Thursday, August 27, 2026
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सैनिक कल्याण में उत्तराखंड बना देश का मॉडल, अग्निवीरों से शहीद परिवारों तक सरकार के बड़े फैसले

देहरादून: सैनिकों और पूर्व सैनिकों के सम्मान तथा उनके परिवारों के कल्याण के मामले में उत्तराखंड ने देश के सामने एक नई मिसाल पेश की है। सैन्य परंपराओं और बड़ी संख्या में सैन्य परिवारों वाले इस पर्वतीय राज्य ने सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और शहीद परिवारों के लिए कई ऐसी योजनाएं लागू की हैं, जो अब दूसरे राज्यों के लिए भी मॉडल बन रही हैं। खासतौर पर सेना में चार वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद वापस लौटने वाले अग्निवीरों के पुनर्वास और रोजगार को लेकर उत्तराखंड ने देश में सबसे पहले अलग रोजगार सेल बनाने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि सरकार वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और शहीद परिवारों के सम्मान एवं कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। सरकार ने न केवल आर्थिक सहायता में बढ़ोतरी की है, बल्कि रोजगार, सरकारी सेवा, संपत्ति खरीद और शहीदों की स्मृति को सुरक्षित रखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।

अग्निवीरों के लिए रोजगार सेल, सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण

अग्निवीर योजना के तहत चार वर्ष की सैन्य सेवा पूरी करने के बाद बड़ी संख्या में युवा वापस समाज में लौटेंगे। ऐसे युवाओं के सामने रोजगार और पुनर्वास की चुनौती को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने अलग रोजगार सेल बनाने का फैसला किया है। यह सेल अग्निवीरों को उनकी योग्यता और अनुभव के अनुरूप रोजगार उपलब्ध कराने में मदद करेगा।

इसके साथ ही राज्य सरकार पहले ही अग्निवीरों के लिए सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय ले चुकी है। सरकार का मानना है कि सेना में प्राप्त प्रशिक्षण, अनुशासन और तकनीकी दक्षता का लाभ युवाओं को राज्य की सरकारी और अन्य सेवाओं में मिलना चाहिए।

यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना में सेना का विशेष स्थान रहा है। राज्य के हजारों परिवार किसी न किसी रूप में सैन्य सेवा से जुड़े हैं।

शहीदों की प्रतिमाएं पैतृक गांवों में होंगी स्थापित

देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले उत्तराखंड के शहीद सैनिकों की स्मृति को उनके गांवों तक पहुंचाने का भी निर्णय लिया गया है। सरकार अब शहीदों की प्रतिमाएं उनके पैतृक गांवों में स्थापित करेगी।

इस फैसले का उद्देश्य केवल शहीदों को श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को उनके साहस और बलिदान से परिचित कराना भी है। गांवों में स्थापित होने वाली ये प्रतिमाएं युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेंगी और स्थानीय स्तर पर शहीद परिवारों के सम्मान को भी मजबूती देंगी।

परमवीर चक्र विजेताओं के परिवार को अब दो करोड़

सैनिक परिवारों के लिए आर्थिक सहायता के मोर्चे पर भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। परमवीर चक्र विजेताओं के परिवारों को मिलने वाली अनुग्रह राशि डेढ़ करोड़ रुपये से बढ़ाकर दो करोड़ रुपये कर दी गई है।

वहीं, अन्य सभी बलिदानी सैनिकों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। इसे 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया गया है। इसके अलावा विभिन्न वीरता पुरस्कारों से सम्मानित सैनिकों को मिलने वाली एकमुश्त और वार्षिक सहायता राशि में भी वृद्धि की गई है।

सरकार के इन फैसलों को शहीद परिवारों के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सैन्य धाम: शहीदों की शौर्यगाथा का स्थायी स्मारक

देहरादून में बन रहा सैन्य धाम उत्तराखंड की सैन्य परंपरा और शहीदों के बलिदान का स्थायी प्रतीक बनने जा रहा है। सरकार के अनुसार सैन्य धाम का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और अब इसे जल्द ही जनता को समर्पित करने की तैयारी है।

