ग्रेटर नोएडा: तुस्याना के नॉलेज पार्क-5 स्थित 6% आबादी क्षेत्र में रहने वाले लोगों की समस्याएं अब महज शिकायतों का विषय नहीं रह गई हैं, बल्कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण (GNIDA) की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रही हैं। वर्षों से सड़क, नाली, जल निकासी, सफाई, स्ट्रीट लाइट, पेयजल और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे निवासियों ने अब आश्वासन के बजाय समयबद्ध कार्रवाई की मांग तेज कर दी है।
गौतम बुद्ध नगर विकास समिति ने GNIDA से स्पष्ट शब्दों में कहा है कि तुस्याना 6% आबादी क्षेत्र के विकास से जुड़े लंबित मामलों का अब प्लॉट-वाइज और समयबद्ध समाधान किया जाए। समिति का कहना है कि वर्ष 2022 से लगातार शिकायतें और पत्राचार किए जाने के बावजूद कई समस्याओं का स्थायी समाधान जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है।
2022 से शिकायतें, लेकिन समाधान अब भी अधूरा
समिति के अनुसार तुस्याना के 6% आबादी क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार रह रहे हैं जिन्होंने अपनी जीवनभर की पूंजी जमीन और मकान में लगाई है। इसके बावजूद उन्हें आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए प्राधिकरण के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
क्षेत्र में कई स्थानों पर सड़कें अधूरी या खराब स्थिति में हैं। नालियों और जल निकासी की समस्या के कारण गंदा पानी जमा होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। पर्याप्त सफाई, स्ट्रीट लाइट और पेयजल व्यवस्था का अभाव भी स्थानीय निवासियों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।
समिति का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में वर्षों से शिकायतें आती रही हैं, तो केवल शिकायत दर्ज करना या आश्वासन देना पर्याप्त नहीं है। संबंधित विभाग को यह बताना चाहिए कि शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई, कौन-सा कार्य कब पूरा होगा और उसकी जिम्मेदारी किस अधिकारी की है।
लीज-बैक और विवादित भूखंडों का प्लॉट-वाइज समाधान मांगा
तुस्याना क्षेत्र की समस्याओं में लीज-बैक एवं विवादित भूखंडों का मामला भी प्रमुख है। समिति के अनुसार कई आवंटियों की स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। ऐसे मामलों में अलग-अलग स्तर पर पत्राचार और शिकायतों के बावजूद लोगों को अंतिम समाधान का इंतजार है।
समिति ने GNIDA से मांग की है कि विवादित और लीज-बैक से जुड़े मामलों का प्लॉट-वाइज परीक्षण किया जाए और प्रत्येक मामले में स्पष्ट निर्णय दिया जाए। इससे न केवल वर्षों से लंबित विवादों का समाधान हो सकेगा, बल्कि निवासियों को अपने भूखंड और निर्माण से संबंधित स्थिति भी स्पष्ट रूप से पता चल सकेगी।
अतिक्रमण से प्रभावित आवंटियों को मिले समाधान
समिति ने अतिक्रमण से प्रभावित आवंटियों की समस्या को भी गंभीरता से उठाया है। जिन लोगों को आवंटन मिला है, लेकिन मौके पर अतिक्रमण अथवा अन्य कारणों से कब्जा प्राप्त करने में परेशानी हो रही है, उनके मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
समिति का कहना है कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय करते हुए प्रभावित आवंटियों को या तो नियमानुसार कब्जा दिलाया जाए अथवा नियमों के तहत वैकल्पिक समाधान उपलब्ध कराया जाए। वर्षों तक किसी आवंटी को अनिश्चितता में रखना उचित नहीं है।
रजिस्ट्री-म्यूटेशन के बाद भी निर्माण और कब्जे की स्थिति पर सवाल
स्थानीय निवासियों ने उन मामलों पर भी चिंता जताई है जहां रजिस्ट्री और म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद निर्माण अथवा कब्जे से जुड़ी स्थिति स्पष्ट नहीं है। समिति ने प्राधिकरण से ऐसे मामलों की जांच कर स्पष्ट स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है।
निवासियों का कहना है कि संपत्ति से जुड़े दस्तावेजी काम पूरे होने के बाद भी यदि मौके पर अधिकार और कब्जे को लेकर अनिश्चितता बनी रहे तो इससे नागरिकों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है।
डेयरी और तबेला गतिविधियों से गंदगी, जल निकासी की समस्या
