लंदन। ब्रिटेन में गंभीर रूप से बीमार मरीजों को चिकित्सकीय निगरानी में ‘असिस्टेड डाइंग’ की अनुमति देने वाला बहुचर्चित विधेयक हाउस ऑफ कॉमन्स में खारिज हो गया। चार घंटे की बहस के बाद सांसदों ने 286 के मुकाबले 270 वोटों से Terminally Ill Adults (End of Life) Bill को नामंजूर कर दिया।
इस फैसले के साथ इंग्लैंड और वेल्स में असिस्टेड डाइंग को कानूनी मान्यता देने की करीब दो साल से चल रही संसदीय प्रक्रिया फिलहाल समाप्त हो गई है।
प्रस्तावित कानून के तहत ऐसे गंभीर रूप से बीमार वयस्कों को असिस्टेड डाइंग का विकल्प देने की बात कही गई थी, जिनके बारे में चिकित्सकीय आकलन में माना गया हो कि उनके पास छह महीने से कम जीवन शेष है।
इसके लिए मेडिकल विशेषज्ञों की जांच और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं को अनिवार्य बनाया जाना था। सरकार ने इस मुद्दे पर सांसदों को स्वतंत्र रूप से मतदान करने की अनुमति दी थी, इसलिए वोटिंग पार्टी लाइन के बजाय व्यक्तिगत विचारों के आधार पर हुई।
पिछले साल मिला था समर्थन
इस विधेयक का एक समान संस्करण पिछले साल हाउस ऑफ कॉमन्स में 23 वोटों के अंतर से पारित हुआ था। हालांकि, बाद में हाउस ऑफ लॉर्ड्स में प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी और प्रस्ताव कानून का रूप नहीं ले पाया।
इस बार कॉमन्स में विधेयक के खारिज होने के बाद इसे लेकर चल रही मौजूदा संसदीय पहल पर विराम लग गया है।
विरोधियों ने उठाए सुरक्षा से जुड़े सवाल
विधेयक के विरोध में सांसदों और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने कई चिंताएं सामने रखीं। उनका कहना था कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे कमजोर लोगों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दबाव पड़ने की आशंका को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कुछ विशेषज्ञों ने मेडिकल पूर्वानुमानों की अनिश्चितता पर भी सवाल उठाए। उनका तर्क था कि किसी मरीज के पास कितना समय शेष है, इसका सटीक अनुमान लगाना हमेशा संभव नहीं होता।
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परिस्थितियों वाले लोगों की सुरक्षा और प्रस्तावित सुरक्षा उपायों की पर्याप्तता को लेकर भी कई चिकित्सा संस्थानों और धार्मिक नेताओं ने चिंता जताई।
समर्थकों ने बताया ‘व्यक्तिगत अधिकार’ का मुद्दा
विधेयक के समर्थकों का कहना था कि गंभीर और असाध्य बीमारी के अंतिम चरण में पहुंच चुके लोगों को अपने जीवन के अंतिम समय को लेकर अधिक विकल्प मिलना चाहिए। उनका तर्क था कि ब्रिटेन में ऐसी व्यवस्था होने से कुछ मरीजों को इस उद्देश्य से विदेश जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
विधेयक की समर्थक लॉरेन एडवर्ड्स ने नतीजे को निराशाजनक बताया। हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में इस मुद्दे पर फिर से संसद में बहस हो सकती है।
अब आगे क्या?
हाउस ऑफ कॉमन्स में मतदान के बाद इंग्लैंड और वेल्स में असिस्टेड डाइंग को कानूनी बनाने की मौजूदा कोशिश फिलहाल समाप्त हो गई है। हालांकि, इस मुद्दे पर बहस पूरी तरह खत्म होने के संकेत नहीं हैं।
ब्रिटेन में यह मामला अब भी व्यक्तिगत स्वतंत्रता, मरीजों की सुरक्षा, मेडिकल नैतिकता और कानून के बीच संतुलन का बड़ा सवाल बना हुआ है।
286 बनाम 270 वोटों का फैसला यह साफ करता है कि ब्रिटिश संसद इस संवेदनशील मुद्दे पर अभी भी गहराई से विभाजित है।