सैन्य धाम की खासियत यह है कि प्रदेश के शहीद सैनिकों के घर-आंगन की मिट्टी को सम्मानपूर्वक यहां लाया गया है। इसके साथ ही बलिदानियों की शौर्यगाथाओं को भी सैन्य धाम में स्थान दिया गया है।

यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाएगा कि देश की सीमाओं की रक्षा में उत्तराखंड के सैनिकों ने कितना बड़ा योगदान दिया है।

28 शहीद आश्रितों को मिली सरकारी नौकरी

शहीद परिवारों के पुनर्वास की दिशा में भी सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। धामी सरकार बलिदानी परिवार के एक पात्र सदस्य को सरकारी नौकरी देने की नीति पर काम कर रही है। अब तक 28 पात्र आश्रितों को सरकारी सेवा में समायोजित किया जा चुका है।

सरकार ने इस प्रक्रिया में परिवारों को राहत देने के लिए आवेदन की समय-सीमा भी बढ़ाई है। पहले यह अवधि दो वर्ष थी, जिसे बढ़ाकर पांच वर्ष कर दिया गया है। इससे ऐसे परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जो किसी कारणवश निर्धारित अवधि में आवेदन नहीं कर पाते थे।

सैनिकों को संपत्ति खरीद पर स्टाम्प शुल्क में राहत

सेवारत और पूर्व सैनिकों को आर्थिक राहत देने के लिए संपत्ति खरीद पर भी सरकार ने विशेष प्रावधान किया है। 25 लाख रुपये तक की संपत्ति खरीद पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट दी जा रही है।

यह सुविधा सैनिक परिवारों के लिए घर या जमीन खरीदने के दौरान आर्थिक बोझ कम करने में मददगार साबित हो सकती है। सैन्य सेवा के बाद अपने राज्य में बसने वाले पूर्व सैनिकों के लिए इस तरह की रियायत विशेष महत्व रखती है।

भूमि धोखाधड़ी के मामलों में सरकार बनेगी मददगार

सैनिकों और पूर्व सैनिकों के परिवारों से जुड़े भूमि विवाद भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। ऐसे कई मामले जिला अदालतों में लंबित हैं, जिनमें सैनिक परिवारों के साथ भूमि धोखाधड़ी अथवा संपत्ति संबंधी विवाद सामने आए हैं।

सरकार इन मामलों में पीड़ित सैनिक और पूर्व सैनिक परिवारों को न्याय दिलाने के लिए मदद उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उद्देश्य है कि सैन्य सेवा में अपना जीवन समर्पित करने वाले परिवारों को सेवानिवृत्ति या सेवा के बाद संपत्ति संबंधी विवादों में अकेले संघर्ष न करना पड़े।

सम्मान से कल्याण तक व्यापक नीति

उत्तराखंड सरकार की सैनिक कल्याण नीति को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रखा गया है। अग्निवीरों के रोजगार से लेकर शहीद परिवारों की सरकारी नौकरी, वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों की सहायता, संपत्ति खरीद पर राहत और शहीदों की स्मृति को स्थायी स्वरूप देने तक कई स्तरों पर फैसले लिए गए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार सैन्य धाम राज्य की समृद्ध सैन्य विरासत का प्रतीक बनेगा। सरकार का प्रयास है कि उत्तराखंड के सैनिकों और उनके परिवारों को सम्मान के साथ-साथ जरूरत के समय प्रभावी सरकारी सहयोग भी मिले।

सैनिकों की बहादुरी और बलिदान की लंबी परंपरा वाले उत्तराखंड में सरकार के ये फैसले केवल योजनाएं नहीं, बल्कि उस सामाजिक जिम्मेदारी को निभाने की कोशिश हैं, जिसके तहत देश की रक्षा करने वाले जवानों और उनके परिवारों को राज्य का साथ हर परिस्थिति में मिलता रहे।

यही वजह है कि सैनिक कल्याण के क्षेत्र में उत्तराखंड की पहल अब केवल राज्य तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि दूसरे राज्यों के लिए भी एक संभावित मॉडल के रूप में देखी जा रही है।

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VIKAS TRIPATHI
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