क्षेत्र के आसपास संचालित डेयरी और तबेला गतिविधियों से उत्पन्न गंदगी तथा जल निकासी की समस्या भी समिति ने उठाई है। स्थानीय लोगों के अनुसार इन गतिविधियों के कारण कई स्थानों पर सफाई और जल निकासी की व्यवस्था प्रभावित होती है।
समिति ने मांग की है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर ऐसी गतिविधियों से उत्पन्न हो रही समस्याओं का स्थायी समाधान करे। साथ ही जल निकासी की व्यवस्था को इस तरह विकसित किया जाए कि बरसात अथवा अन्य परिस्थितियों में जलभराव की समस्या न हो।
सिर्फ घोषणा नहीं, अब Action Taken Report चाहिए
गौतम बुद्ध नगर विकास समिति की सबसे प्रमुख मांग वर्ष 2022 से लंबित शिकायतों पर Action Taken Report (ATR) जारी करने की है। समिति का कहना है कि प्रत्येक शिकायत के संबंध में यह स्पष्ट होना चाहिए कि उस पर क्या कार्रवाई की गई, कौन-सा कार्य लंबित है और उसे पूरा करने की अंतिम तारीख क्या है।
समिति ने विकास कार्यों की गुणवत्ता, स्वीकृत बजट और निर्धारित समयसीमा को भी सार्वजनिक करने की मांग की है। इससे विकास कार्यों में पारदर्शिता आएगी और स्थानीय नागरिक भी यह देख सकेंगे कि उनके क्षेत्र के लिए स्वीकृत योजनाओं पर वास्तव में कितना काम हुआ है।
6% आबादी क्षेत्र के लिए नोडल अधिकारी की मांग
समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए समिति ने 6% आबादी क्षेत्र के लिए एक समर्पित नोडल अधिकारी नियुक्त करने की मांग की है। समिति का तर्क है कि यदि एक जिम्मेदार अधिकारी को क्षेत्र की समस्याओं की निगरानी और समन्वय की जिम्मेदारी दी जाती है तो अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय बेहतर हो सकता है और शिकायतों के निस्तारण में तेजी आ सकती है।
इसके साथ ही समिति ने GNIDA के उच्च अधिकारियों और क्षेत्रीय निवासियों के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित करने की मांग की है। बैठक में प्रत्येक समस्या की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी को सौंपने और उसके समाधान की अंतिम समयसीमा तय करने की मांग की गई है।
निवासियों ने समिति के सामने रखी समस्याएं
क्षेत्र के निवासियों एस.एन. भट्टी, अरुण चौधरी, राज गुप्ता, अमन गुप्ता, सुदीश मौर्य, रजनी, अरविंद और धर्मेंद्र सहित अन्य लोगों ने अपनी समस्याएं गौतम बुद्ध नगर विकास समिति के समक्ष रखी हैं।
निवासियों का कहना है कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई और जीवनभर की पूंजी यहां घर और जमीन में लगाई है। इसलिए अब उनकी अपेक्षा केवल आश्वासन की नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था की है जिसका असर जमीन पर दिखाई दे।
समिति की GNIDA से 8 बड़ी मांगें
समिति ने प्राधिकरण के सामने प्रमुख रूप से आठ मांगें रखी हैं—लंबित विकास कार्यों के लिए निश्चित समयसीमा घोषित करना, लीज-बैक और विवादित भूखंडों का प्लॉट-वाइज समाधान करना, अतिक्रमण प्रभावित आवंटियों को नियमानुसार कब्जा या वैकल्पिक समाधान देना, सड़क-नाली-पानी-सफाई-स्ट्रीट लाइट और सुरक्षा व्यवस्था सुधारना, वर्ष 2022 से लंबित शिकायतों पर ATR जारी करना, विकास कार्यों की गुणवत्ता-बजट और समयसीमा सार्वजनिक करना, 6% आबादी क्षेत्र के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करना तथा निवासियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर प्रत्येक मामले की जिम्मेदारी और अंतिम समयसीमा तय करना।
अब सवाल आश्वासन का नहीं, जवाबदेही का है
तुस्याना के 6% आबादी क्षेत्र की तस्वीर अब इस सवाल पर टिकी है कि वर्षों से लंबित समस्याओं के समाधान के लिए प्राधिकरण की अगली कार्रवाई क्या होगी। स्थानीय नागरिकों और समिति का कहना है कि विकास केवल कागजों और घोषणाओं में नहीं, बल्कि सड़कों, नालियों, रोशनी, पानी और साफ-सफाई जैसी सुविधाओं के रूप में जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
गौतम बुद्ध नगर विकास समिति ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों को अब लंबी प्रतीक्षा और सामान्य आश्वासनों से आगे बढ़कर लिखित समयसीमा, पारदर्शी कार्ययोजना और वास्तविक परिणाम चाहिए।
स्थानीय निवासियों की मांग भी साफ है—अब घोषणा नहीं, क्रियान्वयन चाहिए। आश्वासन नहीं, Action Taken Report चाहिए। अनिश्चितता नहीं, स्पष्ट निर्णय चाहिए। और सबसे बढ़कर, जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।














