















