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सेक्टर-105 के गेट पर 40 गोवंशों का पहरा! हादसे के खतरे से सहमे निवासी, RWA ने प्राधिकरण से मांगा जवाब

“आरडब्ल्यूए ने नोएडा प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी को भेजा विस्तृत पत्र; सड़क सुरक्षा, जन-स्वास्थ्य, पशु पुनर्वास और नियमों के निष्पक्ष अनुपालन पर उठाए गंभीर सवाल”

नोएडा: शहर के आवासीय सेक्टरों में नागरिक सुविधाओं, स्वच्छता और सुरक्षा को लेकर उठने वाली शिकायतें अक्सर प्रशासनिक फाइलों तक सीमित रह जाती हैं। लेकिन जब किसी रिहायशी सेक्टर के मुख्य प्रवेश द्वार पर ही बड़ी संख्या में गोवंश जमा होने लगें, आवागमन प्रभावित हो और सड़क दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहे, तब यह केवल असुविधा का मामला नहीं रह जाता, बल्कि नागरिक सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही का गंभीर प्रश्न बन जाता है। नोएडा के सेक्टर-105 में गेट नंबर-3 के आसपास उत्पन्न हो रही ऐसी ही स्थिति को लेकर रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) ने अब संबंधित प्राधिकरण के समक्ष अपनी मांगें औपचारिक रूप से रखी हैं।

सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय के नेतृत्व में नोएडा विकास प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी को भेजे गए विस्तृत पत्र में मुख्य प्रवेश मार्ग पर कथित तौर पर 30 से 40 गोवंशों के लगातार जमावड़े, आवासीय क्षेत्र में संचालित कुछ पशु-संबंधी व्यावसायिक गतिविधियों, आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रण व्यवस्था और पालतू पशुओं से जुड़े नियमों के अनुपालन जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है। आरडब्ल्यूए ने इन समस्याओं के समाधान के लिए नियमानुसार और समयबद्ध कार्रवाई का अनुरोध किया है।

इस पत्र का मूल संदेश स्पष्ट है—नागरिकों की सुरक्षा और पशुओं के प्रति संवेदनशीलता एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। आवश्यकता ऐसी व्यवस्था की है, जिसमें न तो आम लोगों की सुरक्षा से समझौता हो और न ही बेजुबान पशुओं के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाए। अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि संबंधित अधिकारी इन शिकायतों का मौके पर सत्यापन कर कितनी शीघ्रता से प्रभावी समाधान सुनिश्चित करते हैं।

गेट नंबर-3 पर गोवंशों का जमावड़ा, हादसे की आशंका पर चिंता

सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए की ओर से उठाया गया सबसे प्रमुख मुद्दा गेट नंबर-3 के मुख्य प्रवेश द्वार और उससे जुड़े मार्ग पर गोवंशों के जमावड़े का है। पत्र के अनुसार, यहां लगभग 30 से 40 गोवंश एकत्र हो जाते हैं, जिससे सड़क पर आवाजाही बाधित होने और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने की आशंका बनी रहती है।

किसी भी आवासीय सेक्टर का मुख्य प्रवेश द्वार निवासियों, स्कूल जाने वाले बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, दोपहिया वाहन चालकों, आपातकालीन सेवाओं और अन्य राहगीरों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग होता है। ऐसे स्थान पर यदि बड़ी संख्या में पशु जमा हों, तो वाहन चालकों के लिए सुरक्षित रास्ता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अचानक सड़क पार करते पशु, वाहनों के बीच उनका आ जाना और सीमित जगह में यातायात का दबाव दुर्घटना की आशंका को और गंभीर बना सकता है।

आरडब्ल्यूए का आग्रह है कि इस समस्या को केवल अस्थायी सफाई या पशुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर हटाने तक सीमित न रखा जाए। इसके बजाय संबंधित अधिकारियों को मौके का निरीक्षण कर पशुओं के जमावड़े के कारणों की पहचान करनी चाहिए और स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाने चाहिए।

एसोसिएशन ने कैटल-कैचर वाहनों की सहायता से गोवंशों को सुरक्षित ढंग से पकड़कर निकटतम अधिकृत गौशाला या उपयुक्त प्राधिकृत पशु आश्रय में पुनर्वासित करने का अनुरोध किया है। यह कार्रवाई पशु कल्याण, परिवहन और लागू स्थानीय नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। साथ ही, पशुओं के मालिकों की पहचान संभव होने पर संबंधित नियमों के अनुसार जिम्मेदारी तय करने और दोबारा ऐसी स्थिति उत्पन्न न होने देने के उपायों पर भी विचार किया जाना चाहिए।

यहां प्रशासन के सामने दोहरी जिम्मेदारी है—सड़क पर चलने वाले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और पशुओं को सुरक्षित, मानवीय तथा विधिसम्मत संरक्षण उपलब्ध कराना। इन दोनों उद्देश्यों को साथ लेकर चलना ही जिम्मेदार प्रशासन की कसौटी है।

