Monday, September 7, 2026
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सत्य निकेतन में मौत का मंजर: पांच मंजिला PG इमारत भरभराकर गिरी, 6 की मौत; मलबे में जिंदगी की तलाश जारी

“संकरी गली में चंद सेकेंड में जमींदोज हुई पूरी इमारत, 10 से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू; 30 से 50 लोगों के दबे होने की आशंका”

नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन में रविवार दोपहर एक बड़ा हादसा उस समय हो गया, जब लड़कों के पेइंग गेस्ट (PG) के रूप में इस्तेमाल हो रही पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। देखते ही देखते पूरी इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 10 से ज्यादा लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। राहत और बचाव अभियान देर रात तक जारी रहा।

घनी आबादी और बेहद संकरी गलियों वाले सत्य निकेतन इलाके में हुए इस हादसे ने राजधानी में अनधिकृत निर्माण, भवनों के रखरखाव और PG में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मलबे में अब भी कई लोगों के फंसे होने की आशंका है। आशंका जताई जा रही है कि 30 से 50 लोग मलबे में दबे हो सकते हैं।

21 सेकेंड के CCTV फुटेज में कैद हुआ खौफनाक मंजर

हादसे का एक 21 सेकेंड का CCTV फुटेज सामने आया है, जिसने हादसे की भयावहता को सामने ला दिया है। फुटेज में दिखाई देता है कि बेसमेंट समेत पांच मंजिला इमारत कुछ ही सेकेंड में अचानक भरभराकर नीचे आ जाती है। इमारत के सामने बैठे एक बुजुर्ग ने जैसे ही खतरा भांपा, वह वहां से भागकर अपनी जान बचाते नजर आए।

इमारत के गिरते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। धूल का गुबार छा गया और आसपास के लोग मदद के लिए घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। कुछ ही देर में पुलिस, दमकल, आपदा प्रबंधन और अन्य एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंच गईं।

ग्राउंड फ्लोर पर चल रहा था मरम्मत का काम, इसी दौरान ढही इमारत

पुलिस के मुताबिक, इमारत का इस्तेमाल लड़कों के PG के तौर पर किया जा रहा था और हादसे के समय ग्राउंड फ्लोर पर मरम्मत का काम चल रहा था। प्रारंभिक तौर पर आशंका है कि निर्माण या मरम्मत से जुड़ी गतिविधियों के कारण इमारत की संरचना प्रभावित हुई हो।

हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। स्थानीय लोगों का दावा है कि पिछले कुछ दिनों से बारिश के कारण बेसमेंट में पानी जमा हो रहा था। उनका कहना है कि इससे इमारत की नींव कमजोर होने की आशंका थी। पुलिस और प्रशासन सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं।

दिल्ली पुलिस ने साउथ कैंपस थाने में बिल्डिंग मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप गैर-इरादतन हत्या, भवन के रखरखाव में लापरवाही और लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने से जुड़े हैं। आरोपितों की तलाश के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं।

NDRF की दो टीमें और श्वान दस्ते ने संभाला मोर्चा

मलबे में दबे लोगों की तलाश के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की दो टीमें, करीब 70 कर्मियों के साथ, मौके पर पहुंचीं। उनके साथ श्वान दस्ता भी लगाया गया। बचावकर्मी बेहद सावधानी से मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश करते रहे।

NDRF अधिकारियों के मुताबिक, मलबे के नीचे फंसे लोगों को सांस लेने में मदद पहुंचाने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर भी नीचे भेजे गए। दमकल की गाड़ियां घटनास्थल पर तैनात रहीं। दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, दिल्ली नगर निगम, कैट और नागरिक सुरक्षा की टीमें लगातार बचाव अभियान में जुटी रहीं।

स्थानीय लोगों ने भी बचाव अभियान में बढ़ाया हाथ

हादसे के बाद राहत एवं बचाव कार्य में स्थानीय लोग और प्रत्यक्षदर्शी भी एजेंसियों के साथ जुट गए। संकरी गलियों और मलबे के बीच भारी मशीनों की आवाजाही में आ रही दिक्कतों के बीच कई लोगों ने अपने हाथों और उपलब्ध औजारों की मदद से मलबा हटाने तथा फंसे लोगों को तलाशने में मदद की।

सबसे भावुक कर देने वाले दृश्य तब सामने आए, जब मलबे में दबे कुछ छात्रों की तस्वीरें सामने आईं। बताया गया कि कुछ छात्र अपने मोबाइल फोन से बाहर मौजूद लोगों को फोन कर मदद मांग रहे थे। इन तस्वीरों ने पूरे इलाके को झकझोर दिया।

PG में बड़ी संख्या में छात्र, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

