नोएडा: सेक्टर-105 स्थित फॉर्च्यून वर्ल्ड स्कूल में रविवार को आयोजित ‘स्ट्रीम फेस्ट’ ने शिक्षा के उस बदलते स्वरूप की शानदार झलक पेश की, जहां किताबों से आगे बढ़कर प्रयोग, नवाचार और व्यावहारिक अनुभव सीखने का आधार बन रहे हैं। विद्यालय के अत्याधुनिक ऑडिटोरियम में आयोजित इस भव्य समारोह में विद्यार्थियों ने विज्ञान, तकनीक, ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा, खेल, आधुनिक शिक्षा और सस्टेनेबल लिविंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित रचनात्मक प्रस्तुतियों और क्रियाशील वर्किंग मॉडल्स के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों की कल्पनाशीलता, वैज्ञानिक सोच और विषयों को व्यवहारिक जीवन से जोड़ने की क्षमता ने उपस्थित अतिथियों और अभिभावकों का ध्यान विशेष रूप से आकर्षित किया। बच्चों द्वारा तैयार किए गए प्रोजेक्ट केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं थे, बल्कि उनमें समस्याओं को समझने, उनके समाधान तलाशने और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर नए विचार विकसित करने की सोच भी दिखाई दी।
दीप प्रज्वलन और गणेश वंदना से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन एवं गणेश वंदना के साथ हुआ। इसके बाद विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों पर अपनी प्रस्तुतियां दीं। मंच पर बच्चों का आत्मविश्वास और उनके विचारों को प्रस्तुत करने का अंदाज यह दर्शा रहा था कि विद्यालय में शिक्षा को केवल परीक्षा और पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय उसे अनुभव और प्रयोग से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
खेल से लेकर आधुनिक शिक्षा और विज्ञान से लेकर पर्यावरण संरक्षण तक, विद्यार्थियों ने अलग-अलग विषयों को अपनी रचनात्मक शैली में प्रस्तुत किया। ऊर्जा संरक्षण और सस्टेनेबल लिविंग जैसे विषयों पर आधारित मॉडल्स ने यह संदेश दिया कि आने वाली पीढ़ी पर्यावरणीय चुनौतियों और संसाधनों के संरक्षण को लेकर कितनी सजग हो सकती है।
‘करके सीखने’ की शिक्षा पर रहा विशेष जोर
स्ट्रीम फेस्ट की सबसे खास बात यह रही कि विद्यार्थियों ने अपने प्रोजेक्ट्स को केवल तैयार करके प्रदर्शित नहीं किया, बल्कि उनके पीछे छिपे वैज्ञानिक सिद्धांत और उपयोगिता को भी समझाने का प्रयास किया। वर्किंग मॉडल्स के माध्यम से बच्चों ने यह दिखाया कि यदि उन्हें प्रयोग करने की स्वतंत्रता और सही मार्गदर्शन मिले तो वे जटिल विषयों को भी सहज और रचनात्मक तरीके से समझ सकते हैं।
विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि जब विद्यार्थी किसी विषय को स्वयं प्रयोग करके समझता है, तो वह ज्ञान केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके अनुभव का स्थायी हिस्सा बन जाता है। इसी दृष्टिकोण को कार्यक्रम में विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों के माध्यम से साकार होते देखा गया।
गणमान्य अतिथियों ने बढ़ाया विद्यार्थियों का उत्साह
समारोह में कई गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। उत्तर प्रदेश के पूर्व जीएसटी कमिश्नर श्री उपेंद्र गुप्ता, प्रशासनिक अधिकारी एवं आईएएस श्रीमती विनीता श्रीवास्तव, जर्मनी स्थित शोध विज्ञानी श्री वरुण गुप्ता, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के आर्किटेक्ट श्री शिवेंद्र पांडे, सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए अध्यक्ष श्री दिव्य कृष्णात्रेय (दीपक शर्मा) तथा प्रबुद्ध नागरिक श्री सुरेश बंसल विशेष रूप से उपस्थित रहे।
अतिथियों ने विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न वर्किंग मॉडल्स और इनोवेटिव प्रोजेक्ट्स का अवलोकन किया। बच्चों ने अपने मॉडल्स के उद्देश्य, कार्यप्रणाली और संभावित उपयोग के बारे में अतिथियों को जानकारी दी। विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और उनकी वैज्ञानिक दृष्टि की अतिथियों ने मुक्त कंठ से सराहना की।
शिक्षा में नवाचार को बताया समय की जरूरत