रिहायशी सेक्टर में व्यावसायिक पशु गतिविधियां, नियमों के पालन पर सवाल

आरडब्ल्यूए ने अपने पत्र में सेक्टर के भीतर संचालित कुछ अन्य गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताई है। इनमें विदेशी नस्ल की बिल्लियों के कथित व्यावसायिक प्रजनन केंद्र और बिना आवश्यक वैधानिक अनुमति के संचालित होने का आरोप झेल रहे डॉग शेल्टर का उल्लेख किया गया है।

एसोसिएशन का कहना है कि आवासीय क्षेत्र का उद्देश्य लोगों को शांत, सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना है। यदि किसी आवासीय परिसर में ऐसी गतिविधियां संचालित हो रही हैं, जिनके लिए अलग प्रकार की अनुमति, पंजीकरण, उपयुक्त स्थान या निर्धारित मानकों का पालन आवश्यक है, तो संबंधित विभागों को उनकी वास्तविक स्थिति की जांच करनी चाहिए।

हालांकि, किसी भी प्रतिष्ठान या गतिविधि को नियमविरुद्ध घोषित करने से पहले उसके दस्तावेजों, अनुमतियों, वास्तविक संचालन और लागू नियमों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। केवल शिकायत के आधार पर किसी संचालक को दोषी मानना उचित नहीं होगा। लेकिन इसी तरह, यदि निरीक्षण में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो केवल इसलिए अनदेखी भी नहीं की जानी चाहिए कि मामला पशु-प्रेम या पशु संरक्षण से जुड़ा है।

आरडब्ल्यूए की दलील है कि पशुओं के प्रति करुणा और जीव-दया समाज के महत्वपूर्ण मानवीय मूल्य हैं। इन मूल्यों का सम्मान करते हुए यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि पशुओं के रखरखाव, प्रजनन या आश्रय से जुड़ी गतिविधियां संबंधित कानूनों, प्राधिकरण के नियमों और लागू स्वास्थ्य एवं स्वच्छता मानकों के अनुरूप हों।

स्थानीय निवासियों की शिकायतों का समाधान संवाद, तथ्यात्मक निरीक्षण और नियमानुसार कार्रवाई से ही संभव है। यदि किसी गतिविधि के लिए स्थान अनुपयुक्त पाया जाता है या आवश्यक अनुमतियां नहीं मिलतीं, तो सक्षम प्राधिकारी को कानून के अनुसार उचित कदम उठाने चाहिए। दूसरी ओर, यदि संचालन वैध पाया जाता है, तो शिकायतों का समाधान पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए।

आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रण योजना में पारदर्शिता की मांग

सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए ने आवारा कुत्तों की नसबंदी और उनकी आबादी के प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन ने अनुरोध किया है कि संबंधित सरकारी कार्यक्रमों की प्रभावशीलता की समीक्षा की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि निर्धारित संसाधनों तथा प्रयासों का वास्तविक लाभ क्षेत्र के निवासियों और पशुओं दोनों को मिले।

पत्र में यह आशंका भी व्यक्त की गई है कि यदि बाहरी क्षेत्रों से पशुओं को लाकर किसी सेक्टर में छोड़ने जैसी गतिविधियां हो रही हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। हालांकि, ऐसी किसी गतिविधि की पुष्टि स्वतंत्र जांच और ठोस साक्ष्यों के आधार पर ही की जा सकती है। इसलिए प्रशासन के लिए यह आवश्यक होगा कि वह शिकायतों को तथ्यों के आधार पर परखे और बिना प्रमाण किसी व्यक्ति या समूह पर आरोप लगाने से बचे।

आवारा कुत्तों के प्रबंधन में नसबंदी, टीकाकरण, पशु चिकित्सा, शिकायतों के निस्तारण और स्थानीय परिस्थितियों की निगरानी जैसे पहलुओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। संबंधित अधिकारियों को लागू पशु कल्याण नियमों और न्यायालयों के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही, यदि किसी क्षेत्र में कुत्तों के व्यवहार, काटने की घटनाओं या अन्य सुरक्षा संबंधी समस्याओं की शिकायतें मिलती हैं, तो उनका उचित रिकॉर्ड रखकर आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।

इस मुद्दे पर प्रशासनिक पारदर्शिता इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि नागरिकों के बीच अधूरी जानकारी से भ्रम और तनाव बढ़ सकता है। शिकायतों की प्राप्ति, निरीक्षण, की गई कार्रवाई और आगे की योजना के संबंध में उचित सूचना उपलब्ध कराने से जनता का भरोसा मजबूत हो सकता है।

पालतू पशुओं के नियमों का पालन भी नागरिक जिम्मेदारी

आरडब्ल्यूए ने पालतू कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों पर नियंत्रित रखने, लीश के उपयोग और खुले में गंदगी न फैलाने जैसे विषयों पर भी ध्यान आकर्षित किया है। एसोसिएशन का अनुरोध है कि प्राधिकरण लागू पेट-पॉलिसी और अन्य प्रभावी नियमों के अनुसार जन-जागरूकता अभियान चलाए तथा जरूरत पड़ने पर नियमानुसार कार्रवाई करे।

