Friday, September 18, 2026
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गोवा में 22 सितंबर से कांग्रेस की 27 दिवसीय ‘गोय राखोन्न यात्रा’, 40 विधानसभा सीटों से होकर गुजरेगा अभियान; विपक्षी गठबंधन को लेकर AAP-GFP पर बरसी पार्टी

“2027 चुनाव से पहले कांग्रेस का बड़ा जनसंपर्क अभियान, खरगे-राहुल-प्रियंका समेत कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना”

पणजी: गोवा में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच पहुंच बढ़ाने के लिए बड़ा अभियान शुरू करने की तैयारी कर ली है। कांग्रेस की 27 दिवसीय ‘गोय राखोन्न यात्रा’ 22 सितंबर 2026 से शुरू होने जा रही है। कोंकणी भाषा के इस वाक्यांश ‘गोय राखोन्न’ का हिंदी अर्थ ‘गोवा की रक्षा’ या ‘गोवा को बचाना’ है। पार्टी के मुताबिक, यह यात्रा गोवा की सभी 40 विधानसभा सीटों से होकर गुजरेगी और इसके जरिए कांग्रेस स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं तथा आम लोगों से सीधे संवाद करेगी।

यात्रा को लेकर कांग्रेस की गोवा इकाई ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि अभियान का उद्देश्य केवल जनसंपर्क बढ़ाना नहीं, बल्कि विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करना भी है। यात्रा के दौरान कांग्रेस के कई राष्ट्रीय और वरिष्ठ नेता अलग-अलग पड़ावों पर शामिल हो सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और सचिन पायलट समेत कई बड़े नेता यात्रा का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि, इन नेताओं की यात्रा में भागीदारी और उनके कार्यक्रम को लेकर अंतिम कार्यक्रम पार्टी स्तर पर तय किया जाना बाकी है।

40 सीटों तक पहुंचेगी कांग्रेस की ‘गोय राखोन्न यात्रा’

कांग्रेस के इस अभियान की खास बात यह है कि यात्रा को पूरे राज्य में ले जाने की योजना है। गोवा में विधानसभा की कुल 40 सीटें हैं और कांग्रेस का लक्ष्य यात्रा के जरिए अधिक से अधिक क्षेत्रों में पहुंच बनाना है।

गोवा कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश चोडंकर ने टीवी9 भारतवर्ष से बातचीत में कहा कि यह यात्रा राज्य में पार्टी के संगठन और जनसंपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक अहम अभियान है। उन्होंने बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे सरकार को सत्ता से हटाने की दिशा में उठाया जाने वाला कदम बताया।

कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि चुनाव से काफी पहले राज्य के अलग-अलग हिस्सों में लगातार संपर्क अभियान चलाने से स्थानीय मुद्दों को समझने और पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में मदद मिल सकती है। यात्रा के दौरान रोजगार, विकास, स्थानीय समस्याओं, प्रशासन और राज्य के राजनीतिक भविष्य जैसे मुद्दों को उठाए जाने की संभावना है।

कांग्रेस का AAP-GFP गठबंधन पर हमला

‘गोय राखोन्न यात्रा’ की घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब गोवा की राजनीति में विपक्षी दलों के बीच संभावित गठबंधन और चुनावी समीकरणों को लेकर चर्चा तेज है। कांग्रेस ने हाल ही में आम आदमी पार्टी और गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) के बीच हुए गठबंधन पर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस ने मंगलवार को AAP और GFP के गठबंधन को ‘एक्सचेंज ऑफर’ करार दिया। पार्टी का आरोप है कि यह समझौता केवल गोवा की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग राज्यों में दोनों दलों की राजनीतिक जमीन को बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है।

कांग्रेस के मुताबिक, इस व्यवस्था के तहत गोवा में बीजेपी और पंजाब में आम आदमी पार्टी को राजनीतिक फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। पार्टी ने आरोप लगाया कि आगामी चुनावों को देखते हुए विपक्षी वोटों के समीकरण को प्रभावित करने के लिए इस तरह की राजनीतिक व्यवस्था तैयार की जा रही है।

हालांकि, कांग्रेस के इन आरोपों को संबंधित दलों के रुख के संदर्भ में देखा जाना जरूरी है। AAP और GFP ने अपने गठबंधन को गोवा के राजनीतिक हितों और बीजेपी को चुनौती देने के उद्देश्य से बनाया बताया है। ऐसे में कांग्रेस और गठबंधन के बीच आरोप-प्रत्यारोप ने राज्य की चुनावी राजनीति को और गरमा दिया है।

‘गोवा फर्स्ट’ गठबंधन के बाद बढ़ी सियासी हलचल

कांग्रेस का हमला उस समय सामने आया, जब गोवा फॉरवर्ड पार्टी के नेता विजय सरदेसाई और आम आदमी पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ‘गोवा फर्स्ट’ गठबंधन की घोषणा की।