सत्य निकेतन में बड़ी संख्या में छात्र PG और हॉस्टलों में रहते हैं। इलाका संकरी और भीड़भाड़ वाली गलियों के लिए जाना जाता है। यहां कई मकानों को PG में तब्दील कर दिया गया है और आसपास बड़ी संख्या में छात्रावास तथा भोजनालय संचालित होते हैं।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, आसपास की कई इमारतें बेहद पास-पास बनी हुई हैं। ऐसे में किसी आपात स्थिति में एंबुलेंस, दमकल या बचाव दल के लिए घटनास्थल तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इलाके में रहने वाले कई छात्र अलग-अलग राज्यों से आकर यहां पढ़ाई कर रहे हैं।

स्थानीय निवासी प्रियंका ने इमारतों के रखरखाव पर सवाल उठाते हुए कहा कि इलाके में कई मकानों को पांच-छह मंजिल तक बनाया गया है और उन्हें PG में बदल दिया गया है। उनके मुताबिक, कई संपत्ति मालिक खुद इलाके में नहीं रहते और किराया ऑनलाइन लेते हैं।

MCD की कार्रवाई, पास की महिला PG इमारत सील

हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने आसपास की इमारतों को लेकर भी कार्रवाई शुरू कर दी। पास में स्थित एक अन्य इमारत, जिसका इस्तेमाल महिला PG के रूप में किया जा रहा था, वहां से किरायेदारों को बाहर निकालकर इमारत को सील कर दिया गया।

इस कार्रवाई के बाद इलाके में भवनों की सुरक्षा और निर्माण की वैधता को लेकर प्रशासनिक जांच तेज हो गई है। MCD की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं और MCD कमिश्नर के इस्तीफे की मांग सामने आई है।

MCD के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, हादसे में ढही इमारत पुनर्वास कॉलोनी में करीब 55 वर्ग गज क्षेत्र में बनी हुई थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इसे भूतल और चार मंजिल यानी G+4 संरचना के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था, जबकि निर्माण की अनुमति पहले केवल ग्राउंड फ्लोर और एक मंजिल यानी G+1 के लिए दी गई थी। ऐसे में स्वीकृत निर्माण और वास्तविक संरचना के बीच अंतर भी जांच का अहम हिस्सा बन गया है।

Civic Center के बाहर ABVP का प्रदर्शन, पुलिस से धक्का-मुक्की

हादसे के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के करीब 150-200 छात्र दिल्ली नगर निगम मुख्यालय स्थित सिविक सेंटर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने गेट नंबर पांच से परिसर में प्रवेश किया और मुख्य इमारत के बाहर नारेबाजी करते हुए MCD की कार्यप्रणाली का विरोध किया।

पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों ने मुख्य इमारत में जबरन प्रवेश करने की कोशिश की। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। पुलिस ने करीब 15 छात्रों को हिरासत में लिया और उन्हें कमला मार्केट थाने ले जाया गया। उनके खिलाफ दिल्ली पुलिस अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की गई।

इस बीच CJP, ABVP और NSUI समेत विभिन्न संगठनों ने भी हादसे को लेकर आवाज उठाई और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

मुख्यमंत्री ने मौके पर पहुंचकर दिए जांच के आदेश

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्य का जायजा लिया। इसके बाद वह AIIMS ट्रॉमा सेंटर पहुंचीं और घायलों तथा डॉक्टरों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने मेडिकल टीम को घायलों का उचित इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, प्रारंभिक आकलन के आधार पर भवन मालिक के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि घायल छात्रों के परिवारों के संपर्क में अधिकारी हैं और उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

अमित शाह ने ली हालात की जानकारी

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली पुलिस आयुक्त और NDRF के महानिदेशक से हादसे की जानकारी ली। उन्होंने राहत और बचाव अभियान की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त की।

अमित शाह ने कहा कि स्थानीय प्रशासन और NDRF मिलकर तेजी से बचाव अभियान चला रहे हैं। घायलों को हर जरूरी चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने सभी घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई प्रमुख नेताओं ने हादसे पर दुख जताया और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

सवाल सिर्फ एक इमारत का नहीं, पूरे सिस्टम की निगरानी का है

सत्य निकेतन की घटना ने राजधानी में तेजी से बढ़ते PG कल्चर और भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जहां हजारों छात्र किराए के कमरों और PG में रहकर पढ़ाई करते हैं, वहां भवन की मजबूती, स्वीकृत नक्शे, अवैध निर्माण, मरम्मत और फायर सेफ्टी जैसे मानकों की निगरानी कितनी प्रभावी है—अब इस पर गंभीर बहस शुरू हो गई है।

एक पांच मंजिला इमारत का कुछ ही सेकेंड में मलबे में बदल जाना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की भी परीक्षा है जो शहर में भवनों के निर्माण और उनके इस्तेमाल की निगरानी करती है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसी जिंदगी को बाहर निकालना है। बचाव अभियान जारी है और हर गुजरते मिनट के साथ उम्मीद और चिंता दोनों बढ़ती जा रही हैं।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
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