सार्वजनिक स्थानों पर पशुओं की जिम्मेदार देखभाल केवल प्रशासन का दायित्व नहीं है। पालतू पशुओं के मालिकों की भी जिम्मेदारी है कि वे अपने पशुओं को नियंत्रित रखें, दूसरों की सुरक्षा का ध्यान रखें और उनके कारण सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी न फैलने दें। इसी तरह, आवारा पशुओं के प्रबंधन में प्रशासन और स्थानीय समुदाय के बीच सहयोग आवश्यक है।

सड़कों, फुटपाथों और प्रवेश मार्गों पर गंदगी या अन्य बाधाओं के कारण वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों और राहगीरों को परेशानी हो सकती है। आरडब्ल्यूए ने इसी संदर्भ में नियमों के पालन और जागरूकता को महत्वपूर्ण बताया है।

हालांकि, किसी भी नियम के क्रियान्वयन में लागू कानून, प्राधिकरण की नीति और संबंधित न्यायालय के वास्तविक निर्देशों का पालन होना चाहिए। जागरूकता अभियान का उद्देश्य निवासियों को जिम्मेदार व्यवहार के लिए प्रोत्साहित करना होना चाहिए, जबकि उल्लंघनों पर कार्रवाई निष्पक्ष और विधिसम्मत तरीके से की जानी चाहिए।

आरडब्ल्यूए अध्यक्ष का संदेश: विरोध नहीं, सुरक्षित और स्वच्छ सेक्टर की मांग

आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने अपने संदेश में कहा कि एसोसिएशन जीव-दया, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सौहार्द के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पत्र का उद्देश्य किसी व्यक्ति या व्यवस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि सेक्टर के बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और अन्य निवासियों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ तथा अनुशासित वातावरण सुनिश्चित करना है।

उनका कहना है कि नागरिक सुरक्षा और पशु कल्याण को एक-दूसरे के विरुद्ध खड़ा करने के बजाय ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिसमें दोनों की आवश्यकताओं का सम्मान हो। उन्होंने नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों से इन विषयों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करने और सकारात्मक कार्रवाई की अपेक्षा व्यक्त की।

आरडब्ल्यूए की यह पहल स्थानीय समस्याओं को औपचारिक प्रशासनिक प्रक्रिया के माध्यम से उठाने का प्रयास है। अब आगे की प्रक्रिया में शिकायतों का सत्यापन, संबंधित विभागों के बीच समन्वय और कार्रवाई की स्पष्ट रूपरेखा महत्वपूर्ण होगी।

अब प्राधिकरण की जवाबदेही की परीक्षा

सेक्टर-105 के निवासियों द्वारा उठाए गए सवालों का समाधान केवल आश्वासन से नहीं होगा। इसके लिए मौके पर निरीक्षण, जिम्मेदार विभागों की पहचान, लागू नियमों के अनुसार निर्णय और कार्रवाई की नियमित समीक्षा जरूरी है। विशेष रूप से गेट नंबर-3 पर गोवंशों के जमावड़े की शिकायत पर तत्काल जोखिम का आकलन किया जाना चाहिए, ताकि किसी संभावित दुर्घटना से पहले आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जा सकें।

इसके साथ ही, कथित व्यावसायिक पशु गतिविधियों की वैधानिक स्थिति स्पष्ट करने, आवारा कुत्तों के प्रबंधन की समीक्षा करने और पालतू पशुओं से संबंधित नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए समन्वित कदम उठाए जाने चाहिए।

प्राधिकरण के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि वह आरडब्ल्यूए को शिकायत पर की गई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराए और आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय निवासियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करे। ऐसी प्रक्रिया से समस्याओं की पहचान अधिक सटीक ढंग से की जा सकती है और समाधान को लेकर अनावश्यक विवाद की गुंजाइश कम हो सकती है।

सवाल सीधा है—क्या सेक्टर-105 के मुख्य प्रवेश मार्ग पर सुरक्षा संबंधी चिंता का समयबद्ध समाधान होगा और आवासीय क्षेत्र में पशु-संबंधी गतिविधियों के नियमों की निष्पक्ष समीक्षा की जाएगी? इसका उत्तर अब संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई से सामने आएगा।

सेक्टर-105 की मांग किसी टकराव की नहीं, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था की है, जहां सड़कें सुरक्षित हों, सार्वजनिक स्थान स्वच्छ रहें, पशुओं के साथ मानवीय व्यवहार हो और नियमों का पालन सभी के लिए समान रूप से सुनिश्चित किया जाए। यही संतुलन एक जिम्मेदार और संवेदनशील शहरी प्रशासन की पहचान होना चाहिए।

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VIKAS TRIPATHI
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