इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: व्यक्तिगत स्वतंत्रता सर्वोपरि, अवैध हिरासत पर 2 लाख मुआवजा
Allahabad High Court ने मंगलवार को कहा कि नागरिकों की व्यक्तिगत आजादी सबसे ऊपर है और किसी भी निर्दोष व्यक्ति को वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना जेल नहीं भेजा जा सकता।
न्यायमूर्ति Siddharth और न्यायमूर्ति Vinay Kumar Dwivedi की खंडपीठ ने मंसूर अहमद उर्फ लल्लू की याचिका पर सुनवाई करते हुए पाया कि उन्हें 8 दिनों तक अवैध रूप से न्यायिक हिरासत में रखा गया था।
कोर्ट ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन मानते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को पीड़ित को 2 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। यह राशि छह सप्ताह के भीतर अदा करनी होगी।
एसीपी और कार्यपालक मजिस्ट्रेट पर कड़ी टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि एसीपी बारा और विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने बीएनएसएस की धाराओं 170, 126 और 135 का गंभीर उल्लंघन किया।
कोर्ट के अनुसार, शांति बनाए रखने के लिए व्यक्ति से केवल व्यक्तिगत बंधपत्र लिया जाना चाहिए था, लेकिन उसे सीधे जेल भेज दिया गया। अदालत ने निर्देश दिया कि मामले की जांच कर मुआवजे की राशि एसीपी वेद व्यास मिश्रा के वेतन से वसूलने पर विचार किया जाए, यदि विभागीय जांच में उनकी जिम्मेदारी तय होती है।
गाजियाबाद मामले का हवाला
हाईकोर्ट ने अपने हालिया गाजियाबाद संबंधी फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में:
केवल व्यक्तिगत बंधपत्र लिया जाए।
अनावश्यक हिरासत से बचा जाए।
24 घंटे से अधिक की अवैध हिरासत होने पर प्रतिदिन 25 हजार रुपये मुआवजा दिया जाए।
प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट की स्थिति पर चिंता
कोर्ट ने कहा कि Prayagraj Police Commissionerate में स्थिति चिंताजनक है।
अदालत के अनुसार, पुलिस कमिश्नर को दी गई मजिस्ट्रेटी शक्तियों का दुरुपयोग हो रहा है और शांति भंग की आशंका के नाम पर लोगों को लंबे समय तक जेल भेजा जा रहा है, जबकि कानून इसकी अनुमति नहीं देता।
हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नर प्रयागराज को 14 सितंबर 2026 तक आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
रिकॉर्ड जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रयागराज द्वारा उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड की जांच में हाईकोर्ट ने पाया कि:
वर्ष
हिरासत में लिए गए लोग
2024
283
2025
1,321
2026 (अब तक)
721
कुल
2,325
बेंच ने कहा कि इनमें से कई लोगों को एक सप्ताह से लेकर 20 दिनों तक हिरासत में रखा गया था।
पहले भी हाईकोर्ट ने पुलिस को लगाई थी फटकार
हाल ही में Allahabad High Court की एक अन्य पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति J J Munir और न्यायमूर्ति Sanjeev Kumar शामिल थे, ने कहा था कि कई पुलिस अधिकारी यह मानकर नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं कि उनके गलत कार्यों पर किसी का ध्यान नहीं जाएगा।
मतंबर मिश्रा को मिला अंतरिम मुआवजा
अदालत ने मतंबर मिश्रा को 25 हजार रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया था। उन्हें एक घरेलू विवाद के मामले में 24 घंटे तक अवैध रूप से पुलिस लॉकअप में रखा गया था।
कोर्ट ने कहा:
जब कोई नागरिक अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाता है, तो उन अधिकारों को लागू कराना न्यायालय का कर्तव्य है।
क्या था मामला?
26 नवंबर 2022 को प्रयागराज निवासी मतंबर मिश्रा खेत से घर लौटे थे। आरोप है कि चौकी प्रभारी रहे सब-इंस्पेक्टर Surya Prakash Dubey उनके घर पहुंचे और उन्हें बिना कारण बताए थाने ले गए।
मतंबर मिश्रा को लगभग 24 घंटे तक लॉकअप में रखा गया। आरोप है कि उन्हें छोड़ने के बदले 20 हजार रुपये रिश्वत की मांग की गई। यह कार्रवाई उनके भाई की बहू द्वारा दर्ज कराई गई घरेलू हिंसा शिकायत के संदर्भ में की गई थी।














