“प्रयागराज से जौनपुर और आगरा तक उठाए सवाल, मतदाताओं को धमकाने, रात में गिरफ्तारी की आशंका और वोटर लिस्ट में डुप्लीकेट नामों का दावा; फॉर्म-17सी को लेकर भी घेरा, 11 सीटों पर निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित कराने की मांग”
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन सीटों पर मतदान से पहले समाजवादी पार्टी ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी ने आरोप लगाया है कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के मंत्रियों और पदाधिकारियों के इशारे पर पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से सपा समर्थक मतदाताओं पर दबाव बनाया जा रहा है। पार्टी का दावा है कि कहीं मतदाताओं को कथित फर्जी मुकदमों में फंसाने और जेल भेजने की धमकी दी जा रही है, तो कहीं उन्हें मतदान से दूर रखने के लिए डराने-धमकाने की कोशिश हो रही है। समाजवादी पार्टी ने इन आरोपों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
सपा की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में प्रयागराज, जौनपुर और आगरा समेत विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों से संबंधित शिकायतें उठाई गई हैं। पार्टी ने मतदाताओं को कथित तौर पर प्रभावित करने, संभावित गिरफ्तारियों, मतदाता सूची में डुप्लीकेट नामों और मतदान के बाद पोलिंग एजेंटों को फॉर्म-17सी उपलब्ध कराने के मुद्दे पर निर्वाचन अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि चुनाव का उद्देश्य मतदाताओं की स्वतंत्र इच्छा को मतपत्र के माध्यम से सामने लाना है, न कि उन्हें किसी राजनीतिक दल के पक्ष में मतदान करने या मतदान से दूर रहने के लिए मजबूर करना।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने भी ज्ञापन जारी कर शिकायतों पर शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। सपा का आग्रह है कि निर्वाचन आयोग के अधिकारी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराएं और मतदान प्रक्रिया में किसी भी तरह के अनुचित हस्तक्षेप की आशंका को दूर करें।
हालांकि, इन घटनाओं और कथित दबाव की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। भाजपा, संबंधित पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों और निर्वाचन प्राधिकारियों का पक्ष उपलब्ध होने पर आरोपों की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में इन शिकायतों को फिलहाल समाजवादी पार्टी के आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। लेकिन मतदाताओं को डराने, मतदान से रोकने या चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने से जुड़ी शिकायतें इतनी गंभीर हैं कि उनकी निष्पक्ष जांच और तथ्यात्मक जवाब जरूरी है।
प्रयागराज में मतदाताओं को धमकाने का आरोप, पुलिस चौकियों की भूमिका पर सवाल
समाजवादी पार्टी ने इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत प्रयागराज जिले में मतदाताओं को कथित रूप से डराने-धमकाने का मामला उठाया है। ज्ञापन में मऊआइमा थाना क्षेत्र की एक पुलिस चौकी के प्रभारी रामफल और ब्रजेश कुमार त्रिपाठी पर मलखानपुर गांव की अंजू यादव को मतदान नहीं करने के लिए डराने का आरोप लगाया गया है। पार्टी का दावा है कि इस तरह की कथित कार्रवाई मतदाताओं के स्वतंत्र रूप से अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के अधिकार को प्रभावित कर सकती है।
सपा ने जंघई पुलिस चौकी से जुड़ी एक अन्य शिकायत भी उठाई है। पार्टी के मुताबिक, शोरो गांव के निवासी रामजी यादव को भी मतदान से रोकने के लिए धमकाए जाने का आरोप है। इन शिकायतों के आधार पर पार्टी ने निर्वाचन अधिकारियों से संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने और यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि किसी भी मतदाता को पुलिस या प्रशासनिक दबाव के कारण मतदान से वंचित न होना पड़े।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ निर्वाचन प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखने में सहयोग करने की भी है। यदि किसी अधिकारी द्वारा वास्तव में राजनीतिक पसंद के आधार पर मतदाता को धमकाया गया है, तो यह गंभीर प्रशासनिक प्रश्न होगा। दूसरी ओर, किसी अधिकारी के खिलाफ आरोप सामने आने मात्र से उसे दोषी नहीं माना जा सकता। निष्पक्ष जांच, संबंधित पक्षों का बयान और उपलब्ध साक्ष्य ही वास्तविक स्थिति तय कर सकते हैं।