दोनों पार्टियों ने कहा था कि वे बीजेपी को चुनौती देने के लिए साथ आई हैं और राज्य में ‘दलबदल-मुक्त’ राजनीति को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगी। गठबंधन की घोषणा के बाद गोवा में विपक्षी राजनीति को लेकर नए समीकरण बनने की चर्चा शुरू हो गई।

GFP और AAP की ओर से गठबंधन को बीजेपी के खिलाफ राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश किए जाने के बावजूद कांग्रेस ने इसकी मंशा पर सवाल उठाए हैं। गोवा कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश चोडंकर ने दावा किया कि यह गठबंधन राज्य में एक व्यापक विपक्षी मोर्चे को लेकर जनता की उम्मीदों के अनुरूप नहीं है।

कांग्रेस का तर्क है कि 2027 के चुनाव में बीजेपी को चुनौती देने के लिए विपक्षी दलों के बीच व्यापक एकजुटता की जरूरत है। पार्टी का आरोप है कि अलग-अलग गठबंधन और चुनावी समझौते विपक्षी वोटों के विभाजन की स्थिति पैदा कर सकते हैं।

‘AAP गोवा में बीजेपी का समर्थन करेगी’, कांग्रेस का आरोप

कांग्रेस नेता गिरीश चोडंकर ने AAP और GFP के गठबंधन को लेकर और भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि आम आदमी पार्टी ने बीजेपी के साथ किसी तरह का ‘एक्सचेंज ऑफर’ किया है।

चोडंकर के मुताबिक, इस कथित राजनीतिक व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना हो सकता है कि पंजाब में बीजेपी को AAP से राजनीतिक फायदा मिले और गोवा में AAP बीजेपी का समर्थन करे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की व्यवस्था गोवा की जनता के हितों के बजाय बीजेपी के राजनीतिक हितों को पूरा करने के लिए बनाई जा रही है।

हालांकि, कांग्रेस की ओर से लगाए गए इन आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, AAP और GFP ने अपने ‘गोवा फर्स्ट’ गठबंधन की घोषणा बीजेपी को चुनौती देने और दलबदल-मुक्त राजनीति की बात कहते हुए की है। इसलिए कांग्रेस और गठबंधन के दलों के बीच राजनीतिक दावों को लेकर स्पष्ट मतभेद दिखाई दे रहे हैं।

2027 से पहले विपक्षी खेमे में नई चुनौती

गोवा में 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। कांग्रेस की 27 दिन की यात्रा और AAP-GFP का ‘गोवा फर्स्ट’ गठबंधन इसी चुनावी तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है।

एक तरफ कांग्रेस राज्य की सभी 40 विधानसभा सीटों तक पहुंच बनाने और संगठन को मजबूत करने के लिए ‘गोय राखोन्न यात्रा’ निकालने जा रही है। दूसरी तरफ AAP और GFP ने गठबंधन के जरिए बीजेपी को चुनौती देने की घोषणा की है। ऐसे में आने वाले महीनों में विपक्षी दलों के बीच सीटों, गठबंधन और नेतृत्व को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

कांग्रेस के लिए यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी राज्य में अपने पारंपरिक संगठन और कार्यकर्ताओं को चुनाव से पहले सक्रिय करना चाहती है। 27 दिनों तक चलने वाला यह अभियान पार्टी को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दों और राजनीतिक माहौल को समझने का अवसर भी देगा।

यात्रा के जरिए कांग्रेस का फोकस संगठन और जनसंपर्क पर

‘गोय राखोन्न यात्रा’ को कांग्रेस केवल एक राजनीतिक यात्रा के बजाय राज्यव्यापी जनसंपर्क अभियान के रूप में पेश कर रही है। पार्टी की योजना सभी विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचने की है। वरिष्ठ नेताओं के संभावित शामिल होने से यात्रा को राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक महत्व मिल सकता है।

कांग्रेस की ओर से बीजेपी सरकार के खिलाफ लगाए जा रहे आरोप और AAP-GFP गठबंधन पर हमला इस बात के संकेत हैं कि पार्टी आगामी चुनाव के लिए अपनी राजनीतिक रणनीति को धीरे-धीरे स्पष्ट कर रही है।

22 सितंबर से शुरू होने वाली यह 27 दिवसीय यात्रा अब गोवा की राजनीति में आने वाले दिनों की गतिविधियों का केंद्र बनने जा रही है। 40 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरने वाली इस यात्रा के दौरान कांग्रेस जनता के बीच किन मुद्दों को प्रमुखता देती है, संगठन को कितना सक्रिय कर पाती है और विपक्षी गठबंधनों को लेकर उसकी रणनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है—इन सभी पर राजनीतिक नजरें रहेंगी।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
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