समारोह में विद्यालय के चेयरमैन श्री मोहन गोयल, चेयरपर्सन श्रीमती शशि गोयल, डायरेक्टर श्री उन्तक गोयल एवं प्रधानाचार्या श्रीमती भारती सिंह ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि आज की शिक्षा व्यवस्था में बच्चों को केवल किताबी ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें प्रश्न पूछने, प्रयोग करने, असफलताओं से सीखने और नए समाधान तलाशने के अवसर भी मिलने चाहिए। जब विद्यार्थी अपने हाथों से किसी मॉडल को तैयार करता है और उसके पीछे के सिद्धांत को समझता है, तो उसकी तार्किक क्षमता और समस्या समाधान की क्षमता मजबूत होती है।
प्रबंधन के अनुसार, इस तरह के आयोजन बच्चों में रचनात्मकता के साथ-साथ टीमवर्क, नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल और आत्मविश्वास विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
खचाखच भरा ऑडिटोरियम, अभिभावकों में दिखा उत्साह
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय का ऑडिटोरियम विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और अतिथियों से खचाखच भरा रहा। बच्चों की प्रस्तुतियों और मॉडल्स को देखने के लिए अभिभावकों में खासा उत्साह नजर आया। कई अभिभावकों ने विद्यार्थियों से उनके प्रोजेक्ट्स के बारे में बातचीत की और उनकी मेहनत की सराहना की।
अभिभावकों के लिए यह आयोजन केवल बच्चों की प्रतिभा देखने का अवसर नहीं था, बल्कि यह समझने का भी अवसर था कि आधुनिक शिक्षा किस तरह पारंपरिक कक्षा व्यवस्था से आगे बढ़कर अनुभव आधारित सीखने की दिशा में जा रही है।
विज्ञान, पर्यावरण और भविष्य की सोच का संगम
‘स्ट्रीम फेस्ट’ में प्रस्तुत विषयों ने यह भी संकेत दिया कि आज के विद्यार्थी अपने आसपास की दुनिया और भविष्य की चुनौतियों को समझने लगे हैं। ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और सस्टेनेबल लिविंग जैसे विषयों को विद्यार्थियों ने जिस रचनात्मकता के साथ प्रस्तुत किया, उसमें भविष्य के प्रति उनकी जिम्मेदारी की झलक दिखाई दी।
वहीं, विज्ञान और तकनीक से जुड़े मॉडल्स ने बच्चों की जिज्ञासा और प्रयोगधर्मिता को सामने रखा। कार्यक्रम में दिखाई दिए विभिन्न प्रोजेक्ट्स ने यह संदेश दिया कि यदि शिक्षा को प्रयोग और नवाचार से जोड़ा जाए तो विद्यार्थी केवल जानकारी हासिल करने वाले नहीं, बल्कि समाधान खोजने वाले बन सकते हैं।
‘स्ट्रीम फेस्ट’ ने दिखाई नई शिक्षा की दिशा
फॉर्च्यून वर्ल्ड स्कूल का यह आयोजन इस मायने में भी महत्वपूर्ण रहा कि इसमें विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए एक ऐसा मंच मिला, जहां उनकी रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच को समान महत्व दिया गया। कार्यक्रम की प्रस्तुतियों ने यह स्पष्ट किया कि नई पीढ़ी को भविष्य के लिए तैयार करने में केवल पाठ्यक्रम पूरा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से जोड़ना भी जरूरी है।
‘स्ट्रीम फेस्ट’ इसी सोच का उदाहरण बना। विज्ञान, खेल, शिक्षा, पर्यावरण और ऊर्जा जैसे अलग-अलग क्षेत्रों को विद्यार्थियों की रचनात्मकता के साथ जोड़कर प्रस्तुत किया गया। इससे कार्यक्रम में विविधता के साथ-साथ सीखने का व्यावहारिक आयाम भी देखने को मिला।
समारोह के समापन अवसर पर विद्यालय की ओर से सभी अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। आयोजन ने विद्यार्थियों की मेहनत, शिक्षकों के मार्गदर्शन और विद्यालय प्रबंधन की आधुनिक शैक्षणिक दृष्टि को एक मंच पर प्रस्तुत किया।
कुल मिलाकर, सेक्टर-105 में आयोजित फॉर्च्यून वर्ल्ड स्कूल का ‘स्ट्रीम फेस्ट’ केवल एक वार्षिक शैक्षणिक कार्यक्रम बनकर नहीं रहा, बल्कि इसने यह संदेश भी दिया कि जब शिक्षा में जिज्ञासा, प्रयोग, रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी का समावेश होता है, तो कक्षा के भीतर तैयार होने वाला विद्यार्थी भविष्य का नवाचारकर्ता बन सकता है। बच्चों के मॉडल्स, प्रस्तुतियों और आत्मविश्वास ने आयोजन को यादगार बना दिया और अभिभावकों के सामने शिक्षा के एक ऐसे आधुनिक स्वरूप की तस्वीर रखी, जिसमें सीखना केवल किताबों के पन्नों तक सीमित नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन से जुड़ा अनुभव है।