जौनपुर में विद्यालय प्रबंधकों पर दबाव का दावा, जिला विद्यालय निरीक्षक को हटाने की मांग
वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत जौनपुर में भी समाजवादी पार्टी ने प्रशासनिक दबाव का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि जिला विद्यालय निरीक्षक पर विद्यालय प्रबंधकों को बुलाकर मतदान के दिन घर पर रहने और वोट नहीं डालने के लिए दबाव बनाने का आरोप है। सपा ने संबंधित अधिकारी को तत्काल पद से हटाने की मांग की है।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं की स्वतंत्र भागीदारी चुनावी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। ऐसे में यदि किसी अधिकारी द्वारा विद्यालय प्रबंधकों या पात्र मतदाताओं को मतदान से दूर रहने के लिए प्रभावित करने की शिकायत मिलती है, तो उसकी तथ्यात्मक जांच आवश्यक हो जाती है। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि क्या किसी को वास्तव में मतदान न करने के लिए कहा गया, किस परिस्थिति में ऐसा हुआ और क्या इसके समर्थन में कोई दस्तावेज, शिकायत या अन्य साक्ष्य उपलब्ध हैं।
सपा ने निर्वाचन अधिकारियों से आग्रह किया है कि संबंधित शिकायत को केवल राजनीतिक आरोप मानकर नजरअंदाज न किया जाए, बल्कि निष्पक्ष तरीके से उसकी जांच कराई जाए। पार्टी का कहना है कि मतदान में भाग लेना मतदाता का अधिकार है और किसी भी पात्र मतदाता को अनुचित दबाव के कारण इससे दूर नहीं रखा जाना चाहिए।
रात में गिरफ्तारी की आशंका, मतदान खत्म होने तक हिरासत में रखने का आरोप
समाजवादी पार्टी ने सबसे गंभीर आशंकाओं में से एक यह जताई है कि उसके समर्थक मतदाताओं की सूची संबंधित थानों को भेजे जाने और मतदान की पूर्व संध्या पर उन्हें गिरफ्तार कर मतदान समाप्त होने तक हिरासत में रखने की तैयारी की जा रही है। पार्टी ने इसे मतदाताओं की स्वतंत्र भागीदारी के लिए संभावित खतरा बताया है।
ज्ञापन में वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के जिलाधिकारियों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को स्पष्ट निर्देश देने की मांग की गई है कि किसी भी पात्र मतदाता को मतदान करने से न रोका जाए। सपा का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर किसी मतदाता को राजनीतिक आधार पर निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर भी स्पष्ट रहना चाहिए। कानून के तहत वैध आधार पर की गई गिरफ्तारी और किसी व्यक्ति को केवल उसकी राजनीतिक पसंद के कारण मतदान से दूर रखने के उद्देश्य से की गई कार्रवाई दो अलग-अलग स्थितियां हैं। सपा ने दूसरी तरह की कार्रवाई की आशंका जताई है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए निर्वाचन अधिकारियों के लिए जरूरी है कि शिकायतों की जांच करते हुए किसी भी गैरकानूनी दबाव की स्थिति को रोकें और कानूनसम्मत कार्रवाई तथा मतदाताओं को डराने की कोशिश के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखें।
आगरा की मतदाता सूची पर सवाल, एक ही नाम दो बार दर्ज होने का दावा
समाजवादी पार्टी ने आगरा खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया है। पार्टी के मुताबिक, बूथ संख्या 224 पर मतदाता क्रमांक 522 में पीयूष कुमार पोरवाल का नाम दो बार दर्ज है। इसी प्रकार क्रमांक 523 पर बब्बन, पिता रामचंद्र, का नाम भी दो बार दर्ज होने का दावा किया गया है।
सपा का कहना है कि मतदाता सूची में हजारों डुप्लीकेट नाम और अन्य त्रुटियां होने से मतदान के दौरान भ्रम तथा परेशानी की स्थिति पैदा हो सकती है। पार्टी ने निर्वाचन अधिकारियों से इन शिकायतों की जांच कराने और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।
मतदाता सूची में किसी नाम की पुनरावृत्ति का दावा अपने आप में चुनावी गड़बड़ी का अंतिम प्रमाण नहीं है। यह देखना आवश्यक है कि संबंधित प्रविष्टियां वास्तव में एक ही मतदाता की दोहरी प्रविष्टियां हैं या नामों में समानता अथवा अन्य कारणों से भ्रम पैदा हुआ है। इसी तरह, यह भी जांचना होगा कि कथित त्रुटियों का मतदान प्रक्रिया पर वास्तविक प्रभाव पड़ सकता है या नहीं।
