कीव/मॉस्को: रूस-यूक्रेन युद्ध एक बार फिर अत्यधिक हिंसक चरण में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है। सोमवार को रूस ने यूक्रेन के कई शहरों पर मिसाइलों और ड्रोन से व्यापक हमले किए। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार इन हमलों में कम से कम 12 नागरिकों की मौत हुई, जबकि 40 से अधिक लोग घायल हो गए। लगातार बढ़ते हवाई हमलों ने एक बार फिर नागरिक सुरक्षा, ऊर्जा अवसंरचना और युद्ध की दिशा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
कई शहरों पर एक साथ हमले
यूक्रेनी प्रशासन के अनुसार सबसे भीषण हमला निप्रो (Dnipro) शहर में हुआ, जहां एक रूसी मिसाइल ने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया। इस हमले में छह लोगों की मौत हुई और 29 अन्य घायल हो गए।
दक्षिणी शहर जापोरिज्जिया (Zaporizhzhia) में एक ड्रोन हमले के दौरान यात्रियों से भरी एक मिनीबस प्रभावित हुई, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक बच्चे सहित छह लोग घायल हुए।
इसके अलावा सूमी और खार्किव क्षेत्रों में भी ड्रोन हमलों से नागरिक हताहतों और संपत्ति के नुकसान की खबरें सामने आई हैं।
ऊर्जा ढांचे पर बढ़ता दबाव
लगातार हवाई हमलों के कारण यूक्रेन के कम से कम आठ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। राष्ट्रीय ग्रिड ऑपरेटर के अनुसार, भीषण गर्मी और एयर कंडीशनर के बढ़ते उपयोग के बीच बिजली प्रणाली पहले से ही दबाव में थी, ऐसे में ऊर्जा अवसंरचना पर हुए हमलों ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाए जाने से केवल सैन्य ही नहीं, बल्कि मानवीय संकट भी गहरा सकता है।
जेलेंस्की ने फिर दोहराई एयर डिफेंस की मांग
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने हमलों को नागरिक आबादी पर किया गया “क्रूर हमला” बताते हुए पश्चिमी सहयोगी देशों से अत्याधुनिक एंटी-बैलिस्टिक एयर डिफेंस सिस्टम उपलब्ध कराने की अपील दोहराई।
उन्होंने कहा कि रूस की बैलिस्टिक मिसाइलों और लंबी दूरी के ड्रोन हमलों से प्रभावी सुरक्षा के लिए आधुनिक रक्षा प्रणालियां आवश्यक हैं। साथ ही उन्होंने यूरोपीय देशों से संयुक्त रक्षा सहयोग और मिसाइल-रोधी तकनीकों के विकास में तेजी लाने का आग्रह किया।
रूस का रुख बरकरार
दूसरी ओर, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस के सैन्य अभियान के उद्देश्य में कोई बदलाव नहीं आया है और सेना अपने घोषित लक्ष्यों की प्राप्ति तक कार्रवाई जारी रखेगी।
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी संकेत दिया कि यूक्रेन के हालिया ड्रोन हमलों से कुछ अस्थायी चुनौतियां अवश्य उत्पन्न हुई हैं, लेकिन इससे रूस की सैन्य रणनीति में कोई परिवर्तन नहीं होगा।
बदलता युद्ध, बदलती रणनीति
सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन ने लंबी दूरी के ड्रोन हमलों के जरिए रूस के ईंधन भंडारण, सैन्य ठिकानों और लॉजिस्टिक नेटवर्क पर दबाव बढ़ाया है। इसके जवाब में रूस ने मिसाइलों और ड्रोन के माध्यम से यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे, परिवहन नेटवर्क और अन्य महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं पर हमलों की तीव्रता बढ़ा दी है।
युद्ध अब केवल मोर्चे पर लड़ने वाली सेनाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि ऊर्जा व्यवस्था, आपूर्ति श्रृंखला, साइबर क्षमताओं और लंबी दूरी की मारक तकनीकों का भी महत्वपूर्ण संघर्ष बन चुका है।
मानवीय संकट लगातार गहरा रहा
युद्ध के कई वर्ष बीत जाने के बावजूद किसी स्थायी समाधान के संकेत नहीं दिख रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच सैन्य टकराव लगातार जारी है, जबकि इसकी सबसे बड़ी कीमत आम नागरिक चुका रहे हैं। नागरिक हताहतों, विस्थापन, ऊर्जा संकट और बुनियादी सेवाओं पर बढ़ते दबाव ने इस संघर्ष को दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में शामिल कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से युद्धविराम और कूटनीतिक समाधान की अपीलें लगातार जारी हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर संघर्ष की तीव्रता फिलहाल कम होती नजर नहीं आ रही।