यदि डुप्लीकेट प्रविष्टियां प्रमाणित होती हैं, तो निर्वाचन अधिकारियों को लागू नियमों के अनुरूप कार्रवाई करनी चाहिए। पारदर्शी जांच से न केवल मतदाता सूची की विश्वसनीयता मजबूत होगी, बल्कि अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक दलों और मतदाताओं की आशंकाओं का समाधान भी हो सकेगा।
फॉर्म-17सी पर विवाद, पोलिंग एजेंटों को विवरण देने की मांग
समाजवादी पार्टी ने मतदान समाप्त होने के बाद पोलिंग एजेंटों को फॉर्म-17सी उपलब्ध कराने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है। पार्टी के अनुसार, इस फॉर्म में मतदान से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े दर्ज होते हैं और इसे उपलब्ध कराना मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता तथा अभिलेखों के मिलान के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
ज्ञापन में दावा किया गया है कि पीठासीन अधिकारियों के प्रशिक्षण के दौरान पोलिंग एजेंटों को फॉर्म-17सी नहीं देने के निर्देश दिए गए। सपा ने इसे निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के विपरीत बताते हुए सभी 11 विधान परिषद निर्वाचन सीटों पर मतदान समाप्त होने के बाद संबंधित फॉर्म पोलिंग एजेंटों को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने की मांग की है।
इस मामले में संबंधित निर्वाचन अधिकारियों से यह स्पष्ट कराना जरूरी है कि प्रशिक्षण के दौरान वास्तव में क्या निर्देश दिए गए थे और संबंधित निर्वाचन प्रक्रिया पर कौन-से नियम लागू होते हैं। फॉर्म-17सी की उपलब्धता और उसके वितरण से संबंधित व्यवस्था को लागू नियमों के अनुसार स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि मतदान के आंकड़ों को लेकर अनावश्यक विवाद की गुंजाइश न रहे।
निर्वाचन आयोग के सामने चुनौती: शिकायतों की जांच और भरोसे की बहाली
समाजवादी पार्टी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मांग की है कि रिटर्निंग अधिकारियों, सहायक रिटर्निंग अधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए जाएं। पार्टी ने कहा है कि किसी भी मतदाता को उसकी राजनीतिक पसंद के आधार पर मतदान से वंचित नहीं किया जाना चाहिए और पूरी प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग के लागू दिशा-निर्देशों के अनुरूप कराई जानी चाहिए।
ज्ञापन सपा प्रतिनिधिमंडल के केके श्रीवास्तव, डॉ. हरिश्चन्द्र सिंह यादव और राधेश्याम सिंह ने सौंपा। पार्टी ने शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई, मतदाताओं की सुरक्षा और मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।
अब इन आरोपों पर निर्वाचन अधिकारियों की प्रतिक्रिया और जांच की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। क्या प्रयागराज तथा जौनपुर से जुड़ी शिकायतों की जांच कराई जाएगी? क्या आगरा की मतदाता सूची में कथित डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पुष्टि होगी? क्या फॉर्म-17सी को लेकर उठाए गए सवालों पर संबंधित नियमों के आधार पर स्पष्टता दी जाएगी? इन सवालों के जवाब ही विवाद की वास्तविक स्थिति सामने लाएंगे।
विधान परिषद चुनाव में निष्पक्षता का अर्थ केवल मतदान की व्यवस्था कराना नहीं, बल्कि यह भरोसा कायम रखना भी है कि प्रत्येक पात्र मतदाता बिना भय, दबाव या अनुचित हस्तक्षेप के अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकता है। राजनीतिक दलों के आरोपों की जांच निष्पक्षता से होना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी यह भी है कि बिना प्रमाण किसी अधिकारी या व्यक्ति को दोषी न ठहराया जाए।
फिलहाल समाजवादी पार्टी ने चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाकर निर्वाचन आयोग से हस्तक्षेप की मांग की है। अब संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि शिकायतों की जांच तथ्यों और नियमों के आधार पर करें, आवश्यक कार्रवाई की जानकारी दें और मतदान की निष्पक्षता को लेकर उठ रही आशंकाओं का समाधान करें। लोकतंत्र में मतदाता की स्वतंत्रता सर्वोपरि है—और इस स्वतंत्रता की रक्षा का दायित्व राजनीतिक दलों के साथ-साथ चुनावी तथा प्रशासनिक व्यवस्था पर भी